मानसून ने उत्तराखंड में दी दस्तक, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर भी बारिश की जद में
उत्तर भारत में मानसून सक्रिय, अगले कुछ दिनों में भारी वर्षा की संभावना
देहरादून, 1 जुलाई। लगभग दस दिन की देरी के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून ने आखिरकार उत्तराखंड में दस्तक दे दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार 30 जून को मानसून उत्तराखंड के अधिकांश हिस्सों, हिमाचल प्रदेश के कुछ भागों तथा लद्दाख तक पहुंच गया है, जबकि अगले 2-3 दिनों में इसके पूरे उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में फैलने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं।
आईएमडी ने बताया है कि मानसून के सक्रिय होने के साथ ही उत्तराखंड में 30 जून से 6 जुलाई तक व्यापक वर्षा होने की संभावना है। 1 और 2 जुलाई को राज्य के कई जिलों में कहीं-कहीं बहुत भारी वर्षा हो सकती है, जबकि 3 से 6 जुलाई के दौरान भी भारी बारिश का दौर जारी रहने की आशंका है। तेज गर्जना, बिजली चमकने और 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की भी संभावना जताई गई है।
हिमाचल प्रदेश में भी मानसून की सक्रियता तेजी से बढ़ रही है। मौसम विभाग के अनुसार 1 से 6 जुलाई तक अधिकांश क्षेत्रों में व्यापक वर्षा होगी। 2 से 4 जुलाई के बीच कई स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा होने की संभावना है, जिससे भूस्खलन, अचानक बाढ़ और सड़क अवरोध जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।
जम्मू-कश्मीर में भी मानसून का प्रभाव दिखाई देने लगा है। 1 से 6 जुलाई तक अधिकांश क्षेत्रों में वर्षा का पूर्वानुमान है। विशेष रूप से 2 से 4 जुलाई के बीच भारी बारिश होने की संभावना व्यक्त की गई है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और नदियों-नालों के जलस्तर में तेजी से वृद्धि की आशंका को देखते हुए प्रशासन को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में 3 जुलाई के आसपास एक निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है, जिसके प्रभाव से मध्य और उत्तर भारत में मानसून और अधिक सक्रिय होगा। इसके कारण उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में वर्षा की तीव्रता बढ़ सकती है।
मानसून की देरी के कारण जून में उत्तराखंड सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में वर्षा सामान्य से कम रही थी। अब मानसून के सक्रिय होने से वर्षा की कमी दूर होने, कृषि गतिविधियों को गति मिलने तथा तापमान में गिरावट आने की उम्मीद है। हालांकि लगातार और तीव्र वर्षा के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, सड़क बंद होने और नदी-नालों के उफान पर आने का खतरा भी बढ़ गया है।
आईएमडी ने चारधाम यात्रा, अमरनाथ यात्रा और अन्य पर्वतीय मार्गों पर यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को मौसम संबंधी ताजा बुलेटिन पर नजर रखने तथा जिला प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की है। संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।
