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चिठ्ठी आई है !!आई है!! -ऐसी खुशी तो उसी समय होती थी

 

– गोविंद प्रसाद बहुगुणा-
यह यादगार पत्र जनसत्ता के संस्थापक संपादक स्व प्रभाष जोशी जी ने मुझे लिखा था,जब मैंने केन्द्रीय गांधी स्मारक निधि, नई दिल्ली की नौकरी छोड़कर सरकारी नौकरी ज्वाइन कर‌ ली थी ,उसी दौरान मेरी शादी भी हुई थी, तो मैने विशेष तौर पर प्रभाष जोशी जी और अनुपम मिश्र को चिट्ठी में ही न्यौता भेजा था।

अनुपम तो आये थे लेकिन प्रभाष जी नहीं आ सके क्योंकि वे उन‌ दिनों जनसत्ता हिन्दी दैनिक अखबार के दिल्ली में प्रकाशित करने की योजना पर कार्य कर रहे थे, इसलिए वही इस अखबार के संस्थापक संपादक भी बने ….वे मुझे प्यार में *गुना* ही पुकारते थे अस्तु यहां भी उसी तरह संबोधित किया है मुझे ।


स्वत: स्पष्ट है कि उनका मेरे प्रति कितना स्नेह रहा होगा कि इस पोस्टल इंग्लैंड लेटर में जब लिखने की जगह नहीं बची तो उसके आवरण पर भी लिखना नहीं छोड़ा, -पत्र में अनुपम मिश्र और श्री श्रवण कुमार गर्ग (अब वरिष्ठ पत्रकार) का भी उल्लेख उन्होंने किया है ……GPB

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