पुराने तेवरों के साथ नया आंदोलन छेड़ेंगी उत्तराखंड की महिलाएं
19-20 दिसंबर को आयोजित होने वाले उत्त्तराखंड महिला मंच के स्थापना दिवस पर होगी रणनीति की घोषणा
देहरादून, 28 अक्टूबर। अलग उत्तराखंड राज्य आंदोलन में सरकार को घुटने टेकने के लिए मजबूर करने वाले महिलाओं के संगठन उत्तराखंड महिला मंच ने एक बार फिर से उन्हीें पुराने तेवरों के साथ मौजूदा सरकार के जनविरोधी फैसलों को लेकर सड़कों पर उतरने की घोषणा की है। संभवतः महिला मंच इसकी घोषणा 19 और 20 दिसम्बर को होने वाले अपने 30वें स्थापना दिवस के मौके पर करेगा।
शनिवार को शहीद स्मारक पर आयोजित उत्तराखंड महिला मंच की 51 सदस्यीय कार्यकारिणी समिति की बैठक में यह बात कही गई। बैठक में मौजूद सदस्यों को संबोधित करते हुए मंच की अध्यक्ष कमला पंत ने कहा कि मौजूदा सरकार लगातार जनविरोधी निर्णय ले रही है। उन्होंने कहा कि जब उत्तराखंड आंदोलन किया गया तो उसका एक नारा शराब मुक्त उत्तराखंड भी था। क्योंकि शराब के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित महिलाएं और बच्चे ही होते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के भाजपा सरकार अब घर-घर में बार खोलने की योजना बना रही थी, जिसे महिलाओं ने नाकाम कर दिया है।
कमला पंत ने बताया कि राज्य सरकार ने अपनी आबकारी नीति में 12 हजार रुपये देकर घर में बार खोलने की छूट देने की योजना बनाई थी। उत्तराखंड महिला मंच ने इस नीति के विरोध में उग्र तेवर दिखाए और देहरादून डीएम ऑफिस पर प्रदर्शन किया। महिलाओं ने चेतावननी दी थी कि यदि एक हफ्ते के भीतर मुख्यमंत्री ने इस मसले पर महिला मंच के साथ बात नहीं की तो पूरे राज्य में आंदोलन किया जाएगा। उनका कहना था कि दो दिन बाद ही सरकार को यह नीति वापस लेनी पड़ी।
इस बैठक में भूकानून के मामले को भी जोर-शोर से उठाया गया और तय किया गया कि भूकानून में 2018 में किये गये संशोधन को वापस लेने के लिए महिला मंच पुराने तेवरों के साथ सड़कों पर उतरेगा। स्थापना दिवस समारोह के दौरान इस संबंध में आंदोलन की रणनीति की घोषणा की जाएगा। महिलाओं ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझ कर पहाड़ों में लोगों को मूलभूत सुविधाएं नहीं दे रही है। सरकार चाहती है कि लोग अपने गांवों को छोड़ दें, ताकि पहाड़ों की छोड़ी गई जमीन को आसानी से बड़े उद्योगपतियों को दिया जा सके। पहाड़ों में स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं में सुधार करने की भी कार्यकारिणी की बैठक में पुरजोर मांग की गई। बैठक में फैसला किया गया कि महिला मंच इस स्थापना दिवस पर एक पुस्तिका प्रकाशित करेगा, जिसमें मंच की अब तक की उपलब्धियों के साथ ही भावी रणनीति के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी।
बैठक में खासतौर पर मौजूद स्वतंत्र पत्रकार त्रिलोचन भट्ट ने संवैधानिक मूल्यों को लेकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में संविधान को पूरी तरह बदलने की बातें हो रही हैं। यह खतरनाक स्थिति है। उन्होंने महिलाओं का आह्वान किया कि वे संविधान को बचाने के लिए आगे आएं और इस मसले को अपने एजेंडे में आवश्यक रूप से शामिल करें।
बैठक में मुख्य रूप से कमला पंत, निर्मला बिष्ट, पद्मा गुप्ता, शकुन्तला मुंडेपी, ऊषा भट्ट, शांता नेगी, लक्ष्मी, रूपा, हेमलता नेगी, सरोज कलोड़ा, विजय नैथानी, शांति सेमवाल, मातेश्वरी रजवार, सीमा नेगी आदि सदस्य मौजूद थी।
