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भूमि घोटालों और आवंटनों की उच्चस्तरीय जांच हो: गणेश गोदियाल

देहरादून, 22 जून। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने राज्य में पिछले दस वर्षों के दौरान हुए भूमि आवंटनों, सरकारी भूमि के हस्तांतरण, भूमि उपयोग परिवर्तन तथा कथित भूमि घोटालों की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि सीमित भौगोलिक संसाधनों वाले पर्वतीय राज्य उत्तराखंड में भूमि और प्राकृतिक संपदा की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान गोदियाल ने कहा कि हाल के वर्षों में भूमि से जुड़े कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिन्होंने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली और सरकारी संसाधनों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने हरिद्वार नगर निगम की भूमि खरीद से जुड़े मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होने और अधिकारियों पर कार्रवाई से यह स्पष्ट हो गया है कि भूमि मामलों में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता है.


गोदियाल ने आरोप लगाया कि राज्य के विभिन्न जनपदों में बहुमूल्य सरकारी और सार्वजनिक भूमि के नियमों के विपरीत हस्तांतरण तथा निजी हितों के लिए उपयोग के कई मामले सामने आए हैं। उन्होंने मसूरी के जॉर्ज एवरेस्ट क्षेत्र की भूमि, डाकपत्थर में जल विद्युत निगम की लगभग 180 एकड़ भूमि के हस्तांतरण तथा नैनीताल जिले के रामगढ़ क्षेत्र में सरकारी भूमि को निजी हाथों में सौंपे जाने के आरोपों का उल्लेख करते हुए इन मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग की।
उन्होंने उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) द्वारा विकसित किए जा रहे “लैंड बैंक” को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि राजस्व, पर्यटन, कृषि, उद्यान, सिडकुल और ऊर्जा निगमों की भूमि को एकत्रित कर भविष्य में निजी हितों के लिए उपयोग किए जाने की आशंकाओं से जनता चिंतित है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षों से स्थानीय समुदायों द्वारा उपयोग की जा रही चरागाह और सामुदायिक भूमि भी संकट में है। प्रतापनगर सहित टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग और नैनीताल जैसे जिलों में ग्रामीण अपनी पारंपरिक एवं पंचायती भूमि को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
कांग्रेस ने मांग की है कि पिछले दस वर्षों के सभी प्रमुख भूमि आवंटनों, खरीद-फरोख्त, हस्तांतरण और भूमि उपयोग परिवर्तन की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही विभिन्न विभागों की भूमि के हस्तांतरण की समीक्षा के लिए स्वतंत्र जांच आयोग गठित किया जाए तथा सरकारी भूमि पर हुए अवैध कब्जों और संदिग्ध हस्तांतरणों की पहचान कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
गोदियाल ने कहा कि यदि समय रहते इन मामलों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो राज्य को भूमि संकट, पर्यावरणीय असंतुलन और सामाजिक असंतोष जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि शीघ्र ही कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिलकर इस विषय में हस्तक्षेप की मांग करेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस उत्तराखंड की जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी।
इस अवसर पर कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता, विधायक, पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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