न्यूयॉर्क की कला दीर्घा में प्रदर्शित किए गए जेफ्री एप्स्टीन मामले के लाखों दस्तावेज
Documents related to Jeffrey Epstein, taking up more than 3,400 volumes and weighing over eight tons, have been printed and bound for display in a TriBeCa gallery.

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-जेसी मैककिन्ले की रिपोर्ट-
अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के ट्राइबेका इलाके में इन दिनों एक अनोखी प्रदर्शनी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। सामान्य-सी दिखने वाली एक कला दीर्घा में कुख्यात यौन अपराधी जेफ्री एप्स्टीन से जुड़े लाखों जांच दस्तावेजों को प्रदर्शित किया गया है। इन दस्तावेजों को मुद्रित कर 3,437 मोटे खंडों में बांधा गया है, जिनका कुल वजन आठ टन से अधिक बताया गया है।
यह प्रदर्शनी “डोनाल्ड जे. ट्रंप एंड जेफ्री एप्स्टीन मेमोरियल रीडिंग रूम” नाम से आयोजित की गई है। आयोजकों का कहना है कि नाम जानबूझकर उत्तेजक रखा गया है ताकि लोगों का ध्यान इस मामले की गंभीरता की ओर जाए। यह दीर्घा उस स्थान से कुछ ही दूरी पर स्थित है जहां वर्ष 2019 में मुकदमे की प्रतीक्षा कर रहे एप्स्टीन का शव जेल की कोठरी में मिला था।
प्रदर्शनी के समर्थकों में शामिल डेविड गैरेट के अनुसार अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जनवरी में जारी लगभग 35 लाख दस्तावेज, तस्वीरें और वीडियो इंटरनेट पर उपलब्ध तो हैं, लेकिन डिजिटल माध्यम में उनकी गंभीरता खो जाती है। गैरेट का कहना है कि मोबाइल स्क्रीन पर मनोरंजन, समाचार और अपराध संबंधी सामग्री एक साथ दिखाई देने से लोगों की संवेदनशीलता कम हो जाती है। उनका उद्देश्य इन दस्तावेजों को भौतिक रूप में प्रस्तुत कर लोगों को यह एहसास कराना है कि मामला कितना विशाल और भयावह था।

डेविड गैरेट मिशिगन के उद्यमी हैं और उन्होंने “इंस्टीट्यूट फॉर प्राइमरी फैक्ट्स” नामक एक गैर-लाभकारी संस्था बनाई है। यह संस्था “द ट्रंपसोनियन” शीर्षक से व्यंग्यात्मक कला परियोजनाएं भी चला रही है। ट्राइबेका की यह प्रदर्शनी भी उसी श्रृंखला का हिस्सा है। इससे पहले वॉशिंगटन में डोनाल्ड ट्रंप और एप्स्टीन की मूर्तियां भी लगाई गई थीं, जिनमें दोनों को हाथ पकड़कर तथा फिल्म “टाइटैनिक” की प्रसिद्ध मुद्रा में दिखाया गया था।
अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी दस्तावेजों में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम हजारों बार आने की बात कही गई है, हालांकि ट्रंप ने किसी भी गलत कार्य से इनकार किया है। एप्स्टीन पर आरोप था कि उसने प्रभावशाली और धनाढ्य लोगों से संबंधों का उपयोग करते हुए सैकड़ों युवतियों और नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण और तस्करी की।
प्रदर्शनी में प्रवेश निःशुल्क रखा गया है, लेकिन सीमित संख्या में ही लोगों को अंदर जाने दिया जा रहा है। हर घंटे केवल कुछ दर्जन आगंतुकों को ऑनलाइन आरक्षण के आधार पर अनुमति मिलती है। सुरक्षा के लिए भीतर और बाहर सुरक्षाकर्मी भी तैनात हैं। आयोजकों के अनुसार उपलब्ध लगभग 5,000 स्लॉट में से 90 प्रतिशत से अधिक पहले ही बुक हो चुके हैं।

दीर्घा में रखे गए दस्तावेज लंबे पुस्तकमंचों पर मखमली रस्सियों के पीछे सजाए गए हैं। सामान्य दर्शकों को इन खंडों को खोलकर पढ़ने की अनुमति नहीं है। आयोजकों का कहना है कि ऐसा संभावित पीड़ितों की निजता की रक्षा के लिए किया गया है। हालांकि पीड़ित महिलाओं, पत्रकारों, सांसदों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारियों को विशेष अनुमति के तहत दस्तावेज देखने दिया जा रहा है।
प्रदर्शनी का एक हिस्सा विशेष रूप से पीड़ित महिलाओं को समर्पित है, जहां सैकड़ों कृत्रिम मोमबत्तियां जलती दिखाई देती हैं। नीचे के हिस्से में एक बोर्ड लगाया गया है, जिस पर आगंतुक अपनी प्रतिक्रियाएं लिख रहे हैं। कई टिप्पणियों में न्याय व्यवस्था के प्रति नाराजगी और निराशा दिखाई देती है। एक संदेश में लिखा गया है, “हम सभी को अधिक आक्रोशित होना चाहिए।” दूसरे में सवाल पूछा गया है, “न्याय कहां है?”
ब्रुकलिन की एक शिक्षिका जॉना जैबेल ने कहा कि इतने विशाल दस्तावेजों को एक ही स्थान पर देखकर उन्हें एहसास हुआ कि वर्षों तक सबूत मौजूद होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। वहीं तमारा पीटरसन नामक महिला ने कहा कि बहुत-सी महिलाओं ने आवाज उठाई, लेकिन किसी ने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया।

एप्स्टीन की कथित पीड़िता डेनिएल बेंस्की ने भी प्रदर्शनी का दौरा किया। उनका कहना था कि उन्हें आशंका थी कि यह अनुभव मानसिक रूप से पीड़ादायक होगा, लेकिन आयोजकों ने पीड़ितों की गरिमा और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा है। उनके अनुसार प्रदर्शनी का मुख्य संदेश यह है कि इतने बड़े पैमाने पर मौजूद सामग्री अब भी गहन जांच की मांग करती है।
आयोजकों का कहना है कि वे भविष्य में इस प्रदर्शनी को वॉशिंगटन सहित अन्य शहरों में भी ले जाना चाहते हैं। डेविड गैरेट ने कहा कि एक पिता होने के नाते उनका मानना है कि यदि शुरुआती अपराधों पर जवाबदेही तय की जाती, तो इतने अधिक पीड़ित सामने नहीं आते। उन्होंने कहा कि जवाबदेही की कमी ही ऐसे अपराधों को बार-बार जन्म देती है।
