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सुपरनोवा SN 2023ZCU: ब्रह्मांड की दूरी मापने में नई मदद

Supernovae (SNe) are one of the most violent explosions in the universe. Core-collapse supernovae (CCSNe) are one of these cosmic fireworks occurring when a massive star exhausts its nuclear fuel and can no longer support itself against the gravitational pull. This dramatic death can be so bright that it is visible in a distant galaxy. Supernovae are not just very bright, they are vital to the evolution of the cosmos because they act as giant recycling centers, creating and scattering heavy elements that eventually become the building blocks for new stars, planets, and even life itself.

चित्र I : मेजबान आकाशगंगा में एसएन 2023जेडसीयू की स्थिति को दर्शाया गया है, साथ ही अन्य दो एसएन 1995एडी और 2022क्यूएचवाई को भी दर्शाया गया है, जो पहले उसी आकाशगंगा में विस्फोटित हुए थे।

 

Edited by- Jyoti Rawat

पृथ्वी से लगभग 90.7 मिलियन प्रकाश-वर्ष दूर स्थित सर्पिल आकाशगंगा NGC 2139 के किनारे पर दिसंबर 2023 में खोजा गया सुपरनोवा SN 2023ZCU ब्रह्मांड की दूरी मापने के अध्ययन में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

सुपरनोवा क्या हैं? सुपरनोवा ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली और चमकीले विस्फोटों में से एक हैं। कोर-कोलैप्स सुपरनोवा तब होता है जब कोई विशाल तारा अपना पूरा परमाणु ईंधन ख़त्म कर देता है। इसके बाद गुरुत्वाकर्षण की भारी खिंचाव के आगे तारा खुद को संभाल नहीं पाता और ढह जाता है। यह विस्फोट इतना तेज़ और चमकीला होता है कि दूर की आकाशगंगाओं में भी आसानी से देखा जा सकता है। सुपरनोवा न सिर्फ़ चमकते हैं, बल्कि ब्रह्मांड के विकास में भी अहम भूमिका निभाते हैं। ये भारी तत्वों का निर्माण और वितरण करते हैं, जो बाद में नए तारे, ग्रह और यहां तक कि जीवन बनाने में काम आते हैं।

टाइप IIP सुपरनोवा का विकास सबसे आम कोर-कोलैप्स सुपरनोवा टाइप IIP है। यह तब होता है जब सूर्य से 8-17 गुना भारी लाल सुपरजायंट तारा अपना जीवन समाप्त करता है। तारे का कोर सिकुड़कर प्रोटो-न्यूट्रॉन स्टार बन जाता है। बाहरी परतें अंदर की ओर गिरती हैं और फिर उछलकर शॉक वेव पैदा करती हैं। यह शॉक वेव तारे की सतह तक पहुंचकर बाहरी परतों को अंतरिक्ष में फेंक देती है। विस्फोट के तुरंत बाद सुपरनोवा सबसे चमकीला हो जाता है।

इसके बाद शॉक कूलिंग का चरण शुरू होता है, जिसमें फैलती परतें ठंडी होती जाती हैं। कुछ महीनों तक सुपरनोवा अपारदर्शी बना रहता है। इस दौरान इसकी चमक मुख्य रूप से हाइड्रोजन के पुनर्संयोजन से आती है। लाल सुपरजायंट तारों में हाइड्रोजन की मोटी परत होने के कारण चमक लंबे समय तक लगभग स्थिर रहती है, जिसे प्लेटो (plateau) चरण कहते हैं। स्पेक्ट्रोस्कोपिक अध्ययन में हाइड्रोजन की प्रबल एच-अल्फा लाइनें स्पष्ट दिखाई देती हैं।

SN 2023ZCU की खोज और अध्ययन 8 दिसंबर 2023 को NGC 2139 आकाशगंगा (दूरी लगभग 27.8 मिलियन पारसेक) में SN 2023ZCU की खोज की गई। विस्फोट के महज एक दिन के अंदर इसकी खोज हो गई थी। भारतीय खगोलविदों समेत अंतरराष्ट्रीय टीम ने ज़मीन और अंतरिक्ष दोनों तरह की दूरबीनों से इसके फोटोमेट्रिक और स्पेक्ट्रोस्कोपिक अध्ययन किए। आर्यभट्ट अनुसंधान विज्ञान संस्थान (ARIES), नैनीताल की टीम (मोनालिसा दुबे, डॉ. कुंतल मिश्रा और नवीन दुकिया) ने अन्य वैज्ञानिकों के साथ मिलकर यह विस्तृत शोध ‘The Astrophysical Journal’ में प्रकाशित किया है।

चित्र 2 : एक्सपैंडिंग फोटोस्फेरिक मेथड (ईपीएम) का उपयोग करके एसएन की दूरी का मापन (बायां पैनल)। जनक के गुणों का अनुमान लगाने के लिए एसएन के बोलोमेट्रिक प्रकाश वक्र पर अर्ध-विश्लेषणात्मक मॉडलिंग की गई। (दायां पैनल)

दूरी मापने की विधि वैज्ञानिकों ने Expanding Photospheric Method (EPM) का इस्तेमाल करके सुपरनोवा की दूरी लगभग 27 मिलियन पारसेक बताई है। इस विधि में सुपरनोवा की फैलती हुई सतह के वास्तविक आकार की तुलना उसकी देखी गई चमक से की जाती है। टाइप IIP सुपरनोवा के लिए यह विधि बहुत प्रभावी है क्योंकि इनकी हाइड्रोजन परत एक साफ़, स्थिर और ब्लैकबॉडी जैसी सतह बनाती है। इससे दूरी का सटीक अनुमान लगाना आसान हो जाता है।

स्पेक्ट्रा और रासायनिक संरचना प्रारंभिक स्पेक्ट्रा में सुपरनोवा पदार्थ और आसपास की गैस के बीच बहुत कम अंतर्क्रिया दिखी, जिससे पता चलता है कि विस्फोट से पहले तारे ने ज्यादा द्रव्यमान नहीं खोया था। प्लेटो चरण के दौरान स्पेक्ट्रा में हाइड्रोजन की मजबूत लाइनें दिखीं, साथ ही लोहा, सोडियम और कैल्शियम जैसी लाइनें भी। बाद की निहारिका (nebular) अवस्था में सुपरनोवा पारदर्शी हो जाता है और मुख्य रूप से उत्सर्जन रेखाएं दिखाई देती हैं। ऑक्सीजन, लोहा, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसी तत्वों की “निषिद्ध” रेखाएं भी देखी गईं।

मूल तारे के गुण बोलोमेट्रिक ल्यूमिनोसिटी (सभी तरंगदैर्ध्यों में कुल ऊर्जा) के मॉडल से वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया कि मूल तारा का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान का लगभग 12 गुना था और विस्फोट की ऊर्जा लगभग 2 × 10⁵¹ एर्ग थी। ये मान लाल सुपरजायंट तारों के विस्फोटों के लिए सामान्य माने जाते हैं।

अध्ययन का महत्व SN 2023ZCU का शुरुआत से लेकर निहारिका अवस्था तक लगातार अध्ययन करने से हमें कोर-कोलैप्स सुपरनोवा के विकास के बारे में गहरी समझ मिली है। यह शोध ब्रह्मांड की दूरी मापने की सटीकता बढ़ाने और तारों के अंतिम चरण को समझने में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

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