79 साल बाद भी सड़क से वंचित काण्डई–चंद्रशिला, ग्रामीण नारकीय जीवन को मजबूर
– पोखरी से राजेश्वरी राणा की रिपोर्ट –
जहाँ इक्कीसवीं सदी में मानव चाँद और मंगल तक पहुँच चुका है, वहीं विकासखंड पोखरी की काण्डई–चंद्रशिला ग्राम पंचायत आज भी बुनियादी सड़क सुविधा से वंचित है। आज़ादी के 79 वर्ष बीत जाने के बाद भी लगभग 70 परिवारों और करीब 400 की आबादी वाला यह गाँव सड़क के अभाव में कठिन और नारकीय जीवन जीने को मजबूर है।
ग्रामीणों को रोज़मर्रा की आवश्यक वस्तुएँ खरीदने, तहसील तथा अन्य विभागीय कार्यों के लिए पोखरी बाजार जाने हेतु करीब एक किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पैदल तय करनी पड़ती है। बाजार से सामान खरीदकर उसी दुर्गम रास्ते से पीठ पर लादकर घर तक पहुँचाना यहाँ के लोगों की मजबूरी बन चुका है।
स्थिति उस समय और भी भयावह हो जाती है, जब बीमार बुजुर्गों, बच्चों या गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने की आवश्यकता पड़ती है। सड़क न होने के कारण मरीजों को चारपाई या डंडी-कंडी के सहारे सड़क तक पहुँचाया जाता है, जिससे कई बार जान का जोखिम भी बना रहता है।
ग्राम प्रधान भगत सिंह भंडारी, पूर्व प्रधान नवीन राणा, मदन सिंह भंडारी, अनुसुइया राणा, देवेंद्र सिंह नेगी, रघुवीर सिंह नेगी, जगदीश प्रसाद किमोठी, दिनेश प्रसाद किमोठी, गोविंद सिंह भंडारी, अब्बल सिंह राणा, कमल सिंह राणा, गुलाब भंडारी, कुँवर सिंह राणा, भूपेंद्र राणा, दिलबर राणा, प्रेम सिंह राणा, देवेंद्र राणा, हर्षवर्धन राणा, मातबर भंडारी, बलवंत सिंह राणा, मनीष राणा, मायाराम किमोठी, अनुसुइया प्रसाद किमोठी, अनूप किमोठी, ताजबर भंडारी, भरत नेगी, भूपेंद्र नेगी, प्रदीप राणा सहित अनेक ग्रामीणों ने बताया कि सड़क न होने के कारण अब लोग उनकी ग्राम सभा में रिश्तेदारी करने से भी कतराने लगे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार शासन-प्रशासन से ग्राम सभा को मोटर मार्ग से जोड़ने की माँग कर चुके हैं, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जबकि आसपास की सभी ग्राम सभाएँ सड़क सुविधा से जुड़ चुकी हैं, ऐसे में काण्डई–चंद्रशिला के ग्रामीण खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही ग्राम सभा को मोटर मार्ग अथवा सड़क से नहीं जोड़ा गया, तो वे धरना–प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
