विजय दिवस : देश की रक्षा में वीरगति प्राप्त सैनिकों का अनुकरण करने का लिया संकल्प

देहरादून, 16 दिसंबर। विजय दिवस 2025 के अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.), मेजर जनरल एम.पी.एस. गिल, जनरल ऑफिसर कमांडिंग, उत्तराखंड सब एरिया, मेजर जनरल रोहन आनंद, एडीजी, एनसीसी उत्तराखंड निदेशालय, ग्रुप कैप्टन ऋषभ शर्मा, रियर एडमिरल पीयूष पौसी, जॉइंट चीफ हाइड्रोग्राफर, एनएचओ देहरादून तथा अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने शौर्य स्थल पर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह में देहरादून स्टेशन के सेवारत अधिकारी, जेसीओ तथा अन्य रैंकों के अधिकारी भी उपस्थित थे, जिन्होंने देश की रक्षा में वीरगति प्राप्त सैनिकों का अनुकरण करने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने उपस्थित सेवारत एवं पूर्व सैनिकों से संवाद किया तथा राष्ट्र रक्षा में उनके अमूल्य योगदान की सराहना की।
राज्यपाल ने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की ऐतिहासिक, रणनीतिक एवं निर्णायक विजय को स्मरण करते हुए कहा कि यह युद्ध भारतीय सैन्य इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय है। भारतीय सशस्त्र बलों ने अद्वितीय शौर्य, साहस तथा कुशल रणनीति का प्रदर्शन करते हुए न केवल दुश्मन के 93 हजार सैनिकों को आत्मसमर्पण के लिए विवश किया, बल्कि पाकिस्तान के विभाजन के साथ एक नए राष्ट्र बांग्लादेश के निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त किया।
राज्यपाल ने कहा कि हमारे सशस्त्र बलों की उत्कृष्ट रणनीति, कठोर प्रशिक्षण, सटीक योजना, अनुशासन, समर्पण तथा राष्ट्र के प्रति अटूट प्रतिबद्धता हम सभी के लिए प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने कहा कि 54 वर्ष पूर्व इस युद्ध में शहीद एवं घायल हुए जवानों के परिवारों की देखभाल हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। विजय दिवस पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम उनके परिवारों के सम्मान, सुरक्षा तथा कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहेंगे।
उन्होंने कहा कि आज भारत आधुनिकीकरण, तकनीकी नवाचार, भविष्य के युद्ध कौशल तथा सैन्य क्षमताओं के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। यह परिवर्तन हमारे सशस्त्र बलों की शक्ति तथा राष्ट्र की सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
राज्यपाल ने कहा कि विजय दिवस केवल अतीत की विजय को स्मरण करने का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन एवं संकल्प का दिन भी है। हमें भविष्य की चुनौतियों तथा आंतरिक-बाह्य सुरक्षा आवश्यकताओं के प्रति निरंतर सुदृढ़ एवं सजग रहना होगा।
1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर भारतीय सशस्त्र बलों की ऐतिहासिक जीत को मनाने तथा कर्तव्य पंक्ति में सर्वोच्च बलिदान देने वाले बहादुर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए प्रत्येक वर्ष विजय दिवस मनाया जाता है। 16 दिसंबर 1971 को तत्कालीन थल सेना प्रमुख फील्ड मार्शल एस.एच.एफ.जे. मानेकशॉ के प्रेरणादायक नेतृत्व में भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तानी सेना को निर्णायक पराजय दी तथा पूर्वी पाकिस्तान की मुक्ति कर बांग्लादेश के रूप में नए राष्ट्र के गठन का मार्ग प्रशस्त किया। राष्ट्र अपने सैनिकों के दृढ़ संकल्प तथा अद्वितीय साहस को नमन करता है, जिन्होंने इस अभूतपूर्व विजय के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
