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विंटरलाइन की शुरुआत, मुसूरी का क्षितिज हुआ रोशन

ज्योति रावत

मसूरी का आसमान एक बार फिर रंगों से नहा उठा है। लंबे इंतजार के बाद इस वर्ष की पहली विंटरलाइन (Winterline) ने शनिवार की शाम पश्चिमी क्षितिज पर अपनी भव्य उपस्थिति दर्ज कराई। जैसे ही सूरज धीरे-धीरे पहाड़ियों के पीछे डूबा, पूरा आसमान सुनहरे, लाल और नारंगी रंगों में रंग उठा। इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए स्थानीय लोग और सैलानी बड़ी संख्या में कैमरों के साथ पहुंच गए। हर वर्ष की तरह इस बार भी विंटरलाइन ने मुसूरी को एक बार फिर विश्व मानचित्र पर प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफरों के आकर्षण का केंद्र बना दिया है।

विंटरलाइन एक दुर्लभ वायुमंडलीय घटना है, जो दुनिया के कुछ ही स्थानों — जैसे स्विट्ज़रलैंड और भारत में केवल मुसूरी तथा दून घाटी — से दिखाई देती है। जब सर्दियाँ दस्तक देती हैं और हवा की परतें ठंडी होने लगती हैं, तो सूर्यास्त के समय वातावरण की भिन्न-भिन्न परतें प्रकाश को इस तरह परावर्तित करती हैं कि क्षितिज के ऊपर एक कृत्रिम रेखा बन जाती है। यही पट्टी विंटरलाइन कहलाती है, जो एक गहरे धूसर-बैंगनी रंग में चमकती हुई प्रतीत होती है।

सूरज जब इस रेखा के पीछे छिपता दिखता है, तो आकाश में ऐसा लगता है मानो किसी कलाकार ने अपनी कल्पना से प्रकृति का सबसे सुंदर चित्र उकेर दिया हो। यह दृश्य न केवल मन को शांति देता है, बल्कि पर्यटकों को सर्दियों में मुसूरी आने के लिए विशेष रूप से प्रेरित भी करता है।

हर साल अक्टूबर के अंत से लेकर जनवरी के मध्य तक यह दृश्य मुसूरी में देखा जा सकता है। स्थानीय होटल व्यवसायी और पर्यटन विभाग के लिए यह मौसम खासा उत्साहजनक होता है, क्योंकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक इस प्राकृतिक चमत्कार को अपनी आंखों में कैद करने आते हैं।

वास्तव में, विंटरलाइन केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि मुसूरी की पहचान बन चुकी है — वह क्षण जब आकाश, धरती और सूरज मिलकर सर्दियों का सबसे सुंदर स्वागत करते हैं।

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