आपको AI फ्री में क्यों मिल रहा है?

-By- Milind Khandekar-
भारतीय यूज़र्स के लिए पिछले हफ़्ते AI के प्रीमियम प्लान फ्री कर दिए गए. पहले Perplexity ने एयरटेल के 36 करोड़ यूज़र्स को अपना प्रीमियम प्लान फ्री कर दिया. अब गूगल Gemini और ChatGPT ने भी फ्री प्लान पेश कर दिया है. Jio के 50 करोड़ यूज़र्स को 18 महीने Gemini फ्री में मिलेगा जबकि ChatGPT ने अपना ₹399 का Go plan चार नवंबर से एक साल के लिए फ्री कर दिया है.
Artificial intelligence ( AI) कंपनियों के सामने दो तरह की चुनौतियाँ हैं. पहली AI का इस्तेमाल बढ़ाना और दूसरा पैसे बनाना. पैसे तब बनेंगे जब ज़्यादा लोग इसका इस्तेमाल करेंगे. जितने ज़्यादा लोग इस्तेमाल करेंगे उतना ही AI मॉडल को ट्रेनिंग देने में मदद मिलेगी. भारत में 90 करोड़ इंटरनेट यूज़र्स हैं. इनके पास खर्च करने के लिए पैसे भले नहीं हों जितनी भाषा, संस्कृति और विविधता है वो ट्रेनिंग के लिए उपजाऊ बाज़ार हैं. भारतीय बाज़ार पर क़ब्ज़ा जमाने के लिए ये अमेरिकी कंपनियों का आज़माया हुआ फ़ार्मूला अपना रहे हैं. पहले लोगों को आदत लगा दो फिर दाम वसूलो. नेटफ़्लिक्स, अमेजन यहाँ तक की देसी कंपनी Jio ने भी यही रास्ता अपनाया था.
AI कंपनियों के अपने हित हैं लेकिन आपको यह मौक़ा चूकना नहीं चाहिए. अगर आप AI इस्तेमाल करते होंगे तो दो चीज़ें नोट की होंगी. पहले तो वो आपके सवाल का जवाब देगा फिर पूछेगा आपको आगे यह बता दूँ. आप इसमें फँसते चले जाते हैं फिर वो कहेगा कि फ्री प्लान ख़त्म हो गया है आपको जवाब चाहिए तो हमारा प्लान ले लीजिए नहीं तो इतने देर में आप फिर सवाल पूछ सकते हैं. अब आप अगर किसी भी कंपनी का प्लान ले लेंगे तो जब तक चाहें सवाल जवाब कर सकते हैं.
आप पूछेंगे कि AI कंपनियों को यह लिमिट क्यों लगाना पड़ी? तो जब आप कोई Prompt यानी सवाल AI से पूछते है तो वो शब्दों को टोकन में बदलता है. टोकन को डेटा सेंटर में लगे GPU प्रोसेस करते हैं. आपके सवाल का जवाब देते हैं. मैंने पहले भी बताया था कि AI मॉडल को ट्रेनिंग दी है. उसने दुनिया भर में मौजूद ज्ञान के भंडार को जान लिया है. जवाब देने की कोशिश में बहुत ज़्यादा बिजली भी खर्च होती है. फिर इससे पैदा होने वाली गर्मी को क़ाबू में रखने के लिए पानी की ज़रूरत पड़ती है. एक अनुमान है कि एक सवाल का जवाब देने में 30 पैसे से लेकर ₹2 तक खर्च हो जाते हैं, इसलिए कंपनियों ने लिमिट लगा रखी थी. Open AI के संस्थापक सैम अल्टमैन तो यहाँ तक कह दिया था कि लोगों का Please या Thank You कहना भी ख़र्च बढ़ाता है.
अब AI कंपनियों के पास फंडिंग की कोई कमी नहीं है. इनवेस्टर्स पैसे डाले जा रहे हैं, अभी प्रॉफिट से ज़्यादा यूज़र्स बढ़ाने पर ज़ोर है और इस प्रयोग के लिए भारत से बेहतर लैब और क्या हो सकती है? मेरा सुझाव है कि कंपनियों का अपना हित है, आप अपना हित देखें और AI सीखते रहिए. NVidia के संस्थापक ने कहा है कि नौकरी उनकी जाएगी जो AI नहीं जानते हैं और आपने पढ़ा ही होगा कि अमेजन 14 हज़ार लोगों को नौकरी से निकाल रहा है.
