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वन्यजीव-मानव संघर्ष पर चिंतन: समाधान की राह तलाशने का आह्वान

पोखरी, 23 अगस्त (राणा)। सेवा इंटरनेशनल स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते वन्यजीव-मानव संघर्ष और कृषि सुरक्षा पर चिंतन के लिए ब्लॉक सभागार में एक दिवसीय गोष्ठी का आयोजन किया गया।

गोष्ठी में महिलाओं ने खुलकर अपनी समस्याएं रखीं। महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी कुशुम कंडारी, मधु देवी और मन्दोदरी पंत ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में बंदरों, लंगूरों और जंगली सूअरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। इनके झुंड खेतों को चौपट कर रहे हैं और महिलाओं-बच्चों पर हमला करने से भी नहीं चूकते। इस कारण ग्रामीण खेती से विमुख हो रहे हैं और रोज़गार की तलाश में मैदानी क्षेत्रों को पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।

विधायक प्रतिनिधि धीरेंद्र राणा ने कहा कि संपूर्ण गढ़वाल इन वन्यजीवों के आतंक से जूझ रहा है। उन्होंने बताया कि विभाग और प्रशासन को बार-बार लिखित व मौखिक रूप से इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि प्रशासन, वन विभाग और स्थानीय लोगों को मिलकर ही इस संकट का स्थायी समाधान निकालना होगा।

एडवोकेट श्रवण सती ने कहा कि बंदरों, लंगूरों और जंगली सूअरों का भयावह आतंक कृषि भूमि को बंजर बना रहा है। सरकार और वन विभाग को मिलकर सामूहिक प्रयास करने होंगे।

गोष्ठी का उद्घाटन करते हुए मुख्य अतिथि, अलकनंदा भूमि संरक्षण वन प्रभाग, पोखरी रेंज के वन क्षेत्राधिकारी बी. एल. शाह ने कहा कि वन विभाग को शिकायत मिलते ही वनकर्मी मौके पर जाकर बंदरों को पकड़कर दूरस्थ क्षेत्रों में छोड़ते हैं और लंगूरों व जंगली सूअरों को भगाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों और मनुष्यों के बीच संतुलन बनाना हम सबकी जिम्मेदारी है।

इस अवसर पर वन दरोगा आनंद सिंह रावत, वन पंचायत सरपंच संगठन की ब्लॉक अध्यक्ष माला कंडारी, लता बर्त्वाल, विनोदनी देवी समेत कई महिलाएं, वन कर्मी और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

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