ब्लॉगराजनीति

सड़क से वंचित सेरा–मालकोटी, बीमारों को डंडी-कंडी में ढोने को मजबूर ग्रामीण

 

राजेश्वरी राणा की रिपोर्ट
पोखरी, 9 जनवरी। इक्कीसवीं सदी में जब इंसान चांद और मंगल तक पहुंच चुका है, तब विकासखंड पोखरी की सेरा–मालकोटी ग्राम पंचायत आज़ादी के 79 वर्ष बाद भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित है। सड़क न होने का दंश यहां के ग्रामीण हर दिन झेल रहे हैं। रोजमर्रा की जरूरतों की खरीदारी, तहसील संबंधी कामकाज या इलाज के लिए पोखरी बाजार और तहसील पहुंचने हेतु ग्रामीणों को करीब पांच किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पैदल तय करनी पड़ती है। मजबूरी यह है कि लोग आज भी पीठ पर बोझ लादकर इसी दुर्गम रास्ते से आवाजाही कर रहे हैं।
सबसे अधिक मार क्षेत्र के छात्र-छात्राओं पर पड़ रही है। जूनियर स्तर की पढ़ाई के लिए उन्हें जूनियर हाईस्कूल रौता और उच्च शिक्षा के लिए पीजी कॉलेज पोखरी जाना पड़ता है। इसके लिए बच्चों को प्रतिदिन पांच किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई और फिर शाम को उतनी ही दूरी उतरकर घर लौटना पड़ता है। खराब मौसम और बरसात के दिनों में यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता है।
स्थिति तब और भयावह हो जाती है जब बीमार बुजुर्गों, बच्चों या गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाना पड़ता है। ग्राम प्रधान राजेश सिंह भंडारी और ग्रामीण महावीर नेगी ने बताया कि सड़क सुविधा के अभाव में ग्राम पंचायत के तीन तोक—सेरा, मालकोटी और कुमेडाग—के करीब 60 परिवार वर्षों से गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, गुरुवार सुबह गांव निवासी कुंवर सिंह की अचानक तबीयत बिगड़ गई। सड़क न होने के कारण उन्हें डंडी-कंडी के सहारे कंधों पर लादकर किसी तरह सड़क तक पहुंचाया गया, जिसके बाद इलाज के लिए देहरादून ले जाया गया। इससे पहले तीन माह पूर्व सावित्री देवी को भी इसी तरह डंडी और चारपाई के सहारे सड़क तक पहुंचाकर अस्पताल ले जाना पड़ा था। ऐसे कई मामले गांव में सामने आ चुके हैं, जो व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले दस वर्षों से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं। लगभग पांच किलोमीटर लंबी सड़क को स्वीकृति भी मिल चुकी है, लेकिन संबंधित विभाग फाइल के वित्त विभाग में लंबित होने का हवाला देकर काम शुरू नहीं कर रहा है।
इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता मोहम्मद शादिक उद्दीन ने बताया कि सड़क की डीपीआर मुख्य कार्यालय भेजी गई थी, जहां से आपत्ति लगने के बाद फाइल वापस आ गई। उन्होंने कहा कि अब इस सड़क को पीएमजीएसवाई फेज-4 में शामिल कर लिया गया है और आगे की कार्रवाई उसी योजना के तहत की जाएगी।
हालांकि ग्रामीणों का सवाल साफ है—जब तक सड़क नहीं बनेगी, तब तक क्या उन्हें बीमारों को कंधों पर ढोते हुए ही विकास के दावे सुनने होंगे?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!