उत्तराखंड राज्य जनजातीय महोत्सव 2026 को मिला राष्ट्रीय स्वरूप
मुख्यमंत्री धामी ने ‘आदि गौरव सम्मान’ प्रदान किया, 142 करोड़ रुपये से अधिक पेंशन राशि वन क्लिक से हस्तांतरित
देहरादून,25 मार्च। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को परेड ग्राउंड, देहरादून में राज्य जनजातीय शोध संस्थान, उत्तराखंड द्वारा आयोजित उत्तराखंड राज्य जनजातीय महोत्सव 2026 में प्रतिभाग किया। देश के 12 राज्यों से आए जनजातीय प्रतिनिधियों ने अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, लोक परंपराओं और पारंपरिक वेशभूषा के माध्यम से महोत्सव को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने थारू लोक गायिका स्वर्गीय रिंकू देवी राणा तथा दर्शन लाल को ‘आदि गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया। साथ ही समाज कल्याण विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत 14,272.185 लाख रुपये की पेंशन राशि ‘वन क्लिक’ के माध्यम से लाभार्थियों के खातों में हस्तांतरित की गई।
जनजातीय संस्कृति हमारी समृद्ध विरासत का आधार : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक महोत्सव नहीं, बल्कि जनजातीय समाज की जीवंत विरासत, सादगीपूर्ण जीवन-दर्शन और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज भारतीय संस्कृति की विविधता, प्राचीन परंपराओं और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन का सशक्त उदाहरण है। सीमांत क्षेत्रों में रहने वाला यह समाज राष्ट्र सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि जनजातीय परंपराओं, पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय उत्पादों को संरक्षित करते हुए नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए।
केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समाज के सम्मान, स्वाभिमान और विकास के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। उन्होंने एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान, वन धन योजना और प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर बने हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय ऐतिहासिक है। साथ ही देशभर में आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के संग्रहालय स्थापित किए जा रहे हैं, ताकि नई पीढ़ी प्रेरणा ले सके। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का उल्लेख करते हुए कहा कि यह जनजातीय समाज की बढ़ती भागीदारी और सम्मान का प्रतीक है।
128 जनजातीय गांवों के समग्र विकास पर फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समाज के जीवन स्तर को सुधारने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रतिवर्ष जनजातीय महोत्सव और जनजातीय खेल महोत्सव आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। प्रदेश के 128 जनजातीय गांवों को चिन्हित कर उनके समग्र विकास की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि जनजातीय बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए कालसी, मेहरावना, बाजपुर और खटीमा में एकलव्य विद्यालय संचालित हैं, जबकि चकराता और बाजपुर में नए विद्यालय निर्माणाधीन हैं। छात्रवृत्ति, आश्रम पद्धति विद्यालयों, तकनीकी शिक्षा, आईटीआई संस्थानों, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निःशुल्क कोचिंग तथा मासिक छात्रवृत्ति के माध्यम से युवाओं को सशक्त किया जा रहा है।
‘आदि लक्ष्य संस्थान’ होगा स्थापित
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय युवाओं को यूपीएससी, पीसीएस और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए देहरादून में ‘आदि लक्ष्य संस्थान’ स्थापित किया जा रहा है। यहां बहुउद्देशीय हॉल का भी निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा चार जनपदों में जनजाति कल्याण अधिकारियों की नियुक्ति, बेटियों के विवाह हेतु आर्थिक सहायता और शोध संस्थान के लिए कॉर्पस फंड की स्थापना जैसे कदम भी उठाए गए हैं।
उन्होंने बताया कि पीएम जनमन योजना के तहत बुक्सा और राजी जनजाति क्षेत्रों में बहुउद्देशीय केंद्र स्थापित किए गए हैं, जबकि पिथौरागढ़ में नए एकलव्य विद्यालय के लिए केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया है।
9 लाख से अधिक लाभार्थियों को जारी हुई मार्च माह की पेंशन
मुख्यमंत्री ने बताया कि समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत 9 लाख से अधिक लाभार्थियों को मार्च माह की पेंशन के रूप में 142 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जारी की गई है। उन्होंने इसे सरकार की संवेदनशीलता और अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने की प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया।
परंपराओं की रक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का जीवन संघर्ष और प्रेरणा का स्रोत है। उनकी शिक्षाओं से प्रेरित होकर राज्य सरकार जनजातीय सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य में सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया गया है तथा समान नागरिक संहिता लागू करते समय अनुसूचित जनजातियों को इससे बाहर रखा गया है, ताकि उनकी परंपराएं और सामाजिक संरचना सुरक्षित रह सके।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री खजान दास, विधायक सविता कपूर, अपर सचिव संजय सिंह टोलिया, समाज कल्याण विभाग के अधिकारी, विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय प्रतिनिधिमंडल तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
