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ज़मीन धोखाधड़ी ; नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश पर भी प्रशासन हरकत में नहीं आया !

19 करोड़ की जमीन धोखाधड़ी मामला, मसूरी रोप वे प्रोजेक्ट आने पर रजिस्ट्री कराने से मुकरा विक्रेता।

भूपत सिंह बिष्ट-
देहरादून, 24 जून । उत्तराखंड में नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश आने के बाद भी पुलिस अपनी एफआईआर को अंजाम तक नहीं पहुंचा पायी है।
विगत तीन जून को नैनीताल हाईकोर्ट से निर्णय पारित होने के बावजूद धोखाधड़ी के इस मामले में दर्ज एफआईआर पर थाना राजपुर पुलिस अभी तक हरकत में नहीं आई है। इसका खुलासा खुद क्रेता विक्रम राणा ने आज उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में किया।
विक्रम राणा ने पत्रकारों को बताया कि मामला पुरकुल में मसूरी रोड स्थित करोड़ों की भूमि विक्रय से जुड़ा है। यहाँ से मसूरी के लिए रोप वे परियोजना का कार्य गतिमान होने से ज़मीन के भाव में भारी उछाल आ गया है और विक्रेता पुराने तय सौदों से पीछे हट रहे है। इस तरह उत्तराखंड के युवा उद्यमी के साथ ठगी और शोषण का यह अनूठा मामला है।
युवा उद्यमी बिक्रम राणा ने पत्रकारों को बताया कि राजपुर पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद पुलिस प्रशासन और सरकार द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने पर वे बेहद हताश हैं। सीएम और पीएम पोर्टल पर न्याय की गुहार लगाने के बाद फिर से आर्थिक दबाव के चलते वे आत्मघात की बात करते हैं।
उल्लेखनीय है कि बिक्रम राणा उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व गढ़वाल सांसद और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत के सगे भांजे और युवा उद्यमी पर्यटन और भूमि व्यवसाय से जुड़े हैं।
नैनीताल हाईकोर्ट द्वारा स्पष्ट निर्णय के बावजूद पुलिस प्राथमिकी को अंजाम तक पहुंचाने की फिक्रमंद नहीं दिख रही और टालमटोल निरंतर जारी है।
विक्रम राणा के अनुसार राजकुमार यादव एवं अन्य के विरुद्ध देहरादून के राजपुर थाने में 14 सितम्बर 2025 को आईपीसी की धारा 120 बी, 420, 467, 468, 471 के तहत प्राथमिकी (एफआईआर) संख्या 181/2025 दर्ज कराई गई थी। मसूरी रोड स्थित पुरकुल गांव में जमीन की खरीद फरोख्त के इस मामले में राजकुमार यादव, हरीश यादव, राजीव वाड्रा, संजय सिंह, श्रीमती मेघा भारद्वाज, बिज्जू, विनोद कुमार और नीरजा सिंह प्रतिवादी बनाए गए थे। इन पर आरोप है कि 19 करोड़ 81 लाख अपने खाते में जमा कराने के बाद ये सभी बिक्रम राणा के पक्ष में जमीन का बैनामा नहीं करा रहे हैं।
प्रतिवादियों ने साईं इंफ्रा प्रोडक्ट्स प्रा. लि. की पुरकुल स्थित भूमि का विक्रय का सौदा बिक्रम राणा के साथ किया। प्रतिवादियों ने बिक्रम राणा से 19.81 करोड़ रुपए अपने खाते में ट्रांसफर करवाए और इसके बाद उनकी नीयत में खोट आ गया। धोखाधड़ी का यह मामला सुप्रीम कोर्ट और नैनीताल हाईकोर्ट में सुना जा चुका है।
राजपुर थाना देहरादून में एफआईआर दर्ज होने के बाद प्रतिवादियों ने अग्रिम जमानत ले ली, और प्राथमिकी निरस्त करवाने के लिए नैनीताल हाईकोर्ट में रिट अपील दायर की थी।
नैनीताल हाईकोर्ट ने लंबी सुनवाई और तथ्यों की पड़ताल के बाद अपील खारिज कर दी और वादियों पर दो लाख व पचास हजार का अर्थ दंड लगाकर अग्रिम जमानत निरस्त कर दी।
अब पुलिस को तुरंत हरकत में आकर अभियुक्तों की गिरफ्तारी, बैंक खातों व भूमि विक्रय पर अंकुश लगाना है।
प्रेस वार्ता में बिक्रम राणा ने बताया कि पुलिस अभियुक्तों को अनावश्यक और अवांछित छूट दे रही है, ताकि सब कुछ कोर्ट के बाहर सुलटाया जा सके।
बिक्रम राणा का मानना है कि नैनीताल हाईकोर्ट के निर्णय को पूरा एक पखवाड़ा बीत चुका है किंतु पुलिस कार्यवाही नहीं कर रही है तथा राज्य के बाहर के लोगों के साथ मिलकर रियायत बरती जा रही है, लेकिन अपने प्रदेश के लोगों के साथ बढ़ते ढगी के मामलों में कोई हमदर्दी का उदाहरण अथवा न्याय होता नहीं दिख रहा है।
दूसरे प्रदेशों से आकर अपराधी प्रवृत्ति के लोग उत्तराखंड में धड़ल्ले से गोरखधंधे कर रहे हैं, वे यहां के मूल निवासियों और युवाओं के साथ ठगी, धोखाधड़ी और छल कर रहे हैं, किंतु नैनीताल हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्णय के बावजूद पुलिस अपनी दर्ज प्राथमिकी पर कार्रवाई आगे नहीं बढ़ा पा रही है।

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