आपदा/दुर्घटना

एआई पर कार्यशाला में आपदा प्रबंधन को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने पर जोर

 देहरादून, 24  मार्च । उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) में मंगलवार को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) विषय पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एआई जैसी नवीनतम तकनीकों को अपनाकर अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके प्रभावी व जिम्मेदार उपयोग के प्रति जागरूक करना था।

कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव श्री विनोद कुमार सुमन ने कहा कि वर्तमान समय तकनीकी परिवर्तनों का दौर है और एआई इसमें प्रमुख भूमिका निभा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा, “एआई को अपना सहयोगी बनाना चाहिए, न कि उसे अपना ‘बॉस’ बना लेना चाहिए। हमें उस पर पूर्ण निर्भर नहीं होना है।”

सुमन ने एआई के व्यावहारिक उपयोग पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस तकनीक से आपदाओं की पूर्वानुमान क्षमता को काफी मजबूत किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर, मौसम आधारित अलर्ट, भूस्खलन और बाढ़ की संभावनाओं का सटीक पूर्व आकलन किया जा सकता है। रियल-टाइम डेटा एनालिसिस से त्वरित निर्णय लेने में मदद मिलेगी, जिससे आपातकालीन प्रतिक्रिया अधिक प्रभावी और समयबद्ध होगी।

इसके अलावा, एआई आधारित सिस्टम जोखिम मानचित्रण (रिस्क मैपिंग), संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में भी उपयोगी साबित होगा। सैटेलाइट इमेजरी और ड्रोन डेटा के विश्लेषण से प्रभावित इलाकों का तेजी से आकलन कर राहत एवं बचाव कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर संचालित किया जा सकेगा।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए आईटीडीए के निदेशक श्री आलोक कुमार पाण्डेय ने एआई के उपयोग में जिम्मेदारी और जवाबदेही पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि डेटा के सत्यापन (वेरिफिकेशन) के बिना किसी भी सूचना का उपयोग या प्रसार नहीं करना चाहिए। “एआई एक शक्तिशाली उपकरण है, जिसका सही दिशा में उपयोग कर आपदा प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक, त्वरित और प्रभावी बनाया जा सकता है। लेकिन इसके साथ-साथ मानवीय निर्णय क्षमता, अनुभव और संवेदनशीलता को भी बनाए रखना जरूरी है।”

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को एआई की बुनियादी अवधारणाओं, उसके कार्यप्रणाली और विभिन्न प्लेटफॉर्म्स जैसे ChatGPT, Claude और Gemini के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही यह भी बताया गया कि एआई टूल्स की मदद से ऑडियो, वीडियो और इमेज कैसे तैयार किए जा सकते हैं, बड़े दस्तावेजों को संक्षिप्त रूप में समराइज किया जा सकता है तथा जटिल आंकड़ों का आसान विश्लेषण संभव है।

प्रस्तुतिकरण में यह भी बताया गया कि एआई आधारित कम्युनिकेशन सिस्टम से आम जनता तक समय पर सही जानकारी पहुंचाई जा सकती है, जिससे अफवाहों पर नियंत्रण और जन-जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, विभिन्न आपदा परिदृश्यों (सिनेरियो) के सिमुलेशन और प्रशिक्षण के लिए एआई का उपयोग फील्ड स्तर की तैयारियों को और सुदृढ़ करेगा।

इस अवसर पर अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (प्रशासन) श्री महावीर सिंह चौहान, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो. ओबैदुल्लाह अंसारी, श्री शांतनु सरकार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

यह कार्यशाला उत्तराखण्ड में आपदा प्रबंधन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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