आर्थिक महाशक्ति की ओर अग्रसर भारत की भूख- कुपोषण से जंग
According to the Global Hunger Index 2025, India is positioned at 111th with a GHI score of 28.7. This marks a decline from last year, when it held the 107th spot out of 121 countries. In earlier years, India was ranked 101st in 2011 out of 116 countries and 94th in 2020. India’s ranking is notably worse than its neighbors. Jay Singh Rawat is a distinguished author and journalist with over four decades of experience, specializing in the socio-economic landscape of Uttarakhand and northern India. Renowned for his deep insights into rural development, inequality, and regional challenges, Rawat has contributed extensively to leading publications and authored and edited a dozen of books that highlight the state’s unique struggles and potential. His expertise in bridging policy discourse with grassroots realities makes him a trusted voice on issues like the Global Hunger Index. In this article, he analyzes India’s position within the Global Hunger Index 2025, contrasting the state’s developmental strides with its persistent hunger challenges, offering a nuanced perspective rooted in the local context–ADMIN

-जयसिंह रावत –
एक ओर भारत वैश्विक मंच पर अपनी आर्थिक और तकनीकी क्षमता का लोहा मनवा रहा है, वहीं दूसरी ओर करोड़ों लोग भूख और कुपोषण से जूझ रहे हैं। कृषि उत्पादन में आत्मनिर्भर होने के बावजूद गरीब तबके तक पर्याप्त पोषणयुक्त भोजन नहीं पहुँच पा रहा। योजनाएँ ज़रूर बनी हैं लेकिन जमीनी स्तर पर उनका क्रियान्वयन कमजोर है। 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ते कदम, अंतरिक्ष में सफल मिशन और ‘अच्छे दिन’ के नारे के साथ देश की छवि चमकदार दिखाई देती है। लेकिन वैश्विक भुखमरी सूचकांक (Global Hunger Index – GHI) 2025 की रिपोर्ट इस चित्र को चुनौती देती है, जहां भारत 125 देशों में 111वें स्थान पर है और उसका स्कोर 28.7 है। यह रिपोर्ट आयरलैंड की कंसर्न वर्ल्डवाइड और जर्मनी की वेल्ट हंगर हिल्फे द्वारा जारी की गई है, जो कुपोषण, बच्चों में स्टंटिंग, वेस्टिंग और बाल मृत्यु दर जैसे चार प्रमुख संकेतकों पर आधारित है। रिपोर्ट बताती है कि 9 देशों में भुखमरी की स्थिति ‘अलार्मिंग’ है, जबकि 35 में ‘सीरियस’। भारत की स्थिति ‘सीरियस’ श्रेणी में आती है, जो पिछले साल के 107वें स्थान से गिरावट दर्शाती है। 2011 में भारत 116 देशों में 101वें, 2020 में 94वें स्थान पर था, लेकिन अब पड़ोसी देशों से भी पीछे है: पाकिस्तान 102वें, श्रीलंका 60वें, बांग्लादेश 81वें, नेपाल 69वें और म्यांमार 71वें स्थान पर। केवल अफगानिस्तान (114वें) भारत से नीचे है। इसके अलावा, भारत में बच्चों की वेस्टिंग दर 19.3% है, जो दुनिया में सबसे ऊंची है। यह विरोधाभास उठाता है कि आर्थिक विकास के बावजूद भुखमरी क्यों बनी हुई है?

आर्थिक और वैज्ञानिक प्रगति के दावे
भारत की अर्थव्यवस्था वाकई तेजी से बढ़ रही है। 2025 में जीडीपी ग्रोथ 6.5-7% अनुमानित है, और देश दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार, 2025 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.4% रह सकती है। डेलॉयट की रिपोर्ट में FY2026 के लिए 6.5-6.7% ग्रोथ की भविष्यवाणी की गई है, जो घरेलू मांग और सरकारी समर्थन पर आधारित है। फोर्ब्स के अनुसार, भारत हर 12-18 महीने में अपनी जीडीपी में 1 ट्रिलियन डॉलर जोड़ रहा है, और 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य है। अंतरिक्ष क्षेत्र में भी सफलताएं हैं: 2025 में भारत ने लो अर्थ ऑर्बिट में सैटेलाइट डॉकिंग सफलतापूर्वक की, दुनिया का चौथा देश बनकर। नेशनल स्पेस डे 2025 पर चंद्रयान-3 की सफलता का जश्न मनाया गया, जहां भारत दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश बना। स्पेस बजट 2013-14 के 5,615 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में 13,416 करोड़ हो गया है। ये उपलब्धियां ‘अच्छे दिन’ के वादे को मजबूत करती हैं, लेकिन सवाल है कि यह विकास आम आदमी तक क्यों नहीं पहुंच रहा?

भुखमरी की जड़ें और सामाजिक असमानता
वैश्विक भुखमरी सूचकांक -2025की रिपोर्ट भारत में कुपोषण की गंभीरता को उजागर करती है, खासकर बच्चों में। 19.3% वेस्टिंग दर दर्शाती है कि बच्चे तीव्र कुपोषण से जूझ रहे हैं, जो स्वास्थ्य और विकास को प्रभावित करता है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की स्थिति पड़ोसियों से खराब है, जो दर्शाता है कि आर्थिक विकास असमान है। हालांकि, भारत सरकार GHI की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है। सरकार का कहना है कि इंडेक्स ‘भुखमरी’ को सही से नहीं मापता, क्योंकि यह पुराने डेटा पर आधारित है और आनुवंशिक कारकों को नजरअंदाज करता है। 2023 और 2024 की रिपोर्टों पर भी सरकार ने कहा कि यह ‘दोषपूर्ण’ है और भारत की सच्ची स्थिति नहीं दर्शाती। एक अध्ययन में कहा गया है कि भुखमरी सूचकांक में गैर-भुखमरी तत्व शामिल हैं, जिससे औसत त्रुटि 22% तक हो सकती है। दूसरी ओर, विशेषज्ञों का कहना है कि रिपोर्ट कुपोषण की वास्तविकता को दर्शाती है, और सरकार की अस्वीकृति समस्या से मुंह मोड़ने जैसी है। X पर चर्चाएं भी विभाजित हैं: कुछ यूजर्स भुखमरी सूचकांक को मोदी सरकार की विफलता बताते हैं, जैसे 2014 में 55वें से 2025 में 105वें स्थान की गिरावट, जबकि अन्य इसे विकास के विरोध में देखते हैं। असल समस्या गरीबी, असमानता और ग्रामीण संकट में है। युवा बेरोजगारी 23% से ऊपर है, और ऊपरी 1% के पास 40% संपत्ति है। जीडीपी ग्रोथ के बावजूद, ग्रामीण क्रेडिट स्ट्रेस और प्रवासन बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भूख और कुपोषण से निपटने के लिए केवल खाद्यान्न वितरण काफी नहीं है। जरूरत है कि मिड-डे मील, ICDS, राष्ट्रीय पोषण मिशन जैसी योजनाओं में सुधार हो और गरीब बच्चों व माताओं तक संतुलित भोजन पहुँचे। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाना, कृषि सुधार लागू करना और महिला-शिशु स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

भारत के लिए एक चेतावनी
ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2025 ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि आर्थिक तरक्की और तकनीकी उपलब्धियों के बावजूद भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती भूख और कुपोषण है। जब तक हर नागरिक को पर्याप्त भोजन और पोषण नहीं मिलेगा, तब तक “आर्थिक महाशक्ति” बनने का सपना अधूरा रहेगा। वैश्विक भुखमरी सूचकांक 2025 भारत के लिए एक चेतावनी है कि आर्थिक विकास अकेला पर्याप्त नहीं। अंतरिक्ष और जीडीपी की सफलताएं सराहनीय हैं, लेकिन भुखमरी, कुपोषण और असमानता को संबोधित किए बिना ‘महाशक्ति’ का दावा अधूरा रहेगा। सरकार की आलोचना वैध है, लेकिन डेटा की अनदेखी समस्या को बढ़ाएगी। नीतियां जैसे पोषण अभियान और रोजगार सृजन मजबूत करने की जरूरत है। दोनों पक्षों को मिलकर काम करना होगा, ताकि विकास समावेशी बने और ‘अच्छे दिन’ सबके लिए आएं।
