सत्ता खोने के बाद आदमी की दुर्गति …..!

-गोविंद प्रसाद बहुगुणा-
सत्ता खोने के बाद आदमी की क्या गति हो जाती है ! यह कहानी महाभारत काल से आज तक यथावत चली आ रही है ।
महाभारत युद्ध के बाद जब कुछ दिनों युधिष्ठिर ने अपने ताऊ -ताई धृतराष्ट्र और गांधारी को अपने साथ ही राजभवन में टिकाये रखा तो एक दिन वहां ‘महात्मा’ विदुर आ पहुंचे। धृतराष्ट्र को वहां देखकर विदुर ने जो कमेंट किया, उसे पढ़कर मुझे आश्चर्य हुआ कि क्या यह वही विदुर बोल रहा है जिसकी ख्याति बड़े नीतिज्ञ विद्वान पुरुष की रही है ? क्या यह वही है जो अपने पूर्व सम्राट और बड़े भाई धृतराष्ट्र के लिए इस तरह अशिष्ट भाषा में खरी खोटीसुना गया ?

*गृहपाल* का मतलब पालतू जानवर (Domestic Animal) होता है,यह सभी जानते हैं जैसे कि पालतू कुत्ता होता है, जिसे लोग अपने घर की रखवाली करने के लिए पालते हैं । यहां विदुर ने धृतराष्ट्र की तुलना “कुत्ते” से करने में जरा भी संकोच नहीं किया , सत्ताच्युत होने पर आदमी की गति क्या हो जाती है, मैं यही सोच रहा था !!
देखिए विदुर ने क्या कहा –
“अहो महीयसी जन्तोर्जीविताशा यया भवान्।
भीमापवर्जितं पिण्डमादात्ते गृहपालवत्।।२२।।
अग्निर्निसृष्टो दत्तश्च गरो दाराश्च दूषिता:।
हृतंक्षेत्रं धनं येषां तद्दत्तैरसुभि:कियत्।।२३।।
तस्यापितव देहोSयं कृपणस्य जिजीविषो:।
परैत्यनिच्छतो जीर्णो जरया वाससी इव।।२४।।-
अहो ! प्राणी को जीवित रहने की कितनी प्रवल इच्छा होती है इसी वजह से तो आप भीम का दिया हुआ टुकड़ा खाकर कुत्ते का सा जीवन बिता रहे हो। जिनको आपने आग में जलाने की चेष्टा की,विष देकर मार डालना चाहा, भरी सभा में जिनकी विवाहिता पत्नी को अपमानित किया,जिनकी भूमि और धन छीन लिये,उन्हीं के अन्न से पले हुए प्राणों को रखने में क्या इज्जत रह गई आपकी! आपके अज्ञान की हद हो गई कि अब भी आप जीना चाहते हो परन्तु आपके चाहने से क्या होता है पुराने वस्त्र की तरह बुढ़ापे से गला हुआ आपका यह शरीर आपके न चाहने पर भी स्वत:क्षीण हो ही जायेगा।-श्रीमद्भागवत प्रथम् स्कंध १३ वां अध्याय ”
इसी तरह आज हम देख रहे हैं कि जो लोग कल तक एक मुख्य मंत्री की तारीफ करते थे, अब वही उसके सता से हटने के बाद उसके संबंध में कैसी-कैसी टिप्पणी कर रहे हैं, यह सोशल मीडिया में सभी लोग देख रहे होंगे। -GPB
