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डोनाल्ड ट्रम्प अपने ही खयालों की दुनियाँ के केंद्र बिंदु

डोनाल्ड ट्रम्प ऐसा व्यक्ति जो स्वयं को अपने ही संसार का केंद्र मानने लगता है और बाहरी मानकों या आलोचनाओं का महत्व कम हो जाता है!


जयसिंह रावत-
अमेरिकी राजनीति में इन दिनों सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि ईरान के साथ चल रहे संघर्ष का अंत कब और कैसे होगा। बहुत-से विश्लेषकों का मानना है कि युद्ध की दिशा अंततः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की इच्छा पर निर्भर करेगी। कुछ लोगों का अनुमान है कि यदि अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें बहुत अधिक बढ़ जाएँगी तो ट्रम्प पीछे हट सकते हैं। कुछ का कहना है कि जब अमेरिकी सैनिकों की हताहत संख्या बढ़ने लगेगी तब युद्ध को समाप्त करने का दबाव बनेगा। वहीं कई लोग नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों की ओर देख रहे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि चुनावी दबाव ट्रम्प को संयमित कर सकता है।

लेकिन ट्रम्प की राजनीति को समझना इतना सरल नहीं है। वे पारंपरिक अमेरिकी नेताओं की तरह व्यवहार नहीं करते। उनका राजनीतिक आचरण अक्सर ऐसा प्रतीत होता है मानो वे अपने निर्णयों को किसी व्यापक अंतरराष्ट्रीय मानक या सामूहिक हित की कसौटी पर नहीं, बल्कि व्यक्तिगत राजनीतिक लाभ और अपनी छवि के आधार पर लेते हों।

ट्रम्प ने चुनाव अभियान के दौरान यह वादा किया था कि वे अमेरिका को नए युद्धों में नहीं उलझाएँगे और ऊर्जा की कीमतें कम करेंगे। उन्होंने पेट्रोल की कीमत दो डॉलर प्रति गैलन से नीचे लाने की बात कही थी। परंतु वास्तविकता यह है कि कई बार कीमतें इससे कहीं अधिक रही हैं और इसके बावजूद उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह संकेत दिया कि उन्हें इससे विशेष चिंता नहीं है। इससे यह धारणा मजबूत होती है कि उनकी प्राथमिकता पारंपरिक आर्थिक वादों से अधिक राजनीतिक शक्ति के प्रदर्शन पर केंद्रित है।
कुछ मनोवैज्ञानिक विश्लेषकों ने ट्रम्प के व्यक्तित्व को समझाने के लिए “सोलिप्सिज़्म” की अवधारणा का उल्लेख किया है। सामान्यतः राजनीति में आत्ममुग्धता को “नार्सिसिज़्म” कहा जाता है, जिसमें व्यक्ति स्वयं को अत्यधिक महत्व देता है, लेकिन उसे दूसरों की स्वीकृति भी चाहिए होती है। जबकि सोलिप्सिज़्म उससे एक कदम आगे की स्थिति है, जिसमें व्यक्ति स्वयं को अपने ही संसार का केंद्र मानने लगता है और बाहरी मानकों या आलोचनाओं का महत्व कम हो जाता है।

ट्रम्प की कई राजनीतिक कार्रवाइयाँ इस धारणा को बल देती हैं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनका व्यवहार कई बार पारंपरिक कूटनीति से अलग दिखाई देता है। उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति  वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरील रामाफोसा जैसे नेताओं के प्रति तीखी टिप्पणियाँ कीं। इसी प्रकार वे डेनमार्क के अधीन स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड को खरीदने की योजना को लेकर भी चर्चा में रहे, जो अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक असामान्य प्रस्ताव माना गया।

ट्रम्प की आर्थिक नीतियाँ भी अक्सर आक्रामक रुख में दिखाई देती हैं। वे कई देशों पर भारी आयात शुल्क लगाने की धमकी दे चुके हैं और व्यापार को राष्ट्रीय शक्ति के औज़ार के रूप में इस्तेमाल करते रहे हैं। उनका मानना है कि अमेरिका की आर्थिक और सैन्य ताकत का उपयोग करके विश्व राजनीति को प्रभावित किया जा सकता है। यही कारण है कि वे कई बार दूसरे देशों की आंतरिक राजनीति पर भी खुलकर टिप्पणी करते हैं।

दक्षिण अमेरिका की राजनीति में भी ट्रम्प का रुख काफी स्पष्ट रहा है। ब्राज़ील के पूर्व राष्ट्रपति  जैर बोल्सोनारो और अर्जेंटीना के राष्ट्रपति  हावियर मीलई के संदर्भ में उन्होंने सार्वजनिक रूप से समर्थन और दबाव दोनों के संकेत दिए। इसी प्रकार पश्चिम एशिया के संदर्भ में उन्होंने  ईरान के नेतृत्व को लेकर भी कठोर बयान दिए, जिससे यह संदेश गया कि अमेरिका उस क्षेत्र की सत्ता संरचना को प्रभावित करने की इच्छा रखता है।

ट्रम्प की शैली का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वे अक्सर अपनी शक्तियों की सीमाओं को परखते हुए दिखाई देते हैं। अमेरिकी संविधान में राष्ट्रपति के अधिकारों की स्पष्ट सीमाएँ तय की गई हैं, लेकिन ट्रम्प बार-बार ऐसे कदम उठाते हैं जिनसे यह सवाल उठता है कि वे इन सीमाओं को कितना आगे तक ले जाना चाहते हैं।

मध्यावधि चुनावों को लेकर भी उनका दृष्टिकोण पारंपरिक नहीं रहा है। इतिहास बताता है कि अमेरिका में अक्सर राष्ट्रपति की पार्टी को मध्यावधि चुनावों में नुकसान उठाना पड़ता है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बहुत कम अवसर ऐसे आए हैं जब सत्तारूढ़ दल ने इन चुनावों में बड़ी जीत हासिल की हो। इसके बावजूद ट्रम्प ने पहले ही यह संकेत दिया है कि वे चुनाव परिणामों को तभी स्वीकार करेंगे जब वे उन्हें “ईमानदार” प्रतीत होंगे। यह बयान भी अमेरिकी लोकतंत्र की पारंपरिक राजनीतिक भाषा से अलग माना जाता है।
इन सबके बीच एक और दिलचस्प पहलू यह है कि ट्रम्प कई बार ऐसे संकेत देते हैं मानो वे भविष्य की राजनीति को लेकर भी असाधारण संभावनाओं पर विचार कर रहे हों। जबकि अमेरिकी संविधान के अनुसार कोई भी व्यक्ति दो से अधिक बार राष्ट्रपति नहीं बन सकता, फिर भी राजनीतिक बहसों में तीसरे कार्यकाल जैसी कल्पनाएँ समय-समय पर चर्चा में आ जाती हैं।

वास्तव में ट्रम्प की राजनीति केवल नीतियों का प्रश्न नहीं है, बल्कि वह एक विशेष राजनीतिक शैली का प्रतीक बन चुकी है। इसमें व्यक्तिगत नेतृत्व, आक्रामक बयानबाज़ी, आर्थिक राष्ट्रवाद और वैश्विक शक्ति-प्रदर्शन का मिश्रण दिखाई देता है। यही कारण है कि उनके समर्थक उन्हें मजबूत और निर्णायक नेता मानते हैं, जबकि आलोचक इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए चुनौती के रूप में देखते हैं।

आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि ट्रम्प की यह शैली अमेरिकी राजनीति को किस दिशा में ले जाती है। लेकिन इतना तय है कि उनकी कार्यशैली ने विश्व राजनीति में बहस को नया आयाम दे दिया है। आज दुनिया के सामने केवल यह प्रश्न नहीं है कि अमेरिका क्या निर्णय लेगा, बल्कि यह भी है कि उस निर्णय के पीछे किस प्रकार की राजनीतिक सोच और नेतृत्व शैली काम कर रही है।

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