मातृ-पितृ विहीन बच्चों ने देखा विधानसभा सत्र, लोकतांत्रिक प्रक्रिया से हुए रूबरू

— महिपाल गुसाईं की रिपोर्ट-
भराड़ीसैंण, 11 मार्च (बुधवार)। मातृ-पितृ विहीन बच्चों को देश-दुनिया की गतिविधियों और लोकतांत्रिक व्यवस्था से परिचित कराने के उद्देश्य से उन्हें भराड़ीसैंण स्थित उत्तराखंड विधानसभा के सत्र की कार्यवाही दिखायी गई। गैरसैंण की स्वैच्छिक संस्था ‘सुबेर’ की पहल पर बच्चों को विधानसभा का अध्ययन भ्रमण कराया गया।
इस पहल का उद्देश्य यह था कि वंचित और अनाथ बच्चे भी सामाजिक-राजनीतिक परिवेश को समझ सकें तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को करीब से देख सकें। अपने परिजनों को खोने के कारण कई बच्चे मानसिक रूप से निराशा से घिरे रहते हैं, ऐसे में उन्हें सकारात्मक वातावरण और नए अनुभवों से जोड़ने के प्रयास के तहत यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।
अध्ययन भ्रमण के दौरान बच्चों को भराड़ीसैंण में चल रहे विधानसभा सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही देखने का अवसर मिला। बच्चों ने देखा कि विधानसभा में किस प्रकार की व्यवस्थाएं होती हैं और किस तरह विधायी कार्यवाही संचालित की जाती है। उन्होंने सदन में विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका, विधायकों की उपस्थिति तथा लोकमहत्व के मुद्दों पर होने वाली बहस को भी करीब से देखा।
सुबेर संस्था के अध्यक्ष एडवोकेट नवीन प्रकाश ने बताया कि उनका उद्देश्य अनाथ बच्चों को भी ऐसे महत्वपूर्ण अवसरों से जोड़ना है, ताकि वे लोकतंत्र की प्रक्रियाओं को समझ सकें और समाज की मुख्यधारा से खुद को जुड़ा हुआ महसूस करें। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अध्ययन भ्रमण का बच्चों के व्यक्तित्व और भविष्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
एडवोकेट नवीन प्रकाश के अनुसार संभवतः ये ऐसे पहले अनाथ बच्चे हैं, जिन्हें विधानसभा सदन की कार्यवाही को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर मिला।
इस अवसर पर संस्था के सचिव सुनील कुमार और सदस्य हिमांशु पंवार भी बच्चों के साथ मौजूद रहे। उन्होंने पूरे भ्रमण के दौरान बच्चों को अनुशासन और मर्यादा का पालन करने के लिए मार्गदर्शन दिया।
विधानसभा की कार्यवाही देखने के बाद बच्चों में खासा उत्साह देखा गया। अपने जनप्रतिनिधियों को करीब से देखना और यह समझना कि जनहित के मुद्दों पर किस प्रकार चर्चा और निर्णय होते हैं, उनके लिए एक नया और यादगार अनुभव रहा।
विधानसभा की कार्यवाही देखने वाले बच्चों में भूमिका, तनु, पल्लवी, अनोखी, साक्षी, सोनाक्षी, आयुष, दिव्यांशु और आरुष शामिल थे। सदन की कार्यवाही के बाद जब बच्चे बाहर आए तो उनके चेहरों पर उत्साह और जिज्ञासा साफ झलक रही थी। उनके लिए यह अनुभव न केवल ज्ञानवर्धक बल्कि प्रेरणादायक भी
