गांव में गाड़ी पहुंचने पर डूंगर के ग्रामीणों ने मनाया जश्न
–राजेश्वरी राणा की रिपोर्ट-
पोखरी, 12 मार्च। 21वीं सदी में भी सड़क सुविधा से वंचित डूंगर गांव के ग्रामीणों ने वर्षों तक सरकार से सड़क निर्माण की गुहार लगाई, लेकिन जब उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो उन्होंने स्वयं पहल करते हुए अपने गांव तक सड़क पहुंचाने का संकल्प लिया। ग्रामीणों ने आपस में धन एकत्र कर श्रमदान के माध्यम से दिन-रात मेहनत की और जौरासी–तोणजी मोटर मार्ग के अतरी से लगभग एक किलोमीटर सड़क काटकर अपने गांव तक पहुंचा दी।

इस सड़क के बनने के बाद पहली बार छोटे मैक्स, ईको और अन्य व्यावसायिक सवारी वाहन गांव तक पहुंचे। वाहन के गांव में पहुंचते ही ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने सबसे पहले विद्वान ब्राह्मणों से पूजा-अर्चना कराकर भगवान का धन्यवाद किया और इसके बाद आपस में मिष्ठान वितरण कर जश्न मनाया। महिलाओं, पुरुषों, बुजुर्गों और बच्चों ने नाच-गान के साथ अपनी खुशी का इजहार किया।
पूर्व प्रधान बलवीर परमार और सुनील परमार सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि सड़क न होने के कारण गांव के लोगों को वर्षों से भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। तहसील मुख्यालय पोखरी में विभागीय कार्यों के लिए जाने, स्कूली छात्र-छात्राओं को अटल उत्कृष्ट विद्यालय तथा राजकीय इंटर कॉलेज रडुवा तक पहुंचने और दैनिक उपयोग की वस्तुएं खरीदने के लिए बाजार जाने हेतु ग्रामीणों को करीब दो किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। इसके बाद एक किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पर पीठ में सामान लादकर गांव तक पहुंचना पड़ता था।
उन्होंने बताया कि समस्या उस समय और गंभीर हो जाती थी, जब बीमार बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाना पड़ता था। ऐसी स्थिति में मरीजों को चारपाई के सहारे सड़क तक लाना पड़ता था। यहां तक कि सड़क सुविधा न होने के कारण लोग इस गांव में रिश्तेदारी करने से भी कतराने लगे थे।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार और जनप्रतिनिधियों से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद जब सड़क का निर्माण नहीं हुआ, तो मजबूर होकर गांव के लोगों ने स्वयं धन एकत्र कर श्रमदान के जरिए सड़क बना दी। सड़क बनने से अब ग्रामीणों में खुशी का माहौल है, हालांकि उन्होंने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी भी व्यक्त की।
इस अवसर पर बलवीर परमार, सुनील परमार, किमोठा के प्रधान बाल ब्रह्मचारी हरिकृष्ण किमोठी, राजेंद्र सिंह परमार, मुरली परमार, इंद्र सिंह परमार, गजेंद्र सिंह नेगी, मयंक नेगी, हरीश परमार, राजेंद्र परमार, राजेश्वरी देवी परमार, उदय सिंह नेगी, रवेंद्र परमार, पुष्कर परमार, भूपेंद्र परमार, गिरीश परमार, सुबोध परमार, कृपाल सिंह बर्तवाल, विवेक परमार, भरत परमार, शिशुपाल बर्तवाल, गजेंद्र बर्तवाल, मधुसूदन परमार, मुकेश बर्तवाल, विजया परमार, शांति देवी, वीरेंद्र सिंह नेगी, संतोषी देवी, आशा देवी, रूपा देवी, संगीता देवी, दुर्गा देवी, गुड्डी देवी, विछना देवी, सरिता देवी, माधुरी देवी, मंजू देवी, दीपा देवी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
