उत्तराखंड को केंद्र से 93.15 करोड़ की सौगात, पंचायतों के विकास को मिलेगा बल
देहरादून, 31 मार्च। केंद्र सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं और ग्रामीण स्थानीय निकायों को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए उत्तराखंड के लिए वित्त वर्ष 2025-26 में 15वें वित्त आयोग के तहत कुल 93.15 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसमें 91.31 करोड़ रुपये अबद्ध अनुदान की दूसरी किस्त के रूप में तथा 1.84 करोड़ रुपये पहली किस्त के रोके गए हिस्से से अतिरिक्त पात्र ग्राम पंचायतों के लिए स्वीकृत किए गए हैं। इससे राज्य की जिला, क्षेत्र और ग्राम पंचायतों को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास कार्यों में गति मिलेगी।
जारी राशि से उत्तराखंड की सभी 13 जिला पंचायतों, 95 ब्लॉक पंचायतों और पात्र 7,784 ग्राम पंचायतों को सीधा लाभ मिलेगा। इसके अलावा, पहली किस्त के रोके गए हिस्से से 216 अतिरिक्त पात्र ग्राम पंचायतों को भी 1.84 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं। माना जा रहा है कि इस वित्तीय मदद से गांवों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, स्थानीय योजनाओं के क्रियान्वयन और पंचायतों की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
केंद्र सरकार द्वारा जारी यह अनुदान उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए विशेष महत्व रखता है, जहां दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में स्थानीय निकाय ही विकास की पहली और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। पंचायतों को मिलने वाली यह राशि गांवों की जरूरतों के अनुसार सड़क, सामुदायिक परिसंपत्तियों, छोटे स्तर के विकास कार्यों और स्थानीय जनसुविधाओं को मजबूत करने में उपयोगी साबित होगी।
केंद्र की ओर से स्पष्ट किया गया है कि अबद्ध (Untied) अनुदान का उपयोग पंचायतें संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में शामिल 29 विषयों के अंतर्गत स्थानीय आवश्यकताओं पर कर सकेंगी। हालांकि इस राशि का उपयोग वेतन और स्थापना व्यय पर नहीं किया जा सकेगा। यानी पंचायतों को यह धन अपने क्षेत्र की प्राथमिक जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों में लगाने की स्वतंत्रता मिलेगी।
इसके साथ ही केंद्र सरकार ने यह भी दोहराया है कि बद्ध (Tied) अनुदान का उपयोग मुख्य रूप से बुनियादी सेवाओं के लिए किया जाता है। इनमें स्वच्छता, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, ओडीएफ स्थिति का रखरखाव, पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण जैसे कार्य शामिल हैं। उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण और स्वच्छता जैसे विषयों की संवेदनशीलता को देखते हुए यह व्यवस्था और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पंचायतें इस राशि का समयबद्ध और पारदर्शी उपयोग करें, तो उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के साथ स्थानीय स्वशासन को भी नई मजबूती मिलेगी।
