आपदा/दुर्घटनाब्लॉग

जीना हुआ मुश्किल : बाघ और भालुओं के साथ ही बंदर -लंगूर भी खूंखार हो गये

 

गौचर से दिग्पाल गुसांईं-
अलग राज्य बने 25 साल पूरे होने को हैं लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में बंदरों, सुअरों, लंगूरों के अलावा जंगली जानवरों की समस्या से आज तक निजात नहीं मिल पाई है। हालात ऐसे हो गए हैं कि बंदर व लंगूर भी जंगली जानवरों की प्रवृत्ति पर उतर आए हैं। इससे पहाड़ का आम जनमानस दहशत के साए में जीने को मजबूर हैं। अब भालुओं ने भी पहाड़ के जनजीवन को झकझोर कर रख दिया है।

अलग राज्य बनने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों की समस्याओं का समाधान आसानी से हो जाएगा। लेकिन शासन सत्ता जिस भी दल के हाथों में रही हो किसी ने भी पहाड़ वासियों की समस्याओं का समाधान करने के ठोस उपाय नहीं किए हैं। नतीजतन पलायन में ही लोगों ने अपनी भलाई समझी है।

पिछले कई सालों से पहाड़ी क्षेत्रों में बंदरों, लंगूरों व जंगली जानवरों ने कास्तकारी को भारी नुक़सान पहुंचाया है। अब तो इनसे जानमाल का खतरा भी हो गया है। पहाड़ का कास्तकार किसी तरह हाड़तोड़ मेहनत कर फसलें उगाता है लेकिन फल मिलने से पहले ही उत्पाती बंदर, लंगूर व सुअर उनकी मेहनत में पानी फेर दे रहे हैं। अब तो बंदर व लंगूर भी हिंसक प्रवृत्ति पर उतर आए हैं। इससे लोग दहशत के साए में जीने को मजबूर हैं।

अब भालुओं के बढ़ते हमलों से पहाड़ वासियों खासकर कास्तकारी महिलाओं की दिनचर्या भी पूरी तरह प्रभावित हो गई है। घास के लिए जंगल जाने वाली महिलाएं भी भालू के डर से जंगल जाने से कतरा रही है।

सरकारों ने कभी काश्तकारों की आय दोगुनी करने तो कभी बंदरों के बधिया करण करने के साथ ही सुअरों को मारने के आदेशों को खूब प्रचारित किया लेकिन हकीकत तो यह है कि इन आदेशों पर कहीं भी अमल होता नहीं दिखाई दे रहा है। गौचर क्षेत्र में लंबे समय से बंदरों व लंगूरों ने कास्तकारों के साथ ही आम जनता का जीना मुश्किल कर दिया है। बंदरों से निजात दिलाने के लिए क्षेत्रवासी वन विभाग व नगर पालिका से गुहार लगाते थक गये है।

अब नौबत ऐसी आ गई है कि लंगूर व बंदर झुंड के रूप में जहां फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं वहीं मौका पाते ही घरों व दुकानों के सामानों पर झपटा मारने से नहीं चूक रहे हैं। इससे दुकानदारों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। व्यापार संघ अध्यक्ष राकेश लिंगवाल का कहना है कि इस समस्या से वे कई बार सी एम हेल्पलाइन पर शिकायत कर चुके हैं। लेकिन नतीजा सिफर ही रहा।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश नेगी का कहना है कि वर्तमान सरकार को जनता की समस्याओं से कोई लेना देना नहीं रह गया है। इसके लिए जनता को आगे आने की जरूरत है।

18 नवंबर को गौचर मेले में आयोजित पत्रकार वार्ता में पत्रकारों ने जंगली जानवरों व बंदरों मामला एक स्वर से उठाया तो डी एफ ओ ने रटा-रटाया जबाब देकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर दी थी। पालिकाध्यक्ष संदीप नेगी का कहना है कि बंदर पकड़ने के लिए पालिका को अलग से बजट नहीं दिया जाता है ऊपर से वन विभाग की शर्तें ऐसी हैं कि बंदरों को कुछ हो गया तो इसकी पूरी जिम्मेदारी पकड़वाने वाले की होगी। ऐसी दशा में कौन रिस्क लेगा। बाबजूद इसके कुछ दिन पहले कुछ बंदरों को पकड़ा गया है।

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