वायु सेना को मिली वायु रक्षा मिसाइल (एमआर-सैम) प्रणाली

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प्रमुख बातें:

  •  एमआर-सैम लड़ाकू विमानयूएवीनिर्देशित और अनिर्देशित हथियारों एवं क्रूज मिसाइलों जैसे हवाई खतरों के खिलाफ हवाई सुरक्षा प्रदान करता है
  •  70 किलोमीटर तक दूरी पर अनेक लक्ष्यों को एंगेज़ करने में सक्षम
  •  उच्च गतिशीलता प्राप्त करने के लिए स्वदेश में विकसित रॉकेट मोटर एवं कंट्रोल प्रणाली
  •  अत्याधुनिक मिसाइल प्रणाली

भारत की रक्षा क्षमताओं को एक महत्वपूर्ण प्रोत्साहन देने के लिए रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में भारतीय वायु सेना को मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (एमआर-सैम) प्रणाली की पहली सुपुर्दगी योग्य फायरिंग यूनिट दिनांक 9 सितंबर, 2021 को राजस्थान में जैसलमेर वायुसेना स्टेशन में सौंपी गई।
एमआरएसएएम भारतीय उद्योग के सहयोग से एमएसएमई सहित निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की भारतीय कंपनियों के साथ तालमेल कर रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (आईएआई) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित एक उन्नत नेटवर्क केंद्रित लड़ाकू वायु रक्षा प्रणाली है।

DRDO hands over air defence missile (MRSAM) System to Indian Air Force in presence of Raksha Mantri Shri Rajnath Singh at Jaisalmer, Rajasthan

रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ जी सतीश रेड्डी ने राजनाथ सिंह की उपस्थिति में वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया को पहली डिलीवरी योग्य फायरिंग यूनिट सौंपी। आयोजन के दौरान डीआरडीओ और आईएआई के अधिकारियों ने ऑन-साइट स्वीकृति परीक्षण (ओएसएटी) के हिस्से के रूप में एमआर-सैम प्रणाली की क्षमताओं का प्रदर्शन किया।

अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, आईएआई, विभिन्न निरीक्षण एजेंसियों, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के उद्योग भागीदारों के संयुक्त प्रयासों की सराहना की और उन्होंने इस प्रणाली को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों में से एक करार दिया। उन्होंने कहा, “भारतीय वायुसेना को एमआरएसएएम प्रणाली सौंपने के साथ, हमने अपने प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की कल्पना के अनुरूप ‘आत्मनिर्भर भारत’ हासिल करने की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाई है। यह वायु-रक्षा-प्रणाली में गेम चेंजर साबित होगी।”

रक्षा मंत्री ने तेजी से बदलते वैश्विक रणनीतिक परिदृश्य से उत्पन्न होने वाली किसी भी चुनौती से निपटने के लिए देश के सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए सरकार के संकल्प को दोहराया । उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग के निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। एक मजबूत सेना की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार देश की सुरक्षा और समग्र विकास सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। उन्होंने उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में रक्षा उद्योग कॉरिडोर की स्थापना सहित सरकार द्वारा उठाए गए उपायों- आयुध निर्माणी बोर्ड का निगमीकरण; निजी क्षेत्र को डीआरडीओ द्वारा निर्यात और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (टीओटी) बढ़ाने के लिए 200 से अधिक वस्तुओं की दो सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियों की अधिसूचना का उल्लेख किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत जल्द ही रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ रक्षा प्रणालियों का वैश्विक विनिर्माण केंद्र बन जाएगा।

राजनाथ सिंह ने ‘मेक इन इंडिया, ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ पर ध्यान केंद्रित करते हुए स्वदेशी अनुसंधान, डिजाइन और विकास के माध्यम से तकनीकी आधार को मजबूत करने की सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि प्रौद्योगिकी भागीदारों और मित्र देशों के बीच घनिष्ठ सहयोग ने इस दृष्टि को साकार करने की दिशा में तेजी से प्रगति की है और एमआर-सैम का विकास इस तरह के सहयोगात्मक प्रयास का एक बड़ा उदाहरण है।

रक्षा मंत्री ने एमआर-सैम प्रणाली के विकास को भारत और इज़राइल के बीच घनिष्ठ साझेदारी का एक जीवंत उदाहरण बताया और कहा कि भारतीय वायुसेना को प्रणाली प्राप्त होना दशकों पुरानी दोस्ती को और अधिक ऊंचाइयों पर ले गया है। उन्होंने कहा कि इसने भारत और इज़राइल के रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस कार्यक्रम के विकास में नई परीक्षण सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के निर्माण पर श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह भविष्य में दोनों देशों के लिए गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के उत्पादन में सहायक होगा । उन्होंने इस कार्यक्रम के लिए निर्मित की जा रही उप-प्रणालियों को भारतीय सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों के बीच तालमेल का एक बड़ा उदाहरण बताया।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम को याद करते हुए उन्हें एक दूरदर्शी व्यक्ति बताया, जिन्होंने रक्षा क्षेत्र में, विशेष रूप से मिसाइल विकास कार्यक्रम में, आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने कहा कि लगभग 30 साल पहले डॉ कलाम ने एकीकृत मिसाइल विकास कार्यक्रम की शुरुआत ऐसे समय में की थी जब वैज्ञानिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विभिन्न प्रतिबंधों का सामना कर रहे थे। रक्षा मंत्री ने कहा कि इन सबके बावजूद कार्यक्रम की सफलता ने न केवल मिसाइल विकास में आत्मनिर्भरता सुनिश्चित की, बल्कि सीमा पार से किसी भी खतरे की संभावना को भी विफल कर दिया।

एमआर-सैम प्रणाली लड़ाकू विमान, यूएवी, हेलीकॉप्टर, निर्देशित और बिना निर्देशित युद्ध सामग्री, सब-सोनिक और सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों आदि समेत खतरों की एक विस्तृत श्रृंखला के खिलाफ जमीनी संपत्तियों को एक स्थान विशेष पर और क्षेत्र विशेष पर वायु रक्षा प्रदान करती है । यह गंभीर संतृप्ति परिदृश्यों में 70 किलोमीटर की दूरी तक अनेक लक्ष्यों को एंगेज करने में सक्षम है। टर्मिनल चरण के दौरान उच्च गतिशीलता प्राप्त करने के लिए मिसाइल स्वदेशी रूप से विकसित रॉकेट मोटर और कंट्रोल प्रणाली द्वारा संचालित है।

फायरिंग यूनिट में मिसाइल, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम (सीएमएस), मोबाइल लॉन्चर सिस्टम (एमएलएस), एडवांस्ड लॉन्ग रेंज रडार, मोबाइल पावर सिस्टम (एमपीएस), रडार पावर सिस्टम (आरपीएस), रीलोडर व्हीकल (आरवी) और फील्ड सर्विस व्हीकल (एफएसवी)
शामिल हैं।

इस अवसर पर बोलते हुए वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया ने एमआर-सैम (आईएएफ) की पूरी टीम के प्रयासों को बधाई दी और कहा कि यह प्रणाली देश की वायु रक्षा क्षमताओं को बढ़ाएगी। डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ जी सतीश रेड्डी ने एमआर-सैम प्रणाली के विकास में शामिल टीमों की सराहना की।

इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत, दक्षिण पश्चिमी वायुसेना कमान के एओसी-इन-सी एयर मार्शल संदीप सिंह तथा आईएआई के अध्यक्ष और सीईओ श्री बोज लेवी और अन्य वरिष्ठ नागरिक तथा सैन्य अधिकारी भी उपस्थित थे ।

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