धर्म/संस्कृति/ चारधाम यात्रा

एक दिन में ढाई सौ श्रद्धालु ही कर सकेंगे रुद्रनाथ की यात्रा

 

-महिपाल गुसाईं-

गोपेश्वर, 21 मई। चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ के कपाट खुलने के साथ ही पहले दिन श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा, नतीजतन अव्यवस्थाओं से लोगों को जूझना पड़ गया। यात्रा शुरू होने के बावजूद अभी तक पूरी तरह टेंट आदि की व्यवस्था भी नहीं हो पाई, इस कारण उच्च हिमालयी क्षेत्र में पहुंचे लोगों को भारी असुविधाओं का सामना करना पड़ा। धाम में तो बहुत ज्यादा समस्याएं हुई। संरक्षित वन क्षेत्र होने के कारण रुद्रनाथ में बहुत ज्यादा अवस्थापना सुविधाएं भी नहीं हैं। मंदिर समिति के पास भी सीमित सुविधाएं ही उपलब्ध हैं।

Range officer B S Negi

इस बीच गोपेश्वर रेंज के रेंज अधिकारी बी एस नेगी की ओर से एक एडवाइजरी जारी कर स्थिति स्पष्ट की गई है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि एक दिन में ढाई सौ से अधिक लोगों को रुद्रनाथ जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी और उसके लिए भी प्रत्येक श्रद्धालु को अपना स्वास्थ्य परीक्षण करवाने के साथ ही प्रवेश शुल्क अदा करना होगा।
रेंज अधिकारी की ओर से कहा गया गया है कि रुद्रनाथ यात्रा मार्ग उच्च हिमालयी क्षेत्र में केदारनाथ वन्य जीव अभ्यारण्य के संरक्षित और अति दुर्गम वन क्षेत्र से गुजरता है। इस कारण यात्रा मार्ग में रुकने की सीमित सुविधाएं उपलब्ध हैं। रात्रि विश्राम की यह सुविधा भी ईको विकास समितियों के द्वारा उपलब्ध कराई जाती है जबकि रुद्रनाथ धाम में भी मंदिर समिति के संसाधन बेहद सीमित हैं, इसलिए धाम की धारणीय क्षमता बेहद सीमित होने से वहां एक दिन में ढाई सौ लोगों के प्रवेश का प्रावधान किया गया है। खास बात यह कि दोपहर दो बजे बाद रुद्रनाथ यात्रा के लिए प्रस्थान की भी मनाही है। वन विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि उच्च हिमालयी क्षेत्र में होने वाले मौसमी परिवर्तनों और ऑक्सीजन की कमी के चलते यात्रियों को स्वास्थ्य परीक्षण के बाद ही यात्रा करने की एडवाइजरी जारी की गई है।
वैसे भी रुद्रनाथ धाम दुर्लभतम धामों में से एक है, यह एकमात्र पौराणिक महत्व का मंदिर है, जहां भगवान शिव के एकानन स्वरूप के दर्शन होते हैं, जबकि अन्य सभी शिव धामों में लिंग के स्वरूप के दर्शन होते हैं।
समुद्रतल से करीब साढ़े ग्यारह हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित इस धाम में मंदिर समिति और ईको विकास समिति के पास बहुत सीमित सुविधाएं हैं। श्रद्धालुओं को असुविधा से बचाने के लिए ही यह एडवाइजरी जारी की गई है। खास बात यह है कि इस बार रुद्रनाथ धाम के दर्शन के लिए इस बार श्रद्धालुओं में ज्यादा उत्साह देखा जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले एक सप्ताह के भीतर अधिकृत ईको विकास समितियों द्वारा अधिकतम निर्धारित संख्या में यात्रियों के ठहराव की व्यवस्था सुनिश्चित हो जाएगी।

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