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उत्तराखण्ड ने सौर ऊर्जा स्थापना में 1 गीगावाट काआंकड़ा पार किया

 

 देहरादून,18  फरबरी।   उत्तराखंड ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए राज्य में स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता को 1 गीगावाट (1000 मेगावाट) से अधिक के स्तर पर पहुँचा दिया है। नवीनतम आँकड़ों के अनुसार प्रदेश की कुल स्थापित सौर क्षमता लगभग 1027.87 मेगावाट हो चुकी है। यह उपलब्धि राज्य की स्वच्छ और हरित ऊर्जा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

मुख्यमंत्री  ने कहा कि “आत्मनिर्भर भारत” और हरित ऊर्जा के विजन से प्रेरित होकर राज्य में सौर ऊर्जा को जनआंदोलन का रूप दिया गया है। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से हजारों युवाओं और स्थानीय उद्यमियों को स्वरोजगार के अवसर मिले हैं।

विभिन्न योजनाओं से मिली गति

राज्य में यह उपलब्धि अनेक योजनाओं और पहलों के माध्यम से संभव हुई है, जिनमें शामिल हैं—

ग्रिड कनेक्टेड रूफटॉप सोलर परियोजनाएं (पीएम सूर्यघर योजना सहित)

  • ग्राउंड माउंटेड सोलर प्लांट
  • सरकारी भवनों पर सौर संयंत्र
  • कृषि क्षेत्र के लिए सोलर पंप
  • घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सौर योजनाएं
  • वाणिज्यिक एवं औद्योगिक क्षेत्र की परियोजनाएं

क्षमता का विस्तृत विवरण

राज्य की कुल स्थापित सौर क्षमता में प्रमुख योगदान इस प्रकार है—

  • ग्राउंड माउंटेड प्लांट – 397 मेगावाट
  • रूफटॉप सोलर (पीएम सूर्यघर सहित) – 241 मेगावाट
  • मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना – 137 मेगावाट
  • कॉमर्शियल नेट मीटरिंग – 110 मेगावाट
  • कैप्टिव सोलर पावर प्लांट – 51 मेगावाट
  • कैनाल टॉप एवं कैनाल बैंक परियोजनाएं – 37 मेगावाट
  • सरकारी भवनों पर संयंत्र – 26 मेगावाट

वर्तमान में मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के अंतर्गत 100 मेगावाट से अधिक क्षमता के संयंत्रों की स्थापना प्रगति पर है। इसके अतिरिक्त, 30 मेगावाट के कैप्टिव सोलर प्लांट और 13.5 मेगावाट क्षमता के संयंत्र सरकारी भवनों पर लगाए जा रहे हैं।

इन पहलों से न केवल स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि हुई है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में कमी, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिला है।

यूरेडा की महत्वपूर्ण भूमिका

इस ऐतिहासिक उपलब्धि में Uttarakhand Renewable Energy Development Agency (UREDA) की विशेष भूमिका रही है। एजेंसी ने राज्य में सौर परियोजनाओं के क्रियान्वयन, जन-जागरूकता, तकनीकी मार्गदर्शन तथा सरकारी योजनाओं के प्रभावी संचालन में अग्रणी योगदान दिया है। दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों तक सौर ऊर्जा समाधान पहुँचाने के निरंतर प्रयासों ने इस उपलब्धि को संभव बनाया है।

नीतिगत सहयोग से मिली मजबूती

राज्य सरकार द्वारा अनुकूल नीतिगत वातावरण, सब्सिडी प्रावधान, सरल अनुमोदन प्रक्रिया और निजी निवेश को प्रोत्साहन जैसी पहलों ने भी सकारात्मक परिणाम दिए हैं।उत्तराखंड अब तेजी से देश के अग्रणी सौर ऊर्जा राज्यों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर रहा है और आने वाले समय में हरित ऊर्जा के क्षेत्र में और अधिक विस्तार की दिशा में अग्रसर है।

 

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