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बिना लत और साइड इफेक्ट: जीन थेरेपी से होगा पुराने दर्द (Chronic Pain) का अंत

Scientists have developed a new gene therapy that quiets pain at its source in the brain—without the addictive risks of opioids. Using AI to map how pain is processed, they created a targeted “off switch” that mimics morphine’s benefits but skips its dangerous side effects. In early tests, it delivered lasting relief without affecting normal sensations. The discovery could mark a major step toward safer, non-addictive pain treatments.

 

By- Jyoti Rawat

 विज्ञान की दुनिया से एक ऐसी खबर आई है जो करोड़ों लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण बन सकती है। यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिल्वेनिया के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी ‘जीन थेरेपी’ विकसित की है जो अफीम आधारित दवाओं (Opioids) जैसे मॉर्फिन के बिना ही शरीर के पुराने दर्द को जड़ से ‘खामोश’ कर सकती है। इस थेरेपी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें न तो नशे की लत लगने का डर है और न ही जानलेवा साइड इफेक्ट्स का।

दर्द का ‘ऑफ स्विच’

पुराने दर्द (Chronic Pain) के साथ जीना ऐसा है जैसे किसी रेडियो की आवाज पूरी खुली हो और वह कभी कम न हो रही हो। अब तक मॉर्फिन जैसी दवाएं इस आवाज को कम करने के लिए इस्तेमाल की जाती रही हैं, लेकिन वे मस्तिष्क के उन हिस्सों पर भी असर डालती हैं जो लत और सांस लेने में तकलीफ जैसे खतरे पैदा करते हैं।

वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से मस्तिष्क के उन खास सर्किटों का मानचित्र तैयार किया जहाँ दर्द की प्रक्रिया चलती है। इस शोध के सह-लेखक डॉ. ग्रेगरी कॉर्डर ने बताया, “हमने एक सटीक ‘वॉल्यूम कंट्रोल’ या ‘ऑफ स्विच’ बनाया है जो केवल दर्द के संकेतों को कम करता है, जबकि मस्तिष्क के बाकी हिस्सों और सामान्य संवेदनाओं को प्रभावित नहीं करता।”

AI और तकनीक का कमाल

यह शोध पिछले छह वर्षों की कड़ी मेहनत का परिणाम है। शोधकर्ताओं ने चूहों पर AI-आधारित सिस्टम का उपयोग किया जो उनके व्यवहार की निगरानी कर दर्द के स्तर का सटीक अनुमान लगाता था। इसी डेटा के आधार पर एक ऐसी जीन थेरेपी डिजाइन की गई जो मॉर्फिन के फायदों को तो दोहराती है, लेकिन उसके हानिकारक ‘रिवॉर्ड पाथवे’ (नशे का अहसास) को सक्रिय नहीं करती।

क्यों जरूरी है यह खोज?

दुनिया भर में अफीम आधारित दवाओं (Opioids) का संकट गहराता जा रहा है:

  • मौतों का आंकड़ा: अकेले 2019 में नशीली दवाओं से हुई मौतों में 80% मामले ओपिओइड से जुड़े थे।

  • बड़ा आर्थिक बोझ: केवल अमेरिका में 5 करोड़ से ज्यादा लोग पुराने दर्द से जूझ रहे हैं, जिससे चिकित्सा और उत्पादकता के रूप में सालाना अरबों डॉलर का नुकसान होता है।

  • लत का खतरा: मौजूदा दवाओं के लंबे समय तक इस्तेमाल से शरीर उनका आदी हो जाता है, जिससे मरीज को राहत के लिए और अधिक खुराक की जरूरत पड़ती है।

 क्लिनिकल ट्रायल

प्रतिष्ठित जर्नल ‘Nature’ में प्रकाशित यह शोध अब इंसानी परीक्षणों (Clinical Trials) की ओर बढ़ रहा है। शोध दल अब प्रोफेसर माइकल प्लैट के साथ मिलकर इसे क्लिनिक तक पहुँचाने की तैयारी कर रहा है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि यह परीक्षण सफल रहता है, तो यह चिकित्सा इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा। यह उन लाखों परिवारों के लिए एक वरदान होगा जिन्होंने अपनों को ओपिओइड की लत या ओवरडोज के कारण खो दिया है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का उपयोग: दर्द को ‘पढ़ना’

यह नई जीन थेरेपी चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और जेनेटिक इंजीनियरिंग के अनूठे संगम पर आधारित है। शोधकर्ताओं ने AI का उपयोग करके मस्तिष्क के उन सूक्ष्म ‘कॉर्टिकल पेन सर्किट’ की पहचान की है जहाँ दर्द महसूस होता है, जिससे यह समझना आसान हो गया कि दर्द की तीव्रता को बिना नशे के कैसे नियंत्रित किया जाए। पारंपरिक ओपिओइड दवाओं के विपरीत, जो पूरे मस्तिष्क और ‘रिवॉर्ड पाथवे’ को प्रभावित कर लत का कारण बनती हैं, यह थेरेपी ‘सिंथेटिक प्रमोटर्स’ और सुरक्षित वायरल वेक्टर्स के जरिए सीधे दर्द पैदा करने वाले न्यूरॉन्स में एक ‘ऑफ स्विच’ की तरह काम करती है। यह तकनीक न केवल मॉर्फिन की तरह प्रभावी राहत प्रदान करती है, बल्कि इसके कोई गंभीर साइड इफेक्ट्स जैसे सांस की तकलीफ या सुस्ती भी नहीं होते। विशेष रूप से डिजाइन किए गए जेनेटिक कोड (जैसे Oprm1 प्रमोटर्स) यह सुनिश्चित करते हैं कि शरीर में सामान्य संवेदनाएं बनी रहें और लंबे समय तक उपचार के बावजूद मरीज को इसकी लत न लगे। संक्षेप में, यह तकनीक पुराने दर्द (Chronic Pain) से जूझ रहे करोड़ों लोगों के लिए एक सुरक्षित, सटीक और गैर-नशीला विकल्प प्रदान करने की दिशा में एक ऐतिहासिक ब्लूप्रिंट है।

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source link : https://www.sciencedaily.com/releases/2026/03/260328043558.htm

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