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पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत की मजबूत तैयारी: ईंधन आपूर्ति सुचारू, जहाज और नागरिक सुरक्षित

नयी दिल्ली, 15  मार्च ( PIB) ।   पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष के बीच भारत सरकार ने ईंधन आपूर्ति, समुद्री सुरक्षा तथा वहां स्थित भारतीय नागरिकों के कल्याण सुनिश्चित करने के लिए व्यापक और समन्वित उपाय किए हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, पोत परिवहन महानिदेशालय तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच मजबूत तालमेल के माध्यम से स्थिति पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि देश में पेट्रोल, डीजल तथा एलपीजी की कोई कमी नहीं है तथा नागरिकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है।

ईंधन आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति

देश भर में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति सुचारू रूप से जारी है। सभी तेल शोधन कारखाने पूर्ण क्षमता से संचालित हो रहे हैं तथा कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। भारत पेट्रोल और डीजल के उत्पादन में आत्मनिर्भर है तथा घरेलू मांग पूरी करने के लिए इनका आयात आवश्यक नहीं है। खुदरा पंपों पर ईंधन की कोई कमी नहीं आई है तथा आपूर्ति नियमित बनी हुई है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक भय या जमाखोरी से बचें क्योंकि पर्याप्त स्टॉक मौजूद हैं। प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में प्राथमिकता वाले क्षेत्रों जैसे घरेलू पीएनजी और सीएनजी को पूर्ण आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है जबकि औद्योगिक एवं वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को लगभग 80 प्रतिशत स्तर पर विनियमित किया गया है। प्रमुख शहरों में वाणिज्यिक एलपीजी उपभोक्ताओं को पीएनजी कनेक्शन अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है तथा इसके लिए सीजीडी कंपनियों के पोर्टल या अन्य माध्यमों से आवेदन सुगम बनाया गया है। 14 मार्च 2026 को मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने पीएनजीआरबी तथा सीजीडी संस्थाओं के साथ बैठक कर पीएनजी कनेक्शन की स्थिति तथा एलपीजी से पीएनजी में परिवर्तन की समीक्षा की। एलपीजी की निगरानी निरंतर जारी है तथा वितरकों में आपूर्ति बंद होने की कोई सूचना नहीं है। हाल के दिनों में एलपीजी बुकिंग में कमी आई है, जहां 13 मार्च को 88.8 लाख बुकिंग दर्ज हुईं जबकि कल यह संख्या लगभग 77 लाख रही। ऑनलाइन बुकिंग का प्रतिशत 84 से बढ़कर 87 हो गया है जो डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग को दर्शाता है। एलपीजी नियंत्रण आदेश में 14 मार्च 2026 को संशोधन कर पीएनजी उपभोक्ताओं को अपना घरेलू एलपीजी कनेक्शन जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है तथा नए एलपीजी कनेक्शन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसका उद्देश्य एलपीजी की उपलब्धता को और बेहतर बनाना है। शहरी क्षेत्रों में बुकिंग अंतराल 25 दिनों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिनों तक निर्धारित किया गया है ताकि समान वितरण सुनिश्चित हो। वैकल्पिक ईंधनों के लिए 48,000 किलोलीटर केरोसिन का अतिरिक्त आवंटन किया गया है तथा कुछ क्षेत्रों जैसे आतिथ्य एवं रेस्तरां में केरोसिन या कोयले के उपयोग की अनुमति दी गई है। कई राज्यों ने गैर-घरेलू एलपीजी आवंटन के आदेश जारी किए हैं तथा वाणिज्यिक सिलेंडरों का प्राथमिकता आधार पर वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है।

प्रवर्तन एवं निगरानी व्यवस्था

जमाखोरी तथा कालाबाजारी पर सख्ती बरती जा रही है। आंध्र प्रदेश, बिहार सहित कई राज्यों में छापेमारी की जा रही है तथा तेल विपणन कंपनियों के अधिकारी वितरक केंद्रों पर औचक निरीक्षण कर रहे हैं। 22 राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों ने स्थिति की निगरानी के लिए नियंत्रण कक्ष स्थापित किए हैं तथा अन्य राज्य भी ऐसी व्यवस्था कर रहे हैं। उच्च स्तरीय बैठकें आयोजित कर आपूर्ति की निरंतरता तथा कालाबाजारी रोकने के उपाय किए जा रहे हैं।

समुद्री सुरक्षा एवं जहाजरानी संचालन

पश्चिम एशिया में भारतीय जहाजों तथा नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। फुजैराह टर्मिनल पर हालिया घटना के बावजूद भारतीय ध्वज वाला पोत जग लाडकी 80,800 मीट्रिक टन मुरबान कच्चे तेल लेकर सुरक्षित रूप से भारत के लिए रवाना हो गया है तथा जहाज पर सवार सभी नाविक सुरक्षित हैं। दो एलपीजी वाहक जहाज शिवालिक तथा नंदा देवी भी होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर भारत की ओर बढ़ रहे हैं तथा जल्द ही मुंद्रा तथा कांदला बंदरगाह पहुंचेंगे। वर्तमान में फारस की खाड़ी क्षेत्र में 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज तथा 611 नाविक मौजूद हैं तथा पोत परिवहन महानिदेशालय लगातार निगरानी कर रहा है। नियंत्रण कक्ष सक्रिय होने के बाद हजारों फोन कॉल तथा ईमेल प्राप्त हुए हैं तथा 276 नाविकों की सुरक्षित वापसी में सहायता की गई है। देश के सभी बंदरगाह पोतों की आवाजाही तथा माल संचालन पर कड़ी नजर रख रहे हैं।

क्षेत्र में भारतीय नागरिकों का कल्याण

विदेश मंत्रालय तथा भारतीय दूतावास 24×7 हेल्पलाइन संचालित कर भारतीय समुदाय की सहायता कर रहे हैं। दूतावास स्थानीय अधिकारियों से संपर्क में हैं तथा वीजा, रसद तथा पारगमन सहायता प्रदान कर रहे हैं। 28 फरवरी 2026 से अब तक लगभग 1,94,000 यात्री भारत लौट चुके हैं। यूएई, सऊदी अरब, ओमान आदि में उड़ानें संचालित हो रही हैं जबकि कुछ देशों में हवाई क्षेत्र बंद होने पर सऊदी अरब के रास्ते पारगमन की व्यवस्था है। दुर्भाग्यवश संघर्ष में पांच भारतीयों की मृत्यु हुई है तथा एक लापता है, दूतावास उनके पार्थिव शरीर तथा लापता व्यक्ति के मामले में प्रयासरत हैं।

सरकार सभी मंत्रालयों के समन्वय से स्थिति पर नजर रखे हुए है तथा राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठा रही है। नागरिकों से आग्रह है कि वे आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें, डिजिटल बुकिंग का उपयोग करें तथा घबराहट से बचें।

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