हिमालय की चिन्ता हिमालयवासियों के बिना अधूरी

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हिमालय की चिन्ता हिमालयवासियों के बिना अधूरी
-जयसिंह रावत
अफगानिस्तान से लेकर भूटान तक फैला पर्वतराज हिमालय आज न केवल पर्यावरणविदों अपितु आपदा प्रबंधकों की भी चिन्ता का विषय बना हुआ है। कहीं बाढ़ तो कही भूस्खलन और जलवायु परिवर्तन से उपजी नयी समस्याएं स्पष्ट संकेत दे रही हैं कि नगाधिराज की तबियत निश्चित रूप नासाज तो जरूर है लेकिन हिमालय के प्रति उठ रही चिंताएं तब तक निरर्थक ही हैं जब तक कि हम हिमालय और हिमालय की गोद में बसे करोड़ों लोगों के अन्तर्सबंधों को भी इस चिंता में शामिल नहीं करते। वास्तव में हिमालयवासी भी एशिया का ऋतुचक्र तय करने वाले हिमालय के पारितंत्र के ही अभिन्न अंग हैं। इसलिये हिमालय और हिमालयवासियों की वेदनाओं को हम अलग-अलग चस्मों से नहीं देख सकते।

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