उत्तम तप धर्म पर टीएमयू के रिद्धि-सिद्धि भवन में हुई विधि-विधान से पूजा अर्चना

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–प्रो. श्याम सुंदर भाटिया

रिद्धि-सिद्धि भवन में सम्मेद शिखर से आए प्रतिष्ठाचार्य श्री ऋषभ जैन ने विधि-विधान से विनय पाठ, पूजा प्रतिज्ञा पाठ, देवशास्त्र गुरु पूजन, सोलहकारण पूजन, दसलक्षण पूजन, शांतिपाठ भाषा पूजन कराया। दस दिन का उपवास रख रहे श्रावक-श्राविकाओं को फर्स्ट लेडी श्रीमती वीना जैन और पुत्रवधू श्रीमती ऋचा जैन ने स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। उल्लेखनीय है, इस पर्व के दौरान उपवास रख रहे ये श्रावक-श्राविकाएं केवल एक समय जल ग्रहण करते हैं। भोपाल से आई रजनीश जैन एंड पार्टी ने लगी लगी रे लगन लगी, प्रभु थारे नाम की लगन लगी…, पूर्ण हो गई राजकुमार के स्वागत की तैयारी…, मस्ती में झूमे नाचे मस्ताने आए हैं…, हम वंदन करते हैं आपका स्वागत करते हैं…, झूम रही धरती, झूम रहा आसमां…, विद्यासागर नाम रे, बोलो सुबह शाम रे…, आदि भजनों से माहौल को भक्ति के रंग में रंग दिया। उत्तम तप के दिन प्रथम स्वर्ण कलश से अभिषेक करने सौभाग्य बीटेक के द्रव्य जैन और प्रांजल गहलिया को प्राप्त हुआ। द्वितीय स्वर्ण कलश  का डॉ. रत्नेश जैन, जबकि तृतीय स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य टिमिट के विनय कोठारी और आदित्य जैन को मिला। चतुर्थ कलश का सौभाग्य बीटेक के गौतम जैन को मिला। शांतिधारा कराने का सौभाग्य ब्रह्मचारिणीं डॉ. कल्पना जैन को प्राप्त हुआ। प्रथम शांतिधारा करने का सौभाग्य बीटेक के छात्रों को मिला, द्वितीय शांतिधारा का सौभाग्य बीटेक और बीपीटी के छात्रों को मिला। उत्तम तप पूजा के दौरान कुलाधिपति श्री सुरेश जैन, फर्स्ट लेडी श्रीमती वीना जैन, जीवीसी श्री मनीष जैन, श्रीमती ऋचा जैन, डॉ. एसके जैन, श्री विपिन जैन, डॉ. रत्नेश जैन, डॉ. विनोद जैन, प्रो. रवि जैन, डॉ. आशीष सिंघई, डॉ. अक्षय जैन, डॉ. अर्चना जैन, श्री अरिंजय जैन आदि की गरिमामयी मौजूदगी रही।

