नाटक समीक्षा : अपनी ही जिंदगी से दुबारा मुलाक़ात (A Life lived was Revisited)

-गोविंद प्रसाद बहुगुणा-
ऐतिहासिक चरित्रों के जीवन पर आधारित नाट्य प्रस्तुतियां तो हमने अनेक देखे होंगे लेकिन ऐसा नाटक पहली बार देखा जब दर्शक ही उस नाटक के वास्तविक पात्र रहे हों जिन्होंने वह जिंदगी जी है -यह प्रयोग पहली बार मेघदूत नाट्य संस्था के संस्थापक सुविख्यात रंगकर्मी अभिनेता फिल्म निर्देशक एवं निर्माता, उत्तराखंड गौरव श्री एस०पी० ममगाई जी द्वारा प्रणीत नाटक “चन्द्रप्रभा का अटूट संल्प” जो कल शाम मैंने नगर निगम , देहरादून के प्रेक्षागृह में देखा -इस नाटक को देखने की उत्सुकता उन सभी में थी जो नाटक के केंद्रीय चरित्र से परिचित ही नहीं बल्कि पारिवारिक सदस्यों की तरह थे, उनमें एक मैं भी था। -पूरा सभागार कल दर्शकों से खचाखच भरा हुआ था जिसमें नगर के साहित्यकार, रंगकर्मी पत्रकार और समीक्षक उपस्थित थे ।

इस नाटक की कहानी मुझे लगभग 15 वर्ष पूर्व की स्मृतियों में ले गई जब मैं अपनी मां और बहिन अमिता के साथ मैसूर आर्ट गैलरी देखने गया था। वहां मैने महाराष्ट्र के एक महान तैल चित्रकार सांवलराम हलधंकर द्वारा निर्मित एक युवती की एक जीवंत पेंटिंग देखी जिसका नाम Glow of Hope था -वह महिला अपने हाथ में एक दिया लेकर अंधेरे कमरे को दीपक की लौ से प्रकाशित कर रही थी वह महिला कोई और नहीं थी बल्कि उस महान चित्रकार की तीसरी बेटी गीता हल धंकर थी। उसी तरह इस नाटक “चन्द्रप्रभा का अटूट संकल्प” की वास्तविक नायिका बहन अमिता भी मेरे लिए Glow of Hope रही है —

नाटककार श्री SP ममगाईं जी का यह अभिनव प्रयोग बहुत सफल रहा। आधुनिक तकनीक के साथ मंच का संयोजन अद्भुत था और उसी तरह नाटक के सभी पात्रों का अभिनय बहुत स्वाभाविक और genuine लगा, बिलकुल नहीं महसूस हुआ कि हम नाटक देख रहे हैं ,लग रहा था कि हम विगत को वर्तमान की तरह जी रहे हैं -अस्तु सभी पात्र इस सफल और जीवंत अभिनय के लिए बधाई और प्रशंसा के पात्र हैं I इस अवसर पर देहरादून के सभी नामी रंगकर्मी उपस्थित थे जो ममगाईं जी द्वारा निर्देशित नाटकों में स्वयं भी किरदार की भूमिका में रहे है
-अनुपमा ममगाई ने चंद्र प्रभा की भूमिका में शानदार भूमिका निभाई इसी तरह मंच सज्जा और फ्लस्बैक प्रबंधन भी उच्च स्तरीय था -…GPB
