लोकायुक्त नियुक्ति में 13 साल की देरी पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा

देहरादून, 15 मई। उत्तराखंड कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री गरिमा मेहरा दसौनी ने राज्य में वर्ष 2013 से लोकायुक्त पद रिक्त रहने को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकार की नीयत तब उजागर हो जाती है, जब वह 13 वर्षों तक लोकायुक्त जैसी स्वतंत्र जांच संस्था की नियुक्ति नहीं कर पाती।
गरिमा दसौनी ने कहा कि राज्य सरकार को इस मामले में बार-बार उच्च न्यायालय की फटकार का सामना करना पड़ रहा है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन भी न्यायालय के दबाव के बिना नहीं कर पा रही है। उनका कहना था कि यदि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ गंभीर होती तो लोकायुक्त की नियुक्ति वर्षों पहले हो चुकी होती।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से एक सशक्त और स्वतंत्र लोकायुक्त की समर्थक रही है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने भी लोकायुक्त संस्था को मजबूत करने की दिशा में गंभीर पहल की थी। उन्होंने दावा किया कि उस दौरान लोकायुक्त गठन की फाइल दो बार राजभवन भेजी गई, लेकिन विभिन्न कारणों से मामला आगे नहीं बढ़ सका।
गरिमा दसौनी ने कहा कि राज्य में भर्ती घोटाले, भूमि घोटाले और खनन अनियमितताओं जैसे कई मामले सामने आए हैं। यदि एक स्वतंत्र लोकायुक्त सक्रिय होता तो इन मामलों की निष्पक्ष जांच संभव हो सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकायुक्त संस्था के नाम पर हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जबकि नियुक्ति अब तक लंबित है।
उन्होंने राज्य सरकार से शीघ्र लोकायुक्त की नियुक्ति करने, संस्था को पूर्ण स्वतंत्रता देने और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग की।
