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किसानों के पास बीज नहीं, कैसे होगी आमदनी दोगुनी

-गौचर से दिग्पाल गुसाईं –

सरकार भले ही कास्तकारों की आमदनी दोगुनी करने की बात कर रही हो लेकिन हकीकत तो यह है कि पिछले दो सालों से कास्तकारों को समय पर बीज ही उपलब्ध नहीं करवाया जा रहा है। सरकार की इस लापरवाही का खामियाजा कास्तकारों को भुगतना पड़ रहा है।

सरकार ने कास्तकारों को रियायती दरों पर बीज उपलब्ध कराने का जिम्मा उद्यान विभाग को सौंपा हुआ है। लेकिन ताजुब तो इस बात का है विभाग समय पर बीज ही उपलब्ध नहीं करा पा रहा है।

सितंबर से लेकर अक्टूबर महीने के प्रथम सप्ताह तक कास्तकार लहसुन, मटर,प्याज के साथ ही तमाम सब्जियों की बुवाई कर देते हैं। लेकिन ताजुब तो इस बात का है कि विभाग अभी तक लहसुन व मटर के बीज ही उपलब्ध नहीं करा पाई है। पिछले सीजन में भी कास्तकारों को अदरक, हल्दी, भिंडी, मिर्च के बीज भी उपलब्ध नहीं कराए गए थे। बताया जा रहा है लहसुन के लिए पूर्व में की गई निविदा को निरस्त किया गया है।

क्बऐसनोन्  पुनः निविदा आमंत्रित की गई है। इससे समय पर बीज उपलब्ध कराने की संभावनाएं दूर दूर तक नजर नहीं आ रही है। प्रगतिशील कास्तकार विजया गुसाईं,जशमती कनवासी, कंचन कनवासी, भागीरथी देवी, आदि षका कहना है कि सरकार कास्तकारों की आमदनी दोगुनी करने की बात तो कर रही है लेकिन समय पर बीज उपलब्ध न होने की वजह से कास्तकार बाजार से महंगें दामों पर बीज खरीदने को मजबूर हैं। सरकार की इस लापरवाही का खामियाजा कास्तकारों को भुगतना पड़ रहा है। इससे आमदनी दोगुनी के बजाय घटती जा रही है।

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