नमन जैन को  बेस्ट परफ़ॉर्मर ऑफ़ द डे का ख़िताब

इससे पूर्व टीएमयू में चल रहे दसलक्षण महापर्व की सांस्कृतिक संध्या पर सीसीएसआइटी ने रंगारंग कार्यक्रम पेश किए। इस सांस्कृतिक साँझ का श्रीगणेश माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित के संग हुआ। कार्यक्रम की मुख्य प्रस्तुति नाटक भक्ति की शक्ति रही। इसमें राजा बहुपाल और रानी रूपसुंदरी की पुत्री मैनासुंदरी की भक्ति में शक्ति का चित्रण किया गया। मैनासुंदरी के अनुसार भाग्य में लिखा ही सच होता है। क्रोधित राजा ने पुत्री का विवाह कोढ़ी राजा श्रीपाल से कराने का निश्चय किया। मैनासुंदरी ने इसे भी अपना भाग्य समझकर स्वीकार कर लिया। जैन साधु के बताने पर महामण्डल विधान के अनुष्ठान की विधि मैना ने पूरी की। फलस्वरूप राजा श्रीपाल समेत 700 लोग रोगमुक्त हो गए। उन्होंने ने बताया, जैन धर्म में मोक्ष नहीं मिलता है। उसे पुरुष के रूप में जन्म लेना पड़ता है, तब मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस प्रक्रिया में मैना सुंदरी ने मोक्ष को प्राप्त किया। नाटक के सभी कलाकारों ने अपने किरदारों को जीवंत कर दिया। बेस्ट परफ़ॉर्मर ऑफ़ द डे का ख़िताब राजा बहुपाल का रोल कर रहे बीटेक सीएसई के छात्र नमन जैन को मिला, जबकि मैनासुंदरी का किरदार निभा रही बीटेक की छात्रा अर्पिता श्रीवास्तवा को दूसरा स्थान प्राप्त हुआ। करीब 40 मिनट तक चले इस नाटक के किरदारों में अंशिका जैन, प्राशुक जैन, चिराग जैन, मुदित जैन, सम्यक जैन, साँची जैन आदि स्टूडेंट्स प्रमुख रहे। कल्चरल इवनिंग के दौरान सीसीएसआइटी के स्टूडेंट्स शिक्षक दिवस पर गुरुओं का स्मरण करना नहीं भूले। ग्रुप सिंगिंग के जरिए गुरु के महत्ता का वर्णन किया। इसमें बीटेक के यशी जैन, आस्था पांडे और बीसीए के पीयूष ने गीत और गिटार के जरिए गुरुवंदना करके समां बांधा। इसके बाद बीटेक और बीसीए के स्टुडेंट्स ने ग्रुप डांस परफॉर्म किया। इसमें जय जय जय गणपति- बप्पा मोरेया, आरम्भ है प्रचंड… आदि गीतों पर उत्साहपूर्वक नृत्य प्रस्तुत किया। इसमें तृप्ति जैन, आर्जव जैन, दिव्या जैन, आदर्श गोलचा, भूमि जैन आदि स्टुडेंट्स शामिल रहे। इसके बाद प्रो. आरके द्विवेदी ने फाइनल ईयर के सभी जैन स्टुडेंट्स को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानजनक विदाई दी। छात्र-छात्राओं ने अपने अनुभव साझा किए। निर्णायक में शामिल ऋतु नारंग और विधि जैन को स्मृति चिन्ह देकर उनका आभार व्यक्त किया। सीसीएसआइटी के फैकल्टी मेंबर डॉ. आदित्य जैन ने वोट ऑफ़ थैंक्स देकर सभी को धन्यवाद दिया। इससे पूर्व दिव्यघोष के बीच आरती को जिनालय से रिद्धि सिद्धि भवन तक लाकर विराजमान कराया गया। भक्ति के पश्चात पंडित श्री ऋषभ जैन ने भक्ताम्बर पाठ किया। इस दौरान कुलाधिपति परिवार के अलावा डॉ. एसके जैन, श्री विपिन जैन, डॉ. रत्नेश जैन, डॉ. विनोद जैन, श्री रवि जैन, मुरादाबाद दिगम्बर समाज के अध्यक्ष श्री अनिल जैन, प्रो. आरके द्विवेदी, डॉ. आदित्य जैन, डॉ. वैभव जैन और सीसीएसआइटी के अन्य फैकल्टी मेंबर्स भी मौजूद रहे। निर्णायक मंडल में योगगुरु श्रीमती ऋतु नारंग और श्रीमती विधि जैन शामिल रहीं। मंगलाचरण पर क्लासिकल डांस प्रस्तुत करके बीटेक और बीसीए की छात्राओं ने खूब नाम कमाया।

 

