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अमेरिका के निशाने पर अंबानी क्यों?

-BY-MILIND KHANDEKAR

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील फँसी हुई है. अमेरिका अब तक भारत पर दो तरह से टार्गेट करता रहा है. पहली शिकायत है कि भारत टैरिफ़ किंग है यानी भारत में अमेरिकी सामान पर बहुत ज़्यादा टैरिफ़ है. दूसरी शिकायत है कि भारत रुस से तेल ख़रीद कर यूक्रेन युद्ध लड़ने में उसकी मदद कर रहा है. इसी कारण भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ़ लगाया है. भारत कह रहा हैं कि हम तो अमेरिका के कहने पर तेल ख़रीद रहे थे ताकि दुनिया के बाज़ार में दाम ना बढ़े. भारत और अमेरिका के ट्रेड वॉर के बीच पिछले हफ़्ते भर से अमेरिकी अधिकारियों के निशाने पर अप्रत्यक्ष रूप से भारत के सबसे धनी व्यक्ति मुकेश अंबानी हैं. उनका आरोप है कि रुसी तेल से अंबानी की कंपनी रिलायंस को फ़ायदा मिला, रिलायंस के सूत्र हालाँकि इन आरोपों को ग़लत बताते है.

स्कॉट बेसेंट अमेरिका के ट्रैजरी सेक्रेटरी यानी वित्त मंत्री हैं जबकि पीटर नवारो राष्ट्रपति ट्रंप के ट्रेड एडवाइज़र. इन दोनों ने नाम लिए बिना मुकेश अंबानी पर निशाना साधा है.  बेसेंट ने CNBC को कहा कि भारतीय रिफाइनरी कंपनी रुस से सस्ता तेल ख़रीदते हैं. फिर उसे ज़्यादा दाम पर पेट्रोल डीज़ल बनाकर बेचते है. उन्हें 16 बिलियन डॉलर ( क़रीब 1.32 लाख करोड़ रुपये) अतिरिक्त फ़ायदा हुआ हुआ है और इसका फ़ायदा कुछ अमीर परिवारों को हुआ है.

ट्रेड एडवाइज़र नवारो ने फ़ाइनेंशियल टाइम्स में रुस की तेल ख़रीदने पर लेख लिखा है. इसमें वो मिलती जुलती बात लिखते हैं कि रुस के तेल का मुनाफा भारत के Politically Connected परिवारों को मिलता है जो अंततः पुतिन को लड़ाई लड़ने में मदद करते हैं. नवारो ने पत्रकारों से चर्चा में कहा कि रुस के (सस्ते)तेल से भारतीय लोगों की गाड़ियाँ नहीं चल रही बल्कि कुछ बड़े लोगों को फ़ायदा मिल रहा है.

इन दोनों अधिकारियों ने मुकेश अंबानी का नाम नहीं लिया है . Bloomberg ने अपनी रिपोर्ट में इन बयानों को मुकेश अंबानी से जोड़ा है और हेडलाइन दी है कि भारत – अमेरिका की लड़ाई में मुकेश अंबानी फंस गए हैं.हिसाब किताब में पहले लिखा था कि रुस के सस्ते तेल से भारत में लोगों से ज़्यादा फ़ायदा इंडियन ऑयल,रिलायंस जैसी तेल कंपनियों को हुआ था.

2021 तक भारत रुस से ना के बराबर तेल ख़रीदता था. रुस का हिस्सा भारत की कुल ख़रीद के 35-40% तक पहुँच गया है. यह तेल प्रति बैरल 10- 12 डॉलर प्रति बैरल सस्ता भी पड़ता था. फ़ायदा जनता को उतना नहीं मिला. सस्ते रुसी तेल के चलते पेट्रोल के दाम दिल्ली में ₹85 प्रति लीटर के आसपास होने चाहिए थे .दाम अभी ₹95 प्रति लीटर है जबकि कच्चे तेल के दाम यूक्रेन युद्ध की शुरुआत में 112 डॉलर प्रति बैरल से घटकर 71 डॉलर पर आ गया है.

फ़ायदा हुआ सरकारी और प्राइवेट तेल कंपनियों का. फ़ाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक़ 16 बिलियन डॉलर यानी 1.32 लाख करोड़ रुपये का मुनाफा कंपनियों ने कमाया इसमें से 50 हज़ार करोड़ रुपये रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के हिस्से में आया. रिलायंस के सूत्रों का कहना है कि कमोडिटी का कारोबार साइकल में चलता है. कभी मार्जिन बढ़ता है तो कभी घटता है. किसी घटना विशेष से फायदे को जोड़ना सही नहीं है.

मुकेश अंबानी पर इस तरह से अमेरिकी अधिकारियों का निशाना बनाना थोड़ा चौंकाने वाला है. अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक़ रिलायंस ने रुसी तेल से बना 42% पेट्रोल डीज़ल उन देशों को बेचा जिन्होंने रुस पर प्रतिबंध लगा रखा था. इसमें अमेरिका भी शामिल है. अब अमेरिका ही शोर मचा रहा है.

हिसाब किताब का वीडियो भी बन रहा है. Biz Tak पर आप रविवार शाम सात बजे वीडियो देख सकते हैं

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