कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ यौन उत्पीडन पर शिविर का आयोजन
पोखरी, 29 दिसंबर (राणा) । जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से स्वयं सेवी संगठनों के विकास कार्यकर्ताओं के साथ कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ यौन उत्पीडन (रोकथाम, निशेध और निर्वारण )अधिनियम 2013 पर विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन हिमाद कार्यालय गोपेश्वर में किया गया ।
इस अवसर पर पर विधिक कार्यकर्ता एंव हिमाद के सचिव उमाशंकर बिष्ट ने कहा कि यह अधिनियम 09 दिसम्बर 2013 को प्रभाव में आया है। जैसा की इस कानून के नाम ही इसके उदेष्य रोकथाम, निशेध और निवारण को स्पष्ट करता है और किसी भी प्रकार के उल्लंघन के मामले में, पीडित को निवारण प्रदान करने के लिए भी यह कार्य करता है।
उन्होने कहा कि जिन भी संस्थाओं में 10 से अधिक लोग काम करते है वहा पर यह अधिनियम लागू हो जाता है। उन्होने कानून में व्याप्त मुख्य बिन्दु, यौन उत्पीडन के प्रकार, शिकायतकर्ता कौन, शिकायत कहा करनी है, के साथ ही नियोक्ता केे कर्तव्यों की विस्तृत जानकारी दी । साथ ही उन्होने विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्याे की विस्तृत जानकारी दी ।
इस अवसर हिमाद की समन्वयक प्रभा रावत ने कहा कि यह कानून कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीडन को अवैध करार देता है। साथ कानून यौन उत्पीडन के विभिन्न प्रकारों को चिन्हित करता है और यह भी बताता है कि किस प्रकार शिकायत करनी है। उन्होने कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ किये जाने वाले व्यवहार एंव कृत्यों के सन्दर्भ में भी विस्तृत जानकारी दी साथ ही उन्होने सभी संगठनों विभागों में आंन्तरिक शिकायत समिति के गठन के साथ ही स्थानीय शिकायती समिति के बारे में बताया। उन्होने शिकायत करने के प्रकार, शिकायत की समय सीमा बढाये जाने के प्रावधानों पर विस्तृत रूप से चर्चा की।
इस अवसर पर हिमाद के विकास कार्यकर्ता पंकज पुरोहित एंव भूपेन्द्र गुसाई ने कहा कि कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ होने वाले दुर्व्यवहार को रोकने के लिए विकास कार्यकत्ताओं की अहंम भूमिका अदा करनी होगी। साथ कानून के व्यापक प्रचार प्रसार हेतु सामुुदायिक संगठनों स्वय सहायता समूहों के साथ निरन्तर संवाद स्थापित करना होगा उन्होने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से संचालित विधिक साक्षरता शिविरों के द्वारा दी जाने वाली विभिन्न कानूनूनी जानकारी की सराहना की।
इस अवसर पर प्रेम सिंह, बहादुर सिंह, दिनेश्वरी देवी काजल रावत, अनिल सती, संदीप सिंह, भूपेन्द्र कुमाई पुश्कर राजेश्वरी देवी, बीना देवी, इन्दु देवी आदि ने विचार व्यक्त किये।
