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होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बढ़ी, कतर में वार्ता पर टिकी नजरें

Reporting from Lond

अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए हवाई हमलों के बाद रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) में थमी जहाजों की आवाजाही एक बार फिर रफ्तार पकड़ने लगी है। युद्धविराम की घोषणा और आगामी 60 दिनों की वार्ता अवधि के मद्देनजर इस महत्वपूर्ण वैश्विक व्यापार मार्ग पर तनाव कम होने के संकेत मिल रहे हैं।

सप्ताहांत की सुस्ती के बाद सोमवार को लौटी रौनक

सैन्य टकराव के चलते बीते सप्ताहांत इस जलमार्ग पर यातायात काफी धीमा हो गया था और महज 24 जहाज ही यहां से गुजर सके थे। हालांकि, सोमवार को स्थिति में सुधार देखा गया और 40 जहाजों ने सुरक्षित रूप से इस मार्ग को पार किया। इससे पहले, बीते बुधवार को यहां से रिकॉर्ड 76 जहाज गुजरे थे, जो 1 मार्च के बाद की सबसे बड़ी संख्या है।

दो हिस्सों में बंटा समुद्री यातायात

फरवरी के आखिरी सप्ताह में ईरान द्वारा की गई प्रभावी समुद्री नाकेबंदी के कारण फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में सैकड़ों मालवाहक जहाज फंस गए थे। वर्तमान में यह यातायात दो अलग-अलग रणनीतियों के तहत काम कर रहा है:

  • ईरानी मार्ग: पूर्व से पश्चिम की ओर जाने वाले कई जहाज ईरान की मांग को स्वीकार करते हुए उसके तटवर्ती समुद्री मार्ग का उपयोग कर रहे हैं।

  • ओमान मार्ग: वहीं, अन्य जहाजों ने ओमान के तट के करीब से गुजरने वाला वैकल्पिक मार्ग चुना है, जिन्हें अमेरिकी नौसेना द्वारा सुरक्षा और सहायता प्रदान की जा रही है।

सुरक्षा कारणों और सटीक ट्रैकिंग से बचने के लिए इस क्षेत्र से गुजरने वाले कई जहाजों ने अपने ट्रांसपोंडर (लोकेशन ट्रैकर) बंद कर रखे हैं, जिससे वास्तविक संख्या का सटीक आकलन करना थोड़ा चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

परमाणु कार्यक्रम पर मतभेद बरकरार, कतर में आज से वार्ता

इस बीच, दोनों देशों के शीर्ष वार्ताकार बातचीत के एक नए और बेहद संवेदनशील दौर के लिए कतर की राजधानी दोहा पहुंच रहे हैं। हालांकि, क्षेत्र में अस्थाई शांति जरूर है, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक प्रतिबंधों जैसे मुख्य मुद्दों पर अमेरिका और ईरान के बीच अभी भी गहरे मतभेद बने हुए हैं। वैश्विक बाजार की नजरें अब दोहा में होने वाली इस कूटनीतिक बैठक पर टिकी हैं, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली तेल और गैस की निर्बाध आपूर्ति सीधे तौर पर इन्हीं वार्ताओं की सफलता पर निर्भर करेगी।

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