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पोखरी में रामलीला :राम-भरत मिलाप की भावुक प्रस्तुति ने दर्शकों को किया भाव-विभोर

 

पोखरी, 20 जून (राणा)। नगर पंचायत क्षेत्र के पोखरी बाजार में रामलीला समिति के तत्वावधान में आयोजित दस दिवसीय पारंपरिक रामलीला इन दिनों श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक उल्लास का केंद्र बनी हुई है। रामलीला के पांचवें दिन राम-भरत मिलाप की मार्मिक लीला का सजीव मंचन किया गया, जिसने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। राम और भरत के मिलन के करुण दृश्य को देखकर पंडाल में उपस्थित अनेक दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
लीला का आरंभ कैकयी द्वारा राजा दशरथ से दो वरदान मांगने के प्रसंग से हुआ। मंचन में दिखाया गया कि कैकयी ने भरत के लिए अयोध्या का राजसिंहासन तथा भगवान राम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगा। पिता के वचनों की मर्यादा का पालन करते हुए भगवान राम माता सीता और अनुज लक्ष्मण के साथ वन को प्रस्थान कर जाते हैं। राम के वियोग में व्यथित राजा दशरथ अंततः प्राण त्याग देते हैं और अयोध्या शोक में डूब जाती है।


अगले दृश्य में ननिहाल से लौटे भरत और शत्रुघ्न को पूरी घटना का पता चलता है। पिता के निधन और राम के वनवास का समाचार सुनकर भरत अत्यंत दुखी हो जाते हैं। पिता का अंतिम संस्कार करने के बाद भरत, गुरु वशिष्ठ, शत्रुघ्न तथा अयोध्यावासियों के साथ भगवान राम को वापस लाने के लिए वन की ओर प्रस्थान करते हैं।
वन में राम और भरत के मिलन का दृश्य अत्यंत हृदयस्पर्शी रहा। भरत ने भगवान राम से अयोध्या लौटकर राजगद्दी संभालने का आग्रह किया, लेकिन भगवान राम ने पिता के वचनों और धर्म पालन को सर्वोपरि बताते हुए वनवास पूरा करने की बात कही। अंततः भरत भगवान राम की चरण पादुकाएं लेकर अयोध्या लौटते हैं और उन्हें राजसिंहासन पर स्थापित कर स्वयं सेवक के रूप में चौदह वर्षों तक राज्य संचालन का संकल्प लेते हैं। इस प्रभावशाली मंचन पर दर्शकों ने कलाकारों की जमकर सराहना की।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि नगर पंचायत अध्यक्ष सोहन लाल तथा विशिष्ट अतिथि महिला मंगल दल चोपड़ा की अध्यक्ष माहेश्वरी देवी ने कहा कि रामलीला जैसे आयोजन भारतीय संस्कृति, आदर्शों और नैतिक मूल्यों के संरक्षण के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि रामायण के पात्र आज भी समाज को सत्य, त्याग, मर्यादा और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश देते हैं तथा ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
रामलीला में परशुराम पंत ने गुरु वशिष्ठ, जयदीप चौधरी ने राजा दशरथ, राजेश चौधरी ने कैकयी, दीपक चौधरी ने कौशल्या, अनुज चौधरी ने सुमित्रा, यशवंत चौधरी ने मंथरा, प्रवेश चौधरी ने भगवान राम, अनुराग विष्ट ने भरत, अंशुल चौधरी ने लक्ष्मण, स्वतंत्र चौधरी ने शत्रुघ्न, मयंक चौधरी ने सीता तथा कुलदीप चौधरी ने राजा जनक की भूमिका का प्रभावी निर्वहन किया।
रामलीला समिति के सचिव संतोष चौधरी एवं संरक्षक कुंवर सिंह चौधरी ने बताया कि इस वर्ष रामलीला का आयोजन पारंपरिक एवं भव्य स्वरूप में किया जा रहा है। गर्मी की छुट्टियों के कारण बड़ी संख्या में प्रवासी, नौकरीपेशा लोग, छात्र-छात्राएं तथा रिश्तेदार गांवों में पहुंचे हुए हैं, जिससे आयोजन को लेकर विशेष उत्साह बना हुआ है। उन्होंने कहा कि रामलीला धार्मिक आयोजन के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी है।
समिति ने क्षेत्रवासियों से आगामी दिनों में भी अधिक से अधिक संख्या में रामलीला स्थल पहुंचकर आयोजन का आनंद लेने तथा इसके सफल संचालन में सहयोग देने की अपील की।
इस अवसर पर ओम प्रकाश चौधरी, महिधर पंत, मंदोदरी पंत, मधुसूदन चौधरी, सत्यप्रकाश पंत, कुलदीप चौधरी, दीपक चौधरी, जय चौधरी, भूपेंद्र नेगी सहित समिति के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित थे।

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