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दुनियां की सबसे पुरानी चिट्ठियों के लिए एक्स- रे चश्मे

इतिहासकारों, वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की एक टीम ने मिट्टी के लिफ़ाफ़ों में बंद 4,000 साल पुराने पत्रों का अध्ययन करने के लिए एक पोर्टेबल एक्स-रे स्कैनर विकसित किया है।

-कैथरीन कॉर्नेई की रिपोर्ट –

हथौड़े से तोड़ने का दौर अब बीत चुका है। प्राचीन पत्रों को पढ़ने के लिए शोधकर्ताओं ने अब आधुनिक एक्स-रे तकनीक का सहारा लिया है।

इतिहासकारों, वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की एक टीम ने एक पोर्टेबल एक्स-रे स्कैनर विकसित किया है, जिसकी मदद से लगभग 4,000 वर्ष पुराने उन पत्रों को पढ़ा जा सकता है जो मिट्टी के लिफाफों में बंद हैं, और इसके लिए उन्हें नुकसान पहुँचाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

दुनिया की सबसे पुरानी लिपि: क्यूनीफॉर्म

क्यूनीफॉर्म (Cuneiform) दुनिया की सबसे प्राचीन लिखित लिपि मानी जाती है। इसकी पहचान मिट्टी पर बने कीलनुमा (wedge-shaped) निशानों से होती है। इस लिपि में लिखे गए लाखों अवशेष इराक, सीरिया और तुर्की जैसे देशों में मिले हैं।

अब तक लगभग 5 लाख से अधिक क्यूनीफॉर्म कलाकृतियाँ खोजी जा चुकी हैं। लेकिन इनमें से कई का अध्ययन नहीं हो पाया, क्योंकि वे एक या अधिक मिट्टी की परतों में लिपटी हुई हैं। ये परतें प्राचीन मेसोपोटामिया सभ्यता के “लिफाफे” का काम करती थीं।

पहले इन लिफाफों को खोलने के लिए उन्हें तोड़ना पड़ता था, जिससे मूल वस्तु को नुकसान पहुँचता था। अब नया एक्स-रे स्कैनर मिट्टी की परतों को डिजिटल रूप से हटाकर अंदर लिखा पाठ सामने ला सकता है।

यह तकनीक कैसे काम करती है?

फ्रांस की शोधकर्ता सेसिल मिशेल और जर्मनी के एक्स-रे भौतिक विज्ञानी क्रिश्चियन श्रोअर ने मिलकर इस उपकरण का विकास किया।

यह तकनीक एक्स-रे कंप्यूटेड टोमोग्राफी (CT) पर आधारित है। इसमें किसी वस्तु पर विभिन्न कोणों से एक्स-रे डाली जाती हैं और यह देखा जाता है कि वे कितनी मात्रा में अवशोषित होती हैं। बाद में कंप्यूटर इन सभी चित्रों को जोड़कर वस्तु की त्रि-आयामी (3D) संरचना तैयार करता है।

इस पोर्टेबल स्कैनर को विकसित करने में टीम को चार वर्ष लगे। यह उपकरण मात्र 15 मिनट से भी कम समय में 1,400 से अधिक चित्र ले सकता है। इसके बाद विशेष सॉफ्टवेयर इन चित्रों का विश्लेषण करके अंदर मौजूद लेखन का 3D दृश्य तैयार करता है।

लेखन शैली तक पहचान सकता है

यह तकनीक इतनी उन्नत है कि:

  • क्यूनीफॉर्म लिपि के अक्षरों को स्पष्ट रूप से पढ़ सकती है।

  • अलग-अलग लेखकों की हस्तलिपि में अंतर पहचान सकती है।

  • यह भी बता सकती है कि किसी लिफाफे को बनाने में मिट्टी की कितनी परतें इस्तेमाल हुई थीं।

संग्रहालयों के लिए बड़ी सुविधा

यह स्कैनर आठ हिस्सों में अलग किया जा सकता है, जिससे इसे आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सकता है।

हालाँकि बड़े एक्स-रे स्कैनर पहले से मौजूद हैं, लेकिन वे कई टन वज़नी होते हैं और उन्हें स्थानांतरित करना लगभग असंभव होता है। अधिकांश संग्रहालयों के पास ऐसे उपकरण नहीं होते।

सेसिल मिशेल के अनुसार, प्राचीन मिट्टी की ये पट्टिकाएँ इतनी मूल्यवान हैं कि संग्रहालय इन्हें कहीं भेजना नहीं चाहते। इसलिए तकनीक को वस्तुओं तक ले जाना ही सबसे व्यावहारिक समाधान है।

इतनी कीमती थीं कि प्रथम श्रेणी में यात्रा कराई गई

अमेरिका के पेनसिल्वेनिया विश्वविद्यालय संग्रहालय के संग्रह प्रबंधक फिलिप जोन्स बताते हैं कि एक बार उन्हें कुछ क्यूनीफॉर्म पट्टिकाओं को दूसरे संग्रहालय तक पहुँचाने की जिम्मेदारी दी गई थी।

वे उन पट्टिकाओं के साथ फर्स्ट क्लास में यात्रा कर रहे थे, जबकि वापसी में उन्हें यह सुविधा नहीं मिली।

मज़ाकिया अंदाज़ में उन्होंने कहा:

“वे पट्टिकाएँ मेरी तुलना में कहीं अधिक मूल्यवान थीं।”

प्राचीन समाज की नई झलक

अब तक शोधकर्ताओं ने फ्रांस, जर्मनी और तुर्की के कई संग्रहालयों में जाकर 100 से अधिक सीलबंद पट्टिकाओं का अध्ययन किया है।

इनमें मिले नए पाठों से 4,000 वर्ष पुराने समाज के बारे में रोचक जानकारी मिली है। उदाहरण के लिए:

  • एक व्यापारी को वस्त्रों की खेप मिलने का विवरण।

  • एक महिला द्वारा अपने अनुपस्थित पति की ओर से कर्ज़ चुकाने का प्रयास।

  • पुरुषों और महिलाओं के बीच सामाजिक तथा आर्थिक संबंधों की झलक।

एक महत्वपूर्ण उपलब्धि

विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक पुरातत्व और इतिहास के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है। अब प्राचीन दस्तावेज़ों को बिना नुकसान पहुँचाए पढ़ा जा सकेगा और मानव इतिहास के कई अनछुए अध्याय सामने आ सकेंगे।

जैसा कि फिलिप जोन्स कहते हैं:

“ऐसी तकनीक का विकसित होना जिसे सीधे संग्रहालयों तक ले जाया जा सके, वास्तव में एक क्रांतिकारी उपलब्धि है।”

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