Front Page

मानसून की दस्तक के साथ ही चमोली जिले के ऊपजाऊ सेरे होने लगे गुलजार

दिग्पाल गुसाईं की रिपोर्ट –
गौचर, 1 जुलाई। क्षेत्र में मानसून की दस्तक के साथ ही गौचर-पनाई सहित चमोली जिले के उपजाऊ सेरों में धान की रोपाई का कार्य पूरे उत्साह के साथ शुरू हो गया है। खेतों में महिलाओं की सामूहिक रोपाई, उनकी हंसी-ठिठोली और आपसी सहयोग की भावना ने ग्रामीण जीवन की पारंपरिक संस्कृति को फिर जीवंत कर दिया है।
गौचर-पनाई क्षेत्र अपनी अत्यंत उपजाऊ कृषि भूमि के लिए प्रसिद्ध रहा है, जहां वर्षों से बड़े पैमाने पर धान की खेती की जाती रही है। एक समय ऐसा था जब धान की रोपाई के लिए रिश्तेदारों और पड़ोसियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाता था। काश्तकार कई दिन पहले से इसकी तैयारियां करते थे और सामूहिक श्रम की यह परंपरा ग्रामीण सामाजिक एकता का प्रतीक मानी जाती थी।
हालांकि, लगभग तीन दशक पहले इस ऐतिहासिक कृषि क्षेत्र को बड़ा झटका लगा। भारी विरोध के बावजूद यहां की उपजाऊ भूमि का बड़ा हिस्सा हवाई पट्टी के निर्माण में चला गया। इसके बाद तेजी से हुए भवन निर्माण के कारण खेती योग्य भूमि का रकबा लगातार घटता गया। इसके बावजूद आज भी इस क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में धान की खेती की जा रही है।
क्षेत्र के किसानों की सबसे बड़ी समस्या सिंचाई है। बढ़ती आबादी के कारण सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी का उपयोग पेयजल के रूप में होने लगा है, जिससे गर्मियों में खेतों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता। जून माह में धान की नर्सरी को बचाए रखना किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है और उन्हें मानसून की पहली बारिश का बेसब्री से इंतजार रहता है।
बुधवार को मानसून की पहली हल्की बारिश शुरू होते ही किसानों के चेहरों पर खुशी लौट आई। खेतों में रोपाई का कार्य शुरू हो गया और महिलाओं ने पारंपरिक गीतों, हंसी-मजाक और सामूहिक श्रम के बीच धान रोपना प्रारंभ किया। रोपाई के दौरान लोगों को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है और इस अवसर पर खेतों में विशेष पकवान बनाकर सामूहिक रूप से भोजन करने की परंपरा आज भी कायम है।
गौचर-पनाई क्षेत्र कृषि उत्पादन के लिए लंबे समय से पहचान रखता है। यहां के अनेक प्रगतिशील किसानों को तत्कालीन पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय द्वारा ‘कृषि पंडित’ की उपाधि से सम्मानित किया जा चुका है। इनमें पनाई गांव के स्वर्गीय माधो सिंह नेगी, शूर सिंह भंडारी, बंदरखंड के ज्ञान सिंह कनवासी, मान सिंह कनवासी, भजन सिंह गुसाईं, कैरा सिंह गुसाईं, रावलनगर के दीवान सिंह बिष्ट तथा भटनगर के जसवंत सिंह खत्री, कैरा सिंह खत्री और गोविंद सिंह खत्री सहित अनेक किसान शामिल रहे हैं।
मानसून की पहली फुहार के साथ खेतों में शुरू हुई धान रोपाई ने न केवल किसानों में नई उम्मीद जगाई है, बल्कि इस क्षेत्र की समृद्ध कृषि परंपरा और सामुदायिक संस्कृति को भी एक बार फिर जीवंत कर दिया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!