नागनाथ पोखरी पीजी कॉलेज में बीएड, विधि व पीजी विज्ञान संकाय खोलने की मांग
— पोखरी से राजेश्वरी राणा —
विकासखंड पोखरी के एकमात्र राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय नागनाथ पोखरी में बीएड, विधि तथा विज्ञान संकाय के स्नातकोत्तर स्तर पर अध्ययन की व्यवस्था नहीं होने से क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों व अभिभावकों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत को ज्ञापन भेजकर इन संकायों को महाविद्यालय में शीघ्र शुरू करने की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि नागनाथ पोखरी पीजी कॉलेज में विकासखंड की 72 ग्राम पंचायतों और एक नगर पंचायत क्षेत्र के अलावा दूरदराज के इलाकों से भी छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए आते हैं। लेकिन कॉलेज में बीएड, विधि संकाय और विज्ञान विषयों में स्नातकोत्तर स्तर की पढ़ाई की व्यवस्था नहीं होने के कारण छात्रों की उच्च शिक्षा की आकांक्षा अधूरी रह जाती है। इन विषयों की पढ़ाई के लिए उन्हें गोपेश्वर, श्रीनगर या देहरादून जैसे दूरस्थ शहरों का रुख करना पड़ता है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बच्चों की पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों के छात्र-छात्राएं बाहर जाकर बीएड प्रशिक्षण प्राप्त कर शिक्षक बन जाते हैं, कानून की पढ़ाई कर वकालत या न्यायिक सेवाओं की तैयारी करते हैं तथा विज्ञान विषयों में स्नातकोत्तर कर विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार प्राप्त कर लेते हैं। वहीं आर्थिक तंगी के कारण गरीब परिवारों के कई छात्र-छात्राएं इन विषयों की पढ़ाई से वंचित रह जाते हैं।
क्षेत्रीय जनता और जनप्रतिनिधियों के लंबे संघर्ष के बाद वर्ष 2000 में विकासखंड मुख्यालय के जैडुगरा में नागनाथ पोखरी महाविद्यालय की स्थापना डिग्री कॉलेज के रूप में की गई थी, ताकि क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को इंटरमीडिएट के बाद उच्च शिक्षा के लिए बाहर न जाना पड़े। बाद में सरकार और उच्च शिक्षा विभाग ने इसे कला संकाय के तीन विषयों—हिंदी, राजनीति विज्ञान और भूगोल—के साथ स्नातकोत्तर स्तर तक उच्चीकृत कर दिया। इससे कला वर्ग के विद्यार्थियों को इन तीन विषयों में पीजी करने का अवसर मिला, लेकिन विज्ञान वर्ग के छात्रों को इसका लाभ नहीं मिल पाया।
महाविद्यालय की स्थापना के लगभग 25 वर्ष पूरे होने के बाद भी यहां बीएड, विधि तथा विज्ञान विषयों में स्नातकोत्तर स्तर की पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी है। इसके अलावा कला संकाय के अन्य विषय भी अभी तक शुरू नहीं हो पाए हैं। इससे कॉलेज का पूरा लाभ क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को नहीं मिल पा रहा है।
वर्तमान में महाविद्यालय में 405 से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। बीए कला संकाय में अंग्रेजी विषय को छोड़कर लगभग सभी विषयों के प्राध्यापक उपलब्ध हैं, जबकि बीएससी स्तर पर भी अधिकांश विषयों के प्राध्यापक तैनात हैं।
जिला पंचायत सदस्य एवं व्यापार मंडल अध्यक्ष बीरेंद्र सिंह राणा, राज्य महिला आयोग की सदस्य वत्सला सती, नगर पंचायत अध्यक्ष सोहन लाल, ब्लॉक प्रमुख राजी देवी, ज्येष्ठ प्रमुख ऊषा कंडारी, राजेंद्र त्रिपाठी, पूर्व प्रधानाचार्य कुंवर सिंह चौधरी, मनोज भंडारी, राज्य आंदोलनकारी संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष कुंवर सिंह खत्री, पूर्व प्रमुख नरेंद्र रावत, राम प्रसाद सती, टैक्सी यूनियन अध्यक्ष विजयपाल सिंह रावत, जितेंद्र सती और फतेराम सती सहित अनेक जनप्रतिनिधियों व अभिभावकों ने मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री से महाविद्यालय में बीएड, विधि संकाय, विज्ञान विषयों में स्नातकोत्तर कक्षाएं तथा कला संकाय के अन्य विषय शुरू करने की मांग की है।
इस संबंध में महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर रीटा शर्मा का कहना है कि नए संकाय खोलने का निर्णय शासन स्तर का विषय है। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद ही महाविद्यालय में इन संकायों की शुरुआत संभव हो सकेगी।
