पर्यावरणब्लॉग

बर्फबारी का इंतजार -पर्यटन ही नहीं, खेती और हिमस्खलन का खतरा भी बढ़ा

 

जोशीमठ से प्रकाश कपरुवाण –
दिसंबर का महीना बीत गया और जनवरी भी आ पहुंची, लेकिन अब तक पहाड़ों पर बर्फ नहीं गिरी। समय पर बर्फबारी न होने का असर केवल पर्यटन व्यवसाय तक सीमित नहीं है, बल्कि खेती-किसानी पर भी पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि कम और अनियमित बर्फबारी से हैंगिंग ग्लेशियर के टूटने और एवलांच (हिमस्खलन) का खतरा भी बढ़ सकता है। इसका उदाहरण फरवरी 2021 की ऋषिगंगा आपदा में देखा जा चुका है, जब दिसंबर 2020 और जनवरी 2021 में न्यूनतम बर्फबारी के बीच एक हैंगिंग ग्लेशियर के खिसकने से भारी तबाही हुई थी।

इस बार भी देखा गया कि बर्फबारी को लेकर मौसम विभाग के कई पूर्वानुमान सटीक साबित नहीं हुए। दिसंबर और जनवरी में कई बार ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हिमपात की संभावना जताई गई, जिसके बाद बड़ी संख्या में पर्यटक पहाड़ों की ओर पहुंचे, लेकिन बर्फ न मिलने से वे निराश लौटे। हाँ, ट्रैकिंग के शौकीन पर्यटकों ने विभिन्न ट्रैक रूट्स में जाकर नए साल का जश्न जरूर मनाया।

समय पर बर्फबारी न होने से पर्यटन कारोबार प्रभावित हुआ है, वहीं किसानों के लिए भी स्थिति अनुकूल नहीं रही। सेब के पौधे लगाने का सबसे उपयुक्त समय दिसंबर–जनवरी माना जाता है, लेकिन पर्याप्त नमी और बर्फ न होने के कारण कई काश्तकार पौधारोपण नहीं कर सके।

सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या कम और देर से होने वाली बर्फबारी हिमस्खलन का खतरा बढ़ा सकती है? वर्ष 2021 की घटना इसका संकेत देती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, औली (10,500 फीट) में दिसंबर 2020 में केवल 12 दिसंबर को लगभग 5 सेमी बर्फ गिरी थी, जबकि जनवरी 2021 में कुल मिलाकर करीब 6 सेमी ही बर्फबारी दर्ज हुई थी।
ग्लेशियर वैज्ञानिक डॉ. डी. पी. डोभाल बताते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण बर्फबारी का पैटर्न बदल रहा है। उनके अनुसार—
“स्थिर ग्लेशियरों के मुकाबले हैंगिंग ग्लेशियर ज्यादा खतरनाक होते हैं। ये बेहद संवेदनशील होते हैं, जल्दी बनते हैं और जल्दी टूट भी जाते हैं। देर से होने वाली बर्फबारी के दौरान इनके क्रैक होने की संभावना बढ़ जाती है।

हिमालयी क्षेत्रों में हैंगिंग ग्लेशियरों की संख्या काफी हो सकती है, लेकिन उन ग्लेशियरों की विशेष निगरानी जरूरी है जिनके नीचे या आसपास मानव बस्तियां स्थित हैं, ताकि ऋषिगंगा जैसी किसी संभावित घटना के जोखिम को न्यूनतम किया जा सके।

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