ख़ामेनेई के निधन के बाद भी मोर्चे पर डटा है ईरान, अंतरिम परिषद संभाल रही कमान

–जयसिंह रावत-
ईरान में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई के निधन के बाद भी देश युद्ध के मोर्चे पर मजबूती से डटा हुआ है। अमेरिका–इज़राइल के साथ जारी सैन्य टकराव के बीच ईरान की राजनीतिक और सैन्य व्यवस्था को अस्थायी ढांचे के तहत संचालित किया जा रहा है। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार नए सर्वोच्च नेता के चयन तक तीन सदस्यीय अंतरिम नेतृत्व परिषद देश की कमान संभाल रही है।
अंतरिम नेतृत्व परिषद ने संभाली बागडोर
ख़ामेनेई के निधन के बाद गठित परिषद में राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन, न्यायपालिका प्रमुख ग़ोलाम-होसैन मोहसेनी-एजेई तथा गार्डियन काउंसिल से जुड़े वरिष्ठ धर्मगुरु अलीरेज़ा अराफी शामिल बताए जा रहे हैं।
यह परिषद शासन संचालन, आपात निर्णयों और युद्धकालीन रणनीति तय करने की जिम्मेदारी निभा रही है। सूत्रों के अनुसार, सभी प्रमुख नीतिगत फैसले सामूहिक सहमति से लिए जा रहे हैं।
रक्षा मामलों में लारीजानी और ग़ालिबाफ की अहम भूमिका
राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा समन्वय में वरिष्ठ नेता अली लारीजानी तथा संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाग़र ग़ालिबाफ को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। दोनों नेता युद्धकालीन रणनीतिक फैसलों और सैन्य समन्वय में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
आईआरजीसी अग्रिम मोर्चे पर
युद्ध के व्यावहारिक संचालन में Islamic Revolutionary Guard Corps (आईआरजीसी) अग्रणी भूमिका निभा रहा है। पूर्व कमांडर मोहम्मद पाकपूर की मृत्यु के बाद अहमद वाहिदी को नया प्रमुख नियुक्त किया गया है। आईआरजीसी मिसाइल हमलों, ड्रोन अभियानों और क्षेत्रीय सहयोगी संगठन Hezbollah के माध्यम से जवाबी कार्रवाई का संचालन कर रहा है।
नए सर्वोच्च नेता की प्रक्रिया तेज
नए सर्वोच्च नेता का चयन Assembly of Experts द्वारा किया जाएगा। विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने संकेत दिया है कि चयन प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जा सकती है।
संभावित दावेदारों में मोजतबा ख़ामेनेई, अली लारीजानी, सादिक़ लारीजानी तथा अलीरेज़ा अराफी के नाम चर्चा में हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टों में मोजतबा के नाम पर सहमति बनने की बात कही जा रही है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी शेष है।
खामेनेई समेत शीर्ष सैन्य नेतृत्व की मौत
ईरान पर अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए हालिया हमलों में भारी तबाही के साथ देश के शीर्ष नेतृत्व को बड़ा नुकसान पहुँचा है। इस सैन्य कार्रवाई में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु की पुष्टि हुई है, जिनके साथ उनके परिवार के कई सदस्य भी मारे गए हैं। सैन्य मोर्चे पर रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के कमांडर मोहम्मद पाकपुर, रक्षा मंत्री अजीज नासिरजादेह और सुरक्षा परिषद के सचिव अली शमखानी जैसे प्रभावशाली नाम भी इस हमले की चपेट में आए। ईरानी रेड क्रेसेंट के मुताबिक, इस घटना में अब तक 200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें उच्च अधिकारियों के अलावा बड़ी संख्या में नागरिक भी शामिल हैं।
40 दिन का शोक, पर सैन्य जवाब जारी
ईरान ने 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। इसके बावजूद सैन्य मोर्चे पर जवाबी कार्रवाई जारी है।
विश्लेषकों का मानना है कि नेतृत्व परिवर्तन के इस संवेदनशील दौर में ईरान अपनी सैन्य सक्रियता बनाए रखकर आंतरिक एकजुटता और शक्ति का संदेश देना चाहता है। आने वाले दिनों में नए सर्वोच्च नेता की घोषणा के साथ ईरान की रणनीतिक दिशा और स्पष्ट हो सकती है।