मनः संयम विद्यार्थी जीवन में की सर्वाधिक दरकार; सुरीश्वर जी महाराज

ऑडी में जैनाचार्य श्रीमद् विजय धर्मधुरंधर सुरीश्वर जी महाराज से छात्रों ने सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासा शांत की। एक सवाल के जवाब में उन्होंने विद्यार्थी के पांच लक्षण बताए- कौए की तरह चेष्टा, बगुले की तरह ध्यान, कुत्ते की तरह नींद, कम भोजन लेने वाला अल्पाहारी, गृहत्यागी- ब्रह्मचारी, जिनमें इन लक्षणों का अभाव होगा, वे उत्तम विद्यार्थी नहीं हो सकते हैं। महाराज जी बोले, आधुनिक जीवन में प्रयोग किए जाने वाले साधन जैसे टीवी, फ़ोन आदि विद्यार्थी को ध्यान केंद्रित करने में बाधा डालते हैं। उन्होंने तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं को इन साधनों से दूर रहने की सलाह दी। महाराजश्री ने कहा, महावीर स्वामी ने विद्या प्राप्त करने में पांच बाधकों का ज़िक्र किया है जिसमें अभिमान सबसे बड़ा बाधक है। सदैव हमें यह ध्यान रखना चाहिए, विनयपूर्वक ली गई विद्या ही सिद्ध होती है। मनः संयम की सबसे ज्यादा जरुरत विद्यार्थी जीवन में होती है। स्वामी विवेकानंद का भावपूर्ण स्मरण करके मन की स्वच्छता और ब्रह्मचर्य के बारे में बताया। ब्रह्मचारिणी डॉ. कल्पना जैन के सवाल के जवाब में महाराज जी ने बताया, श्वेताम्बर जैन समाज में मथेन वंदामि कहकर गुरु की वंदना करते हैं, जबकि दिगम्बर जैन समाज में नमोस्तु कहकर वंदना करते हैं। महाराजश्री ने महाभारत में अश्वत्थामा का प्रसंग सुनाते हुए गुरुनिंदा ना करने का उपदेश दिया। अर्जुन ने महाभारत में युद्ध के समय में अपना पहला बाण गुरु द्रोणाचार्य के चरणों में समर्पित करते थे, जबकि गुरु द्रोणाचार्य आशीर्वाद सहित अपना बाण वापस अर्जुन को लौटा दिया करते थे। तब युद्ध का आगाज किया जाता था।

सफलता के सौ मित्र, असफलता अनाथ होती है; प्रतिष्ठाचार्य 

उत्तम तप धर्म पर सम्मेद शिखर से आए प्रतिष्ठाचार्य श्री ऋषभ जैन बोले, स्टुडेंट्स अक्सर पूछते हैं, विद्यार्थी तप कैसे करें? जवाब के रूप में उन्होंने कहा, ईमानदारी से अपनी सम्पूर्ण पढ़ाई करें तो यही तप है। ज़िंदगी अवसर प्रदान करती है, पर उस अवसर का लाभ अधिकाँश लोग नहीं ले पाते हैं। सच्चा मित्र वही है, जो आपकी साधना में सहयोगी बनें। सफलता के सौ मित्र होते हैं, जबकि असफलता अनाथ होती है। अतः छात्रों के लिए पूर्ण योग के साथ अध्ययन करना ही उत्तम तप धर्म के पालन का रूप होगा। इससे पूर्व उत्तम संयम धर्म पर प्रतिष्ठाचार्य बोले, जब तक जीवन में हम संतुलित होते हैं, तब तक ही हम पूजनीय होते हैं। नदी के किनारे टूटने पर वह बाढ़ का रूप ले लेती है जो संयम के टूटने का उदाहरण है। श्री ऋषभ जैन ने दो प्रकार के संयम बताए। इंद्री संयम और प्राणी संयम। पांचों इन्द्रियों के नाम इस प्रकार हैं। त्वचा, कान, नाक, आँख और जीभ।

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