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टीएमयू की अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में नौ देशों के 135 शोध पत्र प्रस्तुत

मुरादाबाद, 3 मई। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी (टीएमयू) के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में आयोजित “मॉडर्न ट्रेंड्स इन कम्प्यूटर्स एंड इलेक्ट्रॉनिक्स” विषयक अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस—आईसीएमसीई 2026 का सफल समापन हुआ। सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), वीएलएसआई डिजाइन, सिग्नल एवं इमेज प्रोसेसिंग, एम्बेडेड सिस्टम, साइबर सुरक्षा, स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार नेटवर्क जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों पर व्यापक विमर्श किया गया।

भारत के साथ ग्रीस, स्पेन, जर्मनी, यूके, यूएई, सऊदी अरब, जॉर्डन और इजिप्ट सहित नौ देशों के विशेषज्ञों ने इस सम्मेलन में भाग लिया और कुल 135 शोध पत्र (ब्लेंडेड मोड में) प्रस्तुत किए। इन शोधपत्रों में आधुनिक तकनीकों के विभिन्न आयामों पर गहन विश्लेषण और नवाचारों की संभावनाओं पर प्रकाश डाला गया।

सम्मेलन के दौरान आयोजित एक दर्जन से अधिक तकनीकी सत्रों में ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी, देहरादून के डॉ. अंकित विश्नोई, जेएसएस एकेडमी ऑफ टेक्निकल एजुकेशन, नोएडा के प्रो. लवकुश शर्मा, पद्मावत सिंघानिया यूनिवर्सिटी, उदयपुर के डॉ. ब्रजेश कुमार शर्मा, एकेजी इंजीनियरिंग कॉलेज, गाजियाबाद के डॉ. आशीष दीक्षित, गलगोटिया यूनिवर्सिटी, नोएडा की डॉ. शिप्रा शुक्ला, जीसीईटी, ग्रेटर नोएडा की डॉ. शिल्पी पाटिल सहित कई विशेषज्ञों ने सेशन चेयर के रूप में सहभागिता की। इनके अलावा डॉ. शालिनी अग्रवाल, डॉ. अर्निका, डॉ. अवधेश कुमार गुप्ता और डॉ. प्रमोद कुमार सागर आदि भी सत्रों का संचालन करते रहे।

समापन (वैलेडिक्ट्री) सत्र में शोधपत्र प्रस्तुत करने वाले प्रतिभागियों को कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के डीन प्रो. आर.के. द्विवेदी ने प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।

इन्नोवेशन से बदल रही उद्योगों की तस्वीर: जय आनंद

स्विट्जरलैंड की ग्रीनीपैथ एजी में दक्षिण एशिया परियोजना निर्माण एवं विकास निदेशक जय आनंद ने “मॉडर्न ट्रेंड्स एंड रिसेंट टेक्नोलॉजी इन एनवायरनमेंटल कंजर्वेशन एंड क्लाइमेट चेंज” विषय पर अपने संबोधन में कहा कि एआई, क्वांटम टेक्नोलॉजी, एज कम्प्यूटिंग और आईओटी में हो रहे नवाचार उद्योगों से लेकर सामाजिक ढांचे तक व्यापक परिवर्तन ला रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये तकनीकें न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान को गति दे रही हैं, बल्कि स्मार्ट और प्रभावी समाधान विकसित करने में भी अहम भूमिका निभा रही हैं।

आईआईटी कानपुर के प्रो. मनोज कुमार तिवारी ने “वाटर ट्रीटमेंट एप्लिकेशंस में एआई-एमएल का उपयोग” विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि इन तकनीकों के माध्यम से जल प्रबंधन अधिक कुशल, किफायती और सुरक्षित बन रहा है। उन्होंने बताया कि डेटा विश्लेषण के आधार पर भविष्य की समस्याओं का पूर्वानुमान लगाना अब संभव हो गया है, जो पारंपरिक तरीकों की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी है।

छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी साबित होगी कॉन्फ्रेंस

कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के डीन एवं कॉन्फ्रेंस के जनरल चेयर प्रो. आर.के. द्विवेदी ने कहा कि एआई, मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, 5जी कम्युनिकेशन और वीएलएसआई डिजाइन जैसी तकनीकें वर्तमान समय की आवश्यकता हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आईसीएमसीई 2026 छात्रों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।

वैलेडिक्ट्री सत्र में कॉन्फ्रेंस कन्वीनर प्रो. गुलिस्ता खान, डॉ. अलका वर्मा, प्रो. अशोक कुमार, डॉ. संकल्प गोयल, डॉ. इंदु त्रिपाठी, डॉ. आशीष सिमल्टी, डॉ. शुभेन्द्र प्रताप, डॉ. प्रियांक सिंघल, डॉ. विभोर भारद्वाज सहित अनेक शिक्षाविद एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे। कॉन्फ्रेंस कन्वीनर प्रशांत कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया, जबकि संचालन छात्र नवजोत ने किया।

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