चमोली के 100 विद्यालयों के बेहतर शैक्षिक प्रयास बनेंगे दूसरों के लिए उदाहरण
थराली/गौचर, 28 सितम्बर (हरेन्द्र बिष्ट/दिग्पाल गुसाईं)। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) चमोली ने ‘शिक्षा के क्षेत्र में जिला चमोली के बढ़ते कदम’ शीर्षक से विशेष श्रृंखला शुरू की है। इसके तहत जिले के ऐसे 100 विद्यालयों का चयन किया गया है, जो नवाचार, बेहतर शैक्षिक परिणाम, विज्ञान, खेल, प्रतियोगी परीक्षाओं तथा भौतिक एवं अकादमिक संसाधनों के बेहतर उपयोग सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। पिंडर घाटी के देवाल, थराली और नारायणबगड़ विकासखंडों से इस श्रृंखला के लिए 31 विद्यालय चुने गए हैं।
चमोली के मुख्य शिक्षा अधिकारी आकाश सारस्वत के निर्देश पर संचालित इस कार्यक्रम के पहले चरण में प्रत्येक विकासखंड से लगभग 10 विद्यालयों को शामिल किया जा रहा है। इनमें प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक और इंटर कॉलेज स्तर के विद्यालय शामिल हैं।
देवाल विकासखंड से राजकीय प्राथमिक विद्यालय ल्वाणी, आदर्श विद्यालय देवाल, प्राथमिक विद्यालय सवाड़ तल्ला, प्राथमिक विद्यालय उलंग्रा, प्राथमिक विद्यालय बेराधार, प्राथमिक विद्यालय तलोर, प्राथमिक विद्यालय मुंदोली, राजकीय जूनियर हाईस्कूल बांक, राजकीय इंटर कॉलेज वांण और राजकीय इंटर कॉलेज मुंदोली का चयन किया गया है।
थराली विकासखंड से राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय डूंगरी, प्राथमिक विद्यालय भैरगढ़, प्राथमिक विद्यालय गेरूड़, प्राथमिक विद्यालय गुड़म स्टेट, आदर्श प्राथमिक विद्यालय थराली, जूनियर हाईस्कूल गूमड़, उच्च माध्यमिक विद्यालय सुनाऊँ, इंटर कॉलेज तलवाड़ी और आदर्श इंटर कॉलेज थराली को श्रृंखला में शामिल किया गया है।
नारायणबगड़ विकासखंड से राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय चोपता, कन्या जूनियर हाईस्कूल चोपता, प्राथमिक विद्यालय डडुवागाड़, प्राथमिक विद्यालय असेड़, प्राथमिक विद्यालय मींग, आदर्श प्राथमिक विद्यालय नारायणबगड़, प्राथमिक विद्यालय किमोली, पीएम श्री प्राथमिक विद्यालय सणकोट, इंटर कॉलेज नारायणबगड़, इंटर कॉलेज रैंस चोपता तथा राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय देवीधार किमोली का चयन उनके उल्लेखनीय कार्यों के आधार पर किया गया है।
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. कमलेश कुमार मिश्र ने बताया कि इस श्रृंखला का उद्देश्य केवल चयनित विद्यालयों की उपलब्धियों का प्रचार-प्रसार करना नहीं है, बल्कि उनके नवाचारों और प्रभावी शैक्षिक प्रयासों को जिले के दूसरे विद्यालयों तक पहुंचाना भी है, ताकि वे एक-दूसरे के अच्छे प्रयोगों और अनुभवों से सीख सकें।
उन्होंने कहा कि जिले के विभिन्न विद्यालयों में अनेक शिक्षक सीमित संसाधनों के बावजूद उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं। ऐसे प्रयासों को पहचान और मंच मिलने से संबंधित विद्यालयों तथा शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा और दूसरे विद्यालय भी बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित होंगे।
डॉ. मिश्र ने बताया कि अक्टूबर में दशोली, पोखरी और कर्णप्रयाग विकासखंडों के विद्यालयों को इस श्रृंखला में शामिल किया जाएगा। इसके बाद शेष विकासखंडों के उल्लेखनीय कार्य करने वाले विद्यालयों का भी चयन किया जाएगा।
