जंगल की आग में झुलसने से फायर वाचर और महिला की दर्दनाक मौत

चमोली और टिहरी की घटनाओं से वन विभाग में शोक, आग बुझाने के दौरान गई दो जानें
गोपेश्वर/कीर्तिनगर, 22 मई। उत्तराखंड में जंगलों में धधक रही आग अब जानलेवा साबित होने लगी है। चमोली और टिहरी जिले में जंगल की आग बुझाने के प्रयास के दौरान एक फायर वाचर और एक महिला की दर्दनाक मौत हो गई। दोनों घटनाओं के बाद वन विभाग तथा स्थानीय लोगों में शोक की लहर है।
चमोली जिले के बदरीनाथ वन प्रभाग के अंतर्गत कुंड क्षेत्र के जंगलों में लगी आग को नियंत्रित करने के दौरान 42 वर्षीय फायर वाचर गजेंद्र सिंह नेगी की मौत हो गई। बताया गया कि वनाग्नि की सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची थी। आग तेजी से फैल रही थी और वनकर्मी उसे आबादी तथा वन संपदा तक पहुंचने से रोकने में जुटे थे।
वन विभाग के अनुसार गजेंद्र सिंह नेगी भी टीम के साथ आग बुझाने के अभियान में शामिल थे। देर शाम तक जब वह वापस नहीं लौटे तो उनकी तलाश शुरू की गई। एसडीआरएफ और वन विभाग की संयुक्त टीम ने रातभर खोजबीन की। अगले दिन उनका मोबाइल फोन जंगल में मिला, जिसके बाद तलाशी अभियान और तेज किया गया। अंततः उनका शव गहरी खाई में झुलसी अवस्था में बरामद हुआ। आशंका जताई जा रही है कि आग और धुएं से घिरने के कारण वह संतुलन खोकर खाई में गिर गए होंगे। मामले की जांच की जा रही है।
वन विभाग ने मृतक के परिवार को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि फायर वाचर संविदा और दैनिक वेतन पर बेहद जोखिम भरे हालात में कार्य करते हैं।
उधर, टिहरी जिले के कीर्तिनगर क्षेत्र के पिपोला गांव में 50 वर्षीय महिला अंबू देवी की जंगल की आग में झुलसने से मौत हो गई। जानकारी के अनुसार महिला खेतों की ओर गई थीं। इसी दौरान समीप के जंगल में लगी आग तेजी से फैलने लगी और खेतों तक पहुंच गई। महिला आग की चपेट में आ गई और गंभीर रूप से झुलस गईं। ग्रामीणों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
घटना की सूचना मिलने पर प्रशासन और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने बताया कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसकी जांच की जा रही है।
इस बीच वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस सीजन में अब तक राज्य में वनाग्नि की 309 घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। इन घटनाओं में सैकड़ों हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। सर्वाधिक घटनाएं गढ़वाल मंडल में सामने आई हैं। लगातार बढ़ती गर्मी, सूखी वनस्पति और मानव लापरवाही को जंगल की आग का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
वन विभाग ने लोगों से जंगलों में आग न लगाने, बीड़ी-सिगरेट अथवा जलती वस्तुएं न फेंकने तथा किसी भी आग की सूचना तुरंत विभाग को देने की अपील की है।
