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भारत और इज़राइल आयरन डोम के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते पर हस्ताक्षर करने को तैयार?

 

नई दिल्ली, 26 फरबरी : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बुधवार को तेल अवीव पहुंचने के साथ ही भारत और इज़राइल एक ऐतिहासिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने की कगार पर हैं, जो दोनों “मैत्रीपूर्ण देशों” के बीच सुरक्षा संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। माना जा रहा है कि इस बार किसी नए हथियार की सीधी बिक्री नहीं होगी, बल्कि ध्यान उन उन्नत हथियार प्रणालियों की तकनीक हस्तांतरण पर रहेगा, जिन्हें इज़राइल ने अब तक किसी अन्य देश को पेश नहीं किया है।

इज़राइल की संसद कनेस्सेट में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “अनिश्चित दुनिया में भारत और इज़राइल जैसे विश्वसनीय साझेदारों के बीच मजबूत रक्षा साझेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है।” स्थानीय इज़राइली मीडिया के अनुसार, भारत-इज़राइल रक्षा सहयोग, जो एक समझौता ज्ञापन (MoU) के रूप में होगा, के दो आयाम हो सकते हैं—रक्षात्मक प्रणालियों के लिए गठजोड़ और आक्रामक हथियारों के विकास में सहयोग।
समझौते का फोकस इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) की ‘एरो’ मिसाइल रक्षा प्रणाली, राफेल की ‘डेविड्स स्लिंग’ (जो 300 किमी तक की मध्यम दूरी की मिसाइलों और ड्रोन को संभाल सकती है) और ‘आयरन डोम’ (जो 4–70 किमी तक की कम दूरी की रॉकेटों को रोक सकता है), तथा राफेल और एल्बिट के ‘आयरन बीम’ (100 किलोवाट की किरण, जो 10 किमी तक हवाई खतरों को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन की गई है) पर रहने की संभावना है।
कुछ समझौते पहले ही तय हो चुके हैं या लगभग अंतिम चरण में हैं। इनमें राफेल के SPICE-1000 गाइडेंस किट, एल्बिट सिस्टम्स की ‘रैम्पेज’ एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलें, IAI की ‘आई ब्रेकर’ नौसैनिक क्रूज़ मिसाइलें और IAI की सुपरसोनिक ‘एयर लोरा’ मिसाइलें शामिल हैं।
पिछले मई में पाकिस्तान के साथ हुए संघर्ष से सबक लेते हुए—जब इस्लामाबाद ने भारत के सैन्य और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने के लिए तुर्की के ड्रोन और चीनी PL-15 लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलों की लहरें भेजी थीं—मोदी सरकार देश की सीमाओं को अभेद्य मिसाइल ढाल से मजबूत करना चाहती है।
हालांकि भारत के पास रूस का S-400 मिसाइल शील्ड, इज़राइल-निर्मित ‘बराक’ प्रणालियां और स्वदेशी ‘आकाश’ प्रणाली मौजूद हैं, लेकिन देश को इज़राइल के ‘आयरन डोम’ और ‘आयरन बीम’ जैसी अधिक प्रभावी प्रणालियों की आवश्यकता है, ताकि उसकी 15,106 किमी लंबी स्थल सीमाओं और 7,516.6 किमी लंबी तटरेखा की सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके। भारत इन हथियारों का निर्माण ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत देश में ही करने के लिए तकनीक हस्तांतरण चाहता है, ताकि इन्हें 2035 तक प्रस्तावित ‘सुदर्शन चक्र’ पैन-इंडिया बहु-स्तरीय हवाई रक्षा प्रणाली में एकीकृत किया जा सके।
‘गोल्डन होराइजन’ के अधिग्रहण पर भी चर्चा हो सकती है, जिसे ‘स्पैरो’ लक्ष्य मिसाइल परिवार का उत्तराधिकारी माना जाता है। ‘गोल्डन होराइजन’ एक विशेष श्रेणी का हथियार है, जिसे विमान से छोड़े जाने के लिए डिजाइन किया गया है। इसलिए इसे भारतीय वायुसेना के ‘सुखोई-30 MKI’ जेट के साथ आसानी से एकीकृत किया जा सकता है।
यह मिसाइल प्रणाली 1,000–2,000 किमी की मारक क्षमता और मैक 5 की रफ्तार तक पहुंचने की क्षमता रखती है। इसे भूमिगत बंकरों, मजबूत सैन्य ठिकानों और यहां तक कि परमाणु सुविधाओं को भेदने के लिए डिजाइन किया गया है। ऐसी स्थिति में, मौजूदा वायु-रक्षा प्रणालियों से इसे रोकना अत्यंत कठिन हो जाता है। यह भारत की ‘ब्रह्मोस’ क्रूज़ मिसाइल से काफी तेज है, जो मैक 3 की गति से चलती है और जिसे दुनिया की सबसे तेज संचालनात्मक सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल माना जाता है।

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