Front Page

जियोथर्मल पॉलिसी बनाने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य: डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम

ग्रीन एनर्जी कॉन्क्लेव में ऊर्जा सचिव ने बताया—2047 के लक्ष्य के लिए चाहिए एक्स्पोनेंशियल ऊर्जा वृद्धि

देहरादून, 14 नवंबर। छठे देहरादून अंतरराष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी महोत्सव के दूसरे दिन आयोजित ग्रीन एनर्जी कॉन्क्लेव में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित ऊर्जा एवं नियोजन सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने जियोथर्मल एनर्जी पॉलिसी बनाई। इसी मॉडल के आधार पर भारत सरकार ने भी राष्ट्रीय स्तर पर जियोथर्मल पॉलिसी तैयार करने की दिशा में कार्य शुरू किया है।

उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए ऊर्जा सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता होगी, इसलिए ऊर्जा उत्पादन में एक्स्पोनेंशियल वृद्धि अनिवार्य है। इस लक्ष्य को देखते हुए पूरे देश में ग्रीन एनर्जी के गैर–परंपरागत स्रोतों पर तेजी से काम चल रहा है, जिनसे कार्बन फुटप्रिंट नगण्य हो।

डॉ. सुंदरम ने बताया कि सोलर ऊर्जा ग्रीन एनर्जी का बड़ा स्रोत है, लेकिन इसका उपयोग रात में नहीं हो पाता। बैटरी स्टोरेज सिस्टम की लागत बहुत अधिक होने के कारण यह अभी भी चुनौती बना हुआ है। वैज्ञानिक इस पर शोध कर रहे हैं कि किस प्रकार सोलर ऊर्जा को किफायती तरीके से स्टोर किया जा सके, ताकि रात में भी इसका उपयोग संभव हो।

ओएनजीसी के मुख्य महाप्रबंधक ई. संजय मुखर्जी ने बताया कि ओएनजीसी ने उत्तराखंड में जियोथर्मल ऊर्जा के 62 संभावित स्रोत चिन्हित किए हैं, जिनके दोहन पर कार्य जारी है। उरेडा द्वारा पूरे प्रदेश में सोलर ऊर्जा के विकास कार्यों पर विस्तृत प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया गया।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी महोत्सव में विविध कार्यक्रम

महोत्सव के दूसरे दिन नौ से अधिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिनमें स्पेस साइंस क्विज, रूरल एंटरप्रेन्योरशिप एवं स्टार्टअप कॉन्क्लेव, मैजिक ऑफ मैथ्स, मॉडल रॉकेट्री वर्कशॉप, स्टेम वर्कशॉप, बायोटेक्नोलॉजी कॉन्क्लेव, साइबर सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस और कांस्टा कॉन्फ्रेंस प्रमुख रहे।

साइबर सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में मुख्य अतिथि के रूप में एसटीएफ के एसएसपी नवनीत भुल्लर, नेशनल ई–गवर्नेंस प्रोग्राम के उत्तराखंड हेड रवि शंकर सिंह तथा माया देवी विश्वविद्यालय की वाइस प्रेसिडेंट तृप्ति ज्वेल ने प्रतिभाग किया।

बायोटेक्नोलॉजी कॉन्क्लेव में भारतीय चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष डॉ. जे.एन. नौटियाल, डॉ. राजीव कुरेले और डॉ. पीयूष गोयल ने छात्रों को स्वास्थ्य एवं बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हो रहे नवाचारों से अवगत कराया। वक्ताओं ने बताया कि बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत आज विश्व में आठवें स्थान पर है।

रूरल एंटरप्रेन्योरशिप एवं स्टार्टअप कॉन्क्लेव में नियोजन विभाग के निदेशक डॉ. मनोज पंत और उद्योग विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. दीपक मुरारी ने ग्रामीण तकनीक, पारंपरिक उत्पादों एवं स्थानीय संसाधनों पर आधारित सफल स्टार्टअप मॉडल साझा किए। प्रतिभागियों ने हिमालयी परंपरागत उत्पादों पर आधारित कई प्रेरणादायक सफलता कहानियां सुनाईं और नए स्टार्टअप संभावनाओं पर चर्चा की।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!