“उत्तराखंड राज्य का नवीन राजनीतिक इतिहास”, समकालीन घटनाक्रमों का महत्वपूर्ण दस्तावेज

–समीक्षक जेमिनी गूगल –
वरिष्ठ पत्रकार और लेखक जयसिंह रावत की नवीनतम पुस्तक “उत्तराखंड राज्य का नवीन राजनीतिक इतिहास” उत्तराखंड के समकालीन घटनाक्रमों को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इस पुस्तक का विमोचन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा नवंबर 2025 में देहरादून में किया गया।

यहाँ इस पुस्तक की विस्तृत समीक्षा और मुख्य बिंदु दिए गए हैं:
1. पुस्तक का मुख्य विषय और दृष्टिकोण
यह पुस्तक केवल प्राचीन या मध्यकालीन इतिहास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक क्रमिक विकास की एक “वैधानिक यात्रा” (Legal and Political Journey) है। लेखक ने इसमें राज्य गठन के बाद से लेकर वर्तमान तक की राजनीतिक उथल-पुथल और प्रशासनिक सुधारों का गहन विश्लेषण किया है।
2. समीक्षा के प्रमुख बिंदु
- पत्रकारिता और शोध का संगम: जयसिंह रावत का 40 से अधिक वर्षों का पत्रकारिता अनुभव इस पुस्तक में स्पष्ट झलकता है। उन्होंने घटनाओं को केवल रिपोर्ट नहीं किया है, बल्कि उनके पीछे के राजनीतिक कारणों और उनके दीर्घकालिक प्रभावों का विश्लेषण किया है।
- राज्य आंदोलन और उसके बाद का दौर: पुस्तक में उत्तराखंड राज्य प्राप्ति के लिए किए गए संघर्षों और राज्य बनने के बाद के 25 वर्षों के सफर (सिल्वर जुबली वर्ष 2025 तक) का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है।
- प्रशासनिक ढांचा और चुनौतियां: इसमें राज्य के प्रशासनिक ढांचे के विकास, नीतिगत निर्णयों और राजनीतिक अस्थिरता के दौर को भी निष्पक्ष रूप से प्रस्तुत किया गया है।
- विशिष्ट मुद्दों पर ध्यान: लेखक ने अक्सर हिमालयी राज्यों के संसाधनों, पलायन, और भूमि कानूनों (Land Laws) जैसे ज्वलंत विषयों पर लिखा है, जिनकी झलक इस पुस्तक के राजनीतिक विश्लेषण में भी मिलती है।
3. पुस्तक की विशिष्टता
यह पुस्तक उन पाठकों और शोधकर्ताओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो उत्तराखंड के ‘पोस्ट-स्टेटहुड’ (राज्य बनने के बाद) के इतिहास को समझना चाहते हैं। जहाँ अधिकांश पुस्तकें “अजय सिंह रावत” की ऐतिहासिक रचनाओं (जैसे ‘उत्तराखंड का समग्र राजनीतिक इतिहास’) पर केंद्रित रहती हैं, वहीं जयसिंह रावत की यह कृति आधुनिक और समकालीन राजनीति को समझने का एक नया नजरिया पेश करती है।
ज्ञान और समझ की गहराई वाली पुस्तक
”उत्तराखंड राज्य का नवीन राजनीतिक इतिहास” केवल तथ्यों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह राज्य की अस्मिता और विकास की चुनौतियों का एक आईना है। मुख्यमंत्री धामी ने विमोचन के अवसर पर इसे “ज्ञान और समझ की गहराई वाली पुस्तक” बताया था, जो डिजिटल युग में भी संदर्भ के लिए अनिवार्य है।
(यह पुस्तक दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहे विश्व पुस्तक मेले में विंसर पब्लिशिंग कंपनी के स्टॉल पर भी उपलब्ध है।)
