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कमर दर्द से हैं परेशान? AIIMS के शोध ने बताया योग का चमत्कार!

 

When your lower back flares up, your first instinct might be to lie perfectly still and wait for the pain to pass. But what if the best thing you could do is move? It sounds counterintuitive, but gentle, intentional movement is often the fastest path to relief. When you stop moving, your muscles can tighten even more, creating a cycle of stiffness and pain. Stretching breaks that cycle by lengthening tight muscles and improving blood flow. This guide is designed to show you how to move safely and effectively. We’ll provide clear, easy-to-follow stretching exercises for low back pain with pictures to help you feel better now and prevent future flare-ups.

-Dr. Renu Bhatia

पुरानी कहावत है कि ‘योग भगाए रोग’, लेकिन अब इस बात पर आधुनिक विज्ञान की भी मुहर लग गई है। अक्सर हम योग को केवल शारीरिक व्यायाम या मानसिक शांति का साधन मानते हैं, लेकिन नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के एक हालिया अध्ययन ने सिद्ध किया है कि योग पुराने कमर दर्द (Chronic Low Back Pain) के इलाज में एक शक्तिशाली दवा की तरह काम करता है।

वैज्ञानिक कसौटी पर योग का परीक्षण

आमतौर पर योग के लाभों को केवल रोगी के ‘अनुभव’ या ‘महसूस करने’ के आधार पर मापा जाता था, लेकिन एम्स के फिजियोलॉजी विभाग की डॉ. रेणु भाटिया, डॉ. राजकुमार यादव और डॉ. श्रीकुमार वी. की टीम ने इसे वैज्ञानिक मापदंडों पर परखा। शोधकर्ताओं ने ‘क्वांटिटेटिव सेंसरी टेस्टिंग’ और ‘मस्तिष्क की विद्युत सक्रियता’ (Corticomotor Excitability) जैसे आधुनिक तरीकों का उपयोग किया ताकि यह देखा जा सके कि योग शरीर और दिमाग पर वास्तव में क्या असर डालता है।

4 हफ्ते का चमत्कार: क्या कहते हैं आंकड़े?

यह अध्ययन 50 वर्ष तक की आयु के उन 100 रोगियों पर किया गया, जो पिछले 3 वर्षों से लगातार पीठ के निचले हिस्से में दर्द (CLBP) से जूझ रहे थे। परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे:

  • दर्द सहने की क्षमता: मात्र 4 सप्ताह के व्यवस्थित योग अभ्यास के बाद मरीजों में ठंड और दबाव के कारण होने वाले दर्द को सहने की क्षमता में भारी सुधार देखा गया।

  • रीढ़ का लचीलापन: योग के कारण रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, जिससे दैनिक कार्यों में होने वाली कठिनाई कम हो गई।

  • मस्तिष्क पर प्रभाव: ट्रांसक्रानियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन (TMS) के जरिए पाया गया कि योग सीधे तौर पर मस्तिष्क के उन हिस्सों को सक्रिय करता है जो शरीर के मूवमेंट और दर्द के संकेतों को नियंत्रित करते हैं।

महंगी दवाओं और सर्जरी का सस्ता विकल्प

भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा वित्तपोषित यह शोध ‘जर्नल ऑफ मेडिकल साइंस एंड क्लिनिकल रिसर्च’ में प्रकाशित हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि योग न केवल एक प्रभावी चिकित्सा है, बल्कि यह बेहद किफायती भी है। चूंकि इसे लंबे समय तक घर पर ही किया जा सकता है, इसलिए यह मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करता है और उनके जीवन की समग्र गुणवत्ता (Quality of Life) में सुधार लाता है।

भविष्य की मानक चिकित्सा

इस शोध के आधार पर एम्स की टीम ने कमर दर्द और फाइब्रोमायल्जिया के रोगियों के लिए एक विशेष ‘योग प्रोटोकॉल’ भी तैयार किया है। यह अध्ययन इस बात का ठोस सबूत है कि पुरानी बीमारियों के प्रबंधन में योग को एक मानक उपचार के रूप में शामिल किया जाना चाहिए। अब डॉक्टर वैज्ञानिक प्रमाण के साथ मरीजों को दवाओं के साथ-साथ योग की सलाह दे सकेंगे, जिससे भविष्य में दर्द प्रबंधन की राह आसान होगी।

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