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उत्तराखंड में वन्य जीवों से नुकसान पर मुआवजे का दायरा बढ़ा

  • भालुओं से फसल चौपट होने के मामलों में भी मुआवजे पर सरकार गंभीर

  • मकान को क्षति पहुंचने पर मुआवजे का पहले ही हो चुका है निर्णय

  • ततैंया औैर मधुमक्खी के काटने पर भी अब मिल रहा है मुआवजा

देहरादून, 10 मार्च। वन्य जीवों से होने वाले कई तरह के नुकसान पर अभी तक मुआवजे की व्यवस्था नहीं थी, लेकिन धामी सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लेकर लोगों को राहत प्रदान की है। राहत देने के लिए सरकार के प्रयास अभी थमे नहीं हैं। अब धामी सरकार भालुओं से किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान को भी मुआवजे के दायरे में लाने की कोशिश में जुटी है। भालुओं से मकान-भवनों को होने वाले नुकसान पर धामी सरकार पहले ही मुुआवजे की व्यवस्था कर चुकी है।

धामी सरकार ने अपने चार साल के कार्यकाल में वन्य जीवों से लोगों के नुकसान पर मुआवजे को लेकर गंभीरता दिखाई है। वन्य जीवों के हमले से मौत पर मिलने वाले मुआवजे को छह लाख करना बेहद अहम फैसला रहा है। पहले ऐसे मामलों में चार लाख मुआवजा दिया जा रहा था। इसी तरह, ततैंया, मधुमक्खी के हमले में भी मुआवजे की सरकार ने व्यवस्था की है।

बजट सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल में वन मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि भालुओं के व्यवहार में आए परिवर्तन और इससे हो रहे नुकसान पर भी सरकार की निगाह है। इसी लिए, भारतीय वन्य जीव संस्थान को इस विषय पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार जरूरी कदम उठाएगी। उनियाल ने जानकारी दी कि भालुओं से फसल के नुकसान पर मुआवजा देने के संबंध में भी सरकार गंभीरता से विचार कर रही है।

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