पेट के ये पांच संकेत न करें नजरअंदाज
When people see blood in or on their stool, they often ignore it because they assume it’s from hemorrhoids, said Dr. Cathy Eng, a professor of medicine at the Vanderbilt-Ingram Cancer Center. When hemorrhoids, which are swollen, inflamed veins, are irritated or pressure is applied, they can cause bright red blood to appear on toilet paper, or as drops in the toilet bowl or on the surface of your stool. But it’s often not possible to tell by appearance whether the blood is from hemorrhoids or something more serious, Dr. Eng said.
मल में खून, लगातार दस्त और निगलने में परेशानी हो तो चिकित्सकीय सलाह जरूरी

पेट खराब होना, गैस, पेट फूलना या कभी-कभार दस्त होना आम बात है। खानपान में बदलाव, यात्रा, तनाव या मामूली संक्रमण के कारण भी ऐसी परेशानी हो सकती है और अक्सर कुछ समय में अपने आप ठीक हो जाती है। लेकिन पेट और आंतों से जुड़े कुछ लक्षण ऐसे हैं, जिन्हें सामान्य मानकर लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, ये लक्षण बने रहें या बार-बार लौटें तो चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है।
1. मल में खून
मल में खून दिखाई देने को अक्सर लोग बवासीर मानकर टाल देते हैं। बवासीर में मल त्याग के दौरान चमकीला लाल खून दिखाई दे सकता है, लेकिन केवल देखकर यह तय करना हमेशा संभव नहीं होता कि रक्तस्राव का कारण बवासीर ही है।
वेंडरबिल्ट-इनग्राम कैंसर सेंटर की डॉ. कैथी एंग के अनुसार, मल में खून आंतों की सूजन, संक्रमण, डाइवर्टिकुलिटिस, क्रोहन रोग या कुछ मामलों में कोलोरेक्टल कैंसर से भी जुड़ा हो सकता है। यदि मल काला, तारकोल जैसा या गहरे लाल रंग का हो तो यह ऊपरी पाचन तंत्र में रक्तस्राव का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
2. मल त्याग की आदत में अचानक बदलाव
कब्ज या दस्त कभी-कभार होना असामान्य नहीं है, लेकिन मल त्याग की आवृत्ति, स्वरूप या आकार में अचानक और लगातार बदलाव पर ध्यान देना चाहिए।
मास जनरल ब्रिघम के डॉ. एंड्रयू चान के अनुसार, यदि खानपान, दवा, तनाव या दिनचर्या में बदलाव के बिना अचानक कब्ज, लगातार दस्त या असामान्य रूप से पतला मल होने लगे तो चिकित्सक को इसकी जानकारी देनी चाहिए। आंतों में सूजन से भी कब्ज और दस्त हो सकते हैं तथा इनके साथ दर्द, गैस और पेट फूलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में बड़ी आंत में रुकावट या गांठ भी मल त्याग की आदत बदल सकती है।
3. कई दिनों तक दस्त बने रहना
यदि ढीला या पानी जैसा मल पांच से सात दिन से अधिक समय तक बना रहे, खासकर उसके साथ पेट दर्द, मरोड़ या भूख में बदलाव भी हो, तो इसकी अनदेखी नहीं करनी चाहिए।
जियार्डिया और साइक्लोस्पोरा जैसे परजीवी तथा कुछ जीवाणु संक्रमण लंबे समय तक दस्त का कारण बन सकते हैं। क्रोहन रोग, अल्सरेटिव कोलाइटिस और सीलिएक रोग जैसी बीमारियों में भी लगातार दस्त, पेट दर्द, ऐंठन और गैस की शिकायत हो सकती है। लगातार दस्त के पीछे अन्य गंभीर कारण भी हो सकते हैं, इसलिए लंबे समय तक समस्या रहने पर जांच जरूरी है।
4. निगलने में परेशानी
भोजन निगलने में बार-बार दर्द होना, खाना गले में अटकता महसूस होना या भोजन को मुंह से गले तक पहुंचाने में कठिनाई भी ऐसा लक्षण है जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, निगलने में कठिनाई के कई कारण हो सकते हैं। कुछ तंत्रिका या मांसपेशियों संबंधी रोगों में ऐसा हो सकता है, जबकि गले या अन्नप्रणाली में किसी प्रकार की रुकावट भी इसका कारण बन सकती है। समस्या बार-बार हो रही हो तो गंभीर होने की प्रतीक्षा करने के बजाय चिकित्सक से परामर्श लेना बेहतर है।
5. पेट की परेशानी से रात में नींद खुलना
पेट दर्द, ऐंठन, दस्त या मतली इतनी अधिक हो कि रात में नींद खुल जाए और ऐसा बार-बार होने लगे तो इसे सामान्य अपच मानकर नहीं छोड़ना चाहिए।
पेट के संक्रमण या दूषित भोजन के कारण भी रात में अचानक परेशानी हो सकती है। लेकिन लगातार ऐसा होना आंतों की सूजन सहित कुछ गंभीर बीमारियों से भी जुड़ा हो सकता है। इसके साथ बिना स्पष्ट कारण वजन तेजी से कम हो रहा हो या नियमित रूप से रात में अत्यधिक पसीना आ रहा हो तो चिकित्सक को इसकी जानकारी देना जरूरी है।
शरीर के संकेतों को समझना जरूरी
इनमें से किसी एक लक्षण का होना अपने आप में कैंसर या किसी गंभीर बीमारी का प्रमाण नहीं है। अधिकांश पाचन समस्याओं के सामान्य और उपचार योग्य कारण भी हो सकते हैं। महत्वपूर्ण यह है कि लक्षण कितने समय से हैं, कितनी बार हो रहे हैं और उनके साथ अन्य परेशानियां तो नहीं जुड़ रही हैं।
विशेषज्ञों की सलाह है कि पाचन संबंधी कोई असामान्य लक्षण कुछ दिनों या हफ्तों में ठीक न हो, बार-बार लौटे अथवा उसकी तीव्रता बढ़ती जाए तो चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर सामान्य चिकित्सक आगे की जांच के लिए पेट एवं आंत रोग विशेषज्ञ के पास भेज सकता है।
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स्रोत : कैरोलिन हॉपकिंस लेगास्पी की रिपोर्ट पर आधारित